ये मेरी कहानी सच्ची है मैं जयपुर का रहने वाला हु मेरा नाम राहुल है और ये बात जब की जब मेरी स्कूलिंग ख़त्म हो गई थी और कोलेज में दाखिले की तयारी थी इस कहानी का हीरो मैं हु और हेरोइन मेरी कजिन रिटा है रिटा अबू धाबी में रहती है और वो हर साल छुट्टियों में इंडिया हमारे घर यानि अपनी मोसी के घर आती थी हर साल हम सभी कजिनस छुट्टिया साथ बिताते थे 10 हम कजिन है हमउम्र जिनमे से छ हम लड़के थे और चार लडकिया थी हर बार की तरह इस बार पियासी कुछ नया नहीं था हम वही पिछले सालो की तरह से मस्ती करने के लिए मेरे घर पर जुटे थे इस बार बस जो अलग था वो ये की अब हम सब जवान हो गए थे सिवाए रिटा की बहन ऋचा के वो हम सब में सबसे छोटी थी पर वो भी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी थी वो स्वीट की हो गई थी हमारी छुटिया बड़े मजे से गुजर गई और महिना कब ख़तम हो गया पता ही नहीं चला अब सबके वापिस जाने का टाइम आ गया था और अब सिर्फ घर पर 10 में से हम तीन ही बचे थे मैं, रिटा और ऋचा अभी तक हम सब से साथ होने की वजह से कुछ स्पेशल नहीं था पर अब सिर्फ मैं ही था जो उनको इस शहर में घुमा सकता था और बाकि के सप्ताह भर तक मस्ती कराता अब मेरी दोनों बहने मेरे नखरे उठाने लगी और ऋचा जो की अभी थोड़ी सी छोटी थी या यु कहू की पूरी तरह से जवान नहीं हुई थी वो मुझसे बाईक सीखना चाहती थी और जैसे ही उसने मुझसे कहा तो मोसी ने मन कर दिया इस पर मेरे पापा ने बोला कोई दिक्कत नहीं होगी क्युकी मैं पडोसी के लड़के को चलाना सिखा चूका हु 4 पिछले साल से बाईक चला रहा हु ऋचा को इजाजत मिलते ही रिटा ने पियासी कहा की वो पियासी सीखेगी अब रोज रात को तक़रीबन 10 - 11 बजे मैं दोनों को बाईक चलाना सिखाने लगा क्युकी पहले ऋचा ने कहा था इसलिए मैं पहले उसे सिखाने के लिए लेकर गया रात बहुत थी इसलिए सभी घर में ही बैठे थे और सिर्फ मैं और ऋचा ही बहार निकले मेने ऋचा को कहा कि आज पहले सिर्फ तू हेंडल करना सीख ले और मैंने उसे सिखाना शुरू किया वो मेरी उम्मीद से कही बेहतर थी 5 उसने मिनट में ही सीख लिया अब बारी आई रिटा की, अब मैं निश्चिन्त था की जब ऋचा ने इतना अच्छा बेलेंस किया है तो रिटा तो और पियासी आराम से कर लेगी पर मैं गलत था अभी मैंने उसे हेंडल दिया ही था की हम गिरते गिरते बचे अगर मैं पैर जमीन पर नहीं टिकाता तो हम दोनों ही जमीन पर होते बाईक संभालने के चक्कर में मेरा लेफ्ट हाथ तो उसके पेट पर था पर मेरा सीधा हाथ उसके राईट साइड के आर्म पिट से कुछ निचे था और क्युकी बाईक लेफ्ट साइड में गिर रही थी तो मेने अपना लेफ्ट पैर जमीन पर टिका रखा था और मैं उसी तरफ झुका हुआ था उस वक़्त तो मेरा पूरा ध्यान सिर्फ बाईक पे था पर जब बाईक संभल गयी तब मेने महसूस किया की मेरे राईट हाथ रिटा के बूब को साइड से छु रहा था मैं मेरी हालत बयान नहीं कर सकता क्युकी वो मेरा पहला अनुभव था बूब छूने का और वो भी मेरी के, अब मेरे अन्दर एक जंग शुरू हो गयी की ये सही है या गलत पर मेरा हाथ वही था रिटा के बूब पर अभी मैं अपने आप में संभालता उससे पहले ही रिटा ने सॉरी सॉरी कहना शुरू कर दिया .... उसे लग रहा था कि अभी उसकी वजह से हम गिर जाते अब भी मेरा हाथ वही था मेने अपने दुसरे हाथ से बाईक सीधी कि और सोचा कि मैं बिना बात के ही डर रहा था इसे तो पता भी नहीं है कि मैं इसके बूब को छु रहा हु अब मैं उससे बिलकुल चिपक कर बैठ गया और अपने दोनों हाथ ठीक उसकी आर्म पिट के निचे से ले जाते हुए बाईक का हेंडल पकड़ा और उसे बाईक सिखाने लगा रिटा का पूरा ध्यान बाईक पर था और मेरा उसके बूब्स पर और इसी तरह से हमने करीब आधा घंटा बाईक चलाई जब घर आये तो ऋचा ने कहा इसे इतनी देर तक क्यों सिखाई तो मेने कहा इसको तो हेंडल करना भी आता और ये तो तुझसे बहुत फिस्सडी है इस बात पर सभी हंसने लगे और रिटा नाराज हो गई मैं उसको मानाने गया तो उसने कहा कि उसे नहीं सीखनी बाईक ये सुनते ही मेरे सारे ख्वाब हवा हो गए और मैं उससे मानाने में लग गया और उसे मानाने में रात 2 के बज गए फिर हम तीनो मेरे कमरे में सो गए एक तरफ मैं बीच मैं ऋचा और फिर रिटा .. ... वो दोनों तो जल्दी से सो गयी पर मेरी नींद तो उड़ चुकी थी मैं तो सिर्फ रिटा के बूब के बारे में सोच रहा था अब मैं हरामी हो गया था और यही सोच रहा था कि अभी तो सिर्फ साइड से ही छुए है पुरे बूब को दबाने का मजा कैसे लू फिर मेने एक प्लान बनाया फिर मेने सोने कि कोशिश कि पर नींद नहीं आ रही थी और इच्छा हो रही कि अभी एक बार और छु कर देखू पर रिटा तक पहुचना मुश्किल था तो मेने सोचा कि रिटा के खरबूजे नहीं तो ऋचा के छोटे छोटे नीबू ही सही मैंने सोने का नाटक करते हुए अपना एक हाथ ऋचा के नीबू पर रखा रिटा के बूब बड़े थे इसलिए बहुत सोफ्ट थे हल्के से में ही दब जाते थे पर ऋचा के छोटे थे और वो भी ब्रा में कैद तो मुझे हाथ रखने में मजा नहीं आया एक बार तो मेने सोचा कि अब तो कल ही मिलेगा मुझे पर मेरे अन्दर के शैतान ने कहा कि एक बार दबा के देख लेना चाहिए और मेने हिम्मत करके अपने हाथ का दबाव बढाया अब मुझे कुछ कुछ मजा आने लगा और ज्यादा करने कि इच्छा होने लगी मैं अब ऋचा के पास सरक गया और अपनी उंगलियों से उसके निप्पल को छूने कि कोशिश करने लगा जैसे ही मेरा हाथ उसके निप्पल को लगा ऋचा ने हरकत करी मेरी गांड फट गयी और मैंने अपना हाथ हटा लिया पर जब देखा कि वो नींद में है और उसे नहीं पता चला तो मेने रिटा के बूब छूने कि कोशिश करी मेने अपना हाथ रिटा तक ले जाने कोशिश करी तो पता चला कि दूसरी तरफ मुह करके सो रही है मेने अपने आप से कहा हो गई खड़े लंड पर चोट और मैं वापिस से ऋचा के बूब पर अपना हाथ ले जाने लगा तभी ऋचा ने करवट ली और वो अपने दोनों बूब्स को गद्दे में दबा कर सो गई अब मैं पागल हो गया की खरबूजे के चक्कर में नीबू भी गए और मैं उठ कर बैठ गया करीब १० मिनट के बाद रीता ने करवट ली और वो अब हमारी तरफ करवट ले कर सो रही थी|
Sunday, 22 February 2015
शबनम और उसकी बेटी
हाय मेरा नाम विपिन है।मेरी वर्तमान उम्र ३५ साल है। मैं अपनी किशोरावस्था से बहुत ही सेक्सी रहा हूँ। मैं अभी इंदौर मैं रहता हूँ। मैंने आज तक करीब ५० से ऊपर लड़की और आंटी के मजे लिए हैं और उनकी चूत को अपने लंड के दर्शन कराये हैं।
मेरे साथ घटी एक घटना आपको बता रहा हूँ, कहानी सच्ची है पर पात्रों के नाम बदल कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और मेरी उम्र २७ साल थी।
एक दोस्त के माध्यम से एक मुस्लिम परिवार में आना जाना था। पाँच लोगों का परिवार था वो। पति सलीम ट्रक ड्राईवर जो ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था जिसको मैंने कभी घर पर नहीं देखा और न ही उसकी शकल जानता हूँ। पत्नी शबनम, थोड़ा सांवला रंग पर कसा हुआ बदन ३४-२८-३६ उम्र उस समय ३६-३७, बड़ी लड़की शमीम उमर १८, रंग साफ़ ३०-२८-३४ दिखने में साधारण उससे छोटी बानो, और सबसे छोटा लड़का उम्र १० साल मैं एक बार उनके घर गया तो शबनम ने कहा कि घर मैं तंगी है इसलिए शमीम को कहीं नौकरी लग जाए तो अच्छा रहेगा। मैंने मेरे ऑफिस में उसको नौकरी पर रख लिया। मैं उस वक्त तक उनके बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोचता था।
करीब एक महीने तक उसने मेरे यहाँ काम किया उसके बाद २-३ दिन वो आई नहीं, मैंने भी ध्यान नहीं दिया, एक दिन मैं मार्केट मैं था तो मुझे शमीम जाती हुई दिखी। मैंने बाईक उसकी तरफ़ मोड़ी और उससे पूछा कि क्या बात है तुम ऑफिस नहीं आ रही हो?
तो उसने बोला कि तबियत ठीक नहीं थी, और अभी आप मुझे घर छोड़ दो।
मैंने उसे बाइक पे बिठा लिया, इससे पहले मैंने कभी उसे बाइक पर नहीं बिठाया था। उसके बैठते ही उसके मम्मे मेरी पीठ पर गडे। मेरा लंड खड़ा हो गया।उसका घर दूर था हम बात करते हुए चल रहे थे, रास्ते में सिनेमा हॉल आया तो मैंने उसे पूछा कि पिक्चर देखनी है ?
उसने हाँ कर दी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही गया था सो उसे ठंडा करना जरूरी भी था। सिनेमा हॉल में मुश्किल से ३० लोग भी नहीं थे। हमने कोने की सीट पकड़ी और बैठ गए। पिक्चर चल रही थी कि मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने सिग्नल ग्रीन समझ कर धीरे से उसके मम्मों पर हाथ रख दिया उसने उसका भी कोई प्रतिवाद नहीं किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई, इधर पैंट में लंड कड़क होने लगा था।
मैंने धीरे -२ उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिए उसे भी अच्छा लग रहा था। धीरे से मैं अपने हाथ उसके कुरते के अन्दर ले जाकर उसकी ब्रा के ऊपर और अन्दर से उसके निप्पल और गोलाई के मजे लेने लगा। पर दोस्तों ! मजा अभी भी अधूरा था।
तो मैंने धीरे से उसकी सलवार में हाथ डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ चलाने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा था पर वो शायद पहल करने में अभी भी शरमा रही थी। मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड जो अब तक काफी तगड़ा हो चुका था बाहर निकल लिया
और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लंड पर रख दिया, वो शायद इसका ही इंतजार कर रही थी।
इधर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। वो भी मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहला रही थी। मैं कभी उसके दूध दबाऊं और कभी उसकी चूत में उंगली डालूँ।
दोस्तों मुझे बिल्कुल भी अपनी तकदीर पर विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसे अकस्मात मुझे उस लड़की का सब कुछ मिल जाएगा जिसे मैंने कभी इस नज़र से देखा ही नहीं।
इधर उसके हाथ मेरे लंड पर कसावट के साथ चलते जा रहे थे और दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ जो उसकी चूत में था उसको पकड़ लिया और मेरे हाथ को वो अपनी चूत में तेज़ी से अन्दर बाहर करने लगी। उसकी चूत ने थोडी देर में ही पानी छोड़ दिया जिसे उसने अपने रुमाल से पोंछ लिया। अब उसकी बारी थी मैंने उसे मेरा लंड मुंह में लेने के लिए बोला तो उसने ना कर दिया। फिर वो मेरी तरफ़ इस तरीके से मुड़ गई कि मैं उसके दूध पी सकूं मैंने उसके दूध पीने शुरू कर दिए, इधर उसने मेरे लंड पर अपना हाथ और तेज़ कर दिया जिससे मेरा पानी निकल जाए पर कमबख्त पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।
फिर मैंने उसकी सलवार उतार कर घुटने तक कर दी और पैंटी नीचे खिसका कर उसे इस तरह से बिठाया कि उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर आ जाए। मैंने उसे इस पोसिशन में बिठाकर नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए मेरा लंड उसकी चूत में अन्दर तक गया था, वो भी मेरे लंड के मज़े लेने लगी इधर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके मम्मे दबाना और मसलना जारी रखा। करीब तीन मिनट की उछल कूद के बाद उसने अपनी गांड मेरे लंड पर दबा ली और मेरी जाँघों पर अपने हाथ कस लिए। मैं समझ गया कि ये अब जाने वाली है, मैंने भी अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल कर उसके मम्मे दबाते हुए अपना पानी निकाल दिया।
उसके बाद हमने अपने-२ रूमाल से अपने लंड और चूत साफ़ किए और सामान्य होकर बैठ गए। उसने बोला कि अब आप मेरे को घर छोड़ दो क्योंकि घर पर मेरा इंतज़ार हो रहा होगा। उसने मुझे ये भी बोला कि घर पर मत बताना कि हम पिक्चर गए थे। दोस्तों मुझे चुदाई का शुरू से ही बहुत शौक रहा है। अभी मैं चाहता हूँ कि नई चूत चोदने के लिए मिले ! अगली बार आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने शबनम और उसकी बेटी की एक ही पलंग पर रात भर चुदाई की। मेरी अगली कहानी का
मेरे साथ घटी एक घटना आपको बता रहा हूँ, कहानी सच्ची है पर पात्रों के नाम बदल कर आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और मेरी उम्र २७ साल थी।
एक दोस्त के माध्यम से एक मुस्लिम परिवार में आना जाना था। पाँच लोगों का परिवार था वो। पति सलीम ट्रक ड्राईवर जो ज्यादातर घर से बाहर ही रहता था जिसको मैंने कभी घर पर नहीं देखा और न ही उसकी शकल जानता हूँ। पत्नी शबनम, थोड़ा सांवला रंग पर कसा हुआ बदन ३४-२८-३६ उम्र उस समय ३६-३७, बड़ी लड़की शमीम उमर १८, रंग साफ़ ३०-२८-३४ दिखने में साधारण उससे छोटी बानो, और सबसे छोटा लड़का उम्र १० साल मैं एक बार उनके घर गया तो शबनम ने कहा कि घर मैं तंगी है इसलिए शमीम को कहीं नौकरी लग जाए तो अच्छा रहेगा। मैंने मेरे ऑफिस में उसको नौकरी पर रख लिया। मैं उस वक्त तक उनके बारे में कुछ भी ग़लत नहीं सोचता था।
करीब एक महीने तक उसने मेरे यहाँ काम किया उसके बाद २-३ दिन वो आई नहीं, मैंने भी ध्यान नहीं दिया, एक दिन मैं मार्केट मैं था तो मुझे शमीम जाती हुई दिखी। मैंने बाईक उसकी तरफ़ मोड़ी और उससे पूछा कि क्या बात है तुम ऑफिस नहीं आ रही हो?
तो उसने बोला कि तबियत ठीक नहीं थी, और अभी आप मुझे घर छोड़ दो।
मैंने उसे बाइक पे बिठा लिया, इससे पहले मैंने कभी उसे बाइक पर नहीं बिठाया था। उसके बैठते ही उसके मम्मे मेरी पीठ पर गडे। मेरा लंड खड़ा हो गया।उसका घर दूर था हम बात करते हुए चल रहे थे, रास्ते में सिनेमा हॉल आया तो मैंने उसे पूछा कि पिक्चर देखनी है ?
उसने हाँ कर दी। मेरा लंड तो खड़ा हो ही गया था सो उसे ठंडा करना जरूरी भी था। सिनेमा हॉल में मुश्किल से ३० लोग भी नहीं थे। हमने कोने की सीट पकड़ी और बैठ गए। पिक्चर चल रही थी कि मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने सिग्नल ग्रीन समझ कर धीरे से उसके मम्मों पर हाथ रख दिया उसने उसका भी कोई प्रतिवाद नहीं किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई, इधर पैंट में लंड कड़क होने लगा था।
मैंने धीरे -२ उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिए उसे भी अच्छा लग रहा था। धीरे से मैं अपने हाथ उसके कुरते के अन्दर ले जाकर उसकी ब्रा के ऊपर और अन्दर से उसके निप्पल और गोलाई के मजे लेने लगा। पर दोस्तों ! मजा अभी भी अधूरा था।
तो मैंने धीरे से उसकी सलवार में हाथ डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ चलाने लगा। अब उसको भी मजा आने लगा था पर वो शायद पहल करने में अभी भी शरमा रही थी। मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड जो अब तक काफी तगड़ा हो चुका था बाहर निकल लिया
और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने लंड पर रख दिया, वो शायद इसका ही इंतजार कर रही थी।
इधर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। वो भी मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहला रही थी। मैं कभी उसके दूध दबाऊं और कभी उसकी चूत में उंगली डालूँ।
दोस्तों मुझे बिल्कुल भी अपनी तकदीर पर विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसे अकस्मात मुझे उस लड़की का सब कुछ मिल जाएगा जिसे मैंने कभी इस नज़र से देखा ही नहीं।
इधर उसके हाथ मेरे लंड पर कसावट के साथ चलते जा रहे थे और दूसरे हाथ से उसने मेरा हाथ जो उसकी चूत में था उसको पकड़ लिया और मेरे हाथ को वो अपनी चूत में तेज़ी से अन्दर बाहर करने लगी। उसकी चूत ने थोडी देर में ही पानी छोड़ दिया जिसे उसने अपने रुमाल से पोंछ लिया। अब उसकी बारी थी मैंने उसे मेरा लंड मुंह में लेने के लिए बोला तो उसने ना कर दिया। फिर वो मेरी तरफ़ इस तरीके से मुड़ गई कि मैं उसके दूध पी सकूं मैंने उसके दूध पीने शुरू कर दिए, इधर उसने मेरे लंड पर अपना हाथ और तेज़ कर दिया जिससे मेरा पानी निकल जाए पर कमबख्त पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था।
फिर मैंने उसकी सलवार उतार कर घुटने तक कर दी और पैंटी नीचे खिसका कर उसे इस तरह से बिठाया कि उसकी चूत मेरे लंड के ऊपर आ जाए। मैंने उसे इस पोसिशन में बिठाकर नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए मेरा लंड उसकी चूत में अन्दर तक गया था, वो भी मेरे लंड के मज़े लेने लगी इधर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके मम्मे दबाना और मसलना जारी रखा। करीब तीन मिनट की उछल कूद के बाद उसने अपनी गांड मेरे लंड पर दबा ली और मेरी जाँघों पर अपने हाथ कस लिए। मैं समझ गया कि ये अब जाने वाली है, मैंने भी अपना लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल कर उसके मम्मे दबाते हुए अपना पानी निकाल दिया।
उसके बाद हमने अपने-२ रूमाल से अपने लंड और चूत साफ़ किए और सामान्य होकर बैठ गए। उसने बोला कि अब आप मेरे को घर छोड़ दो क्योंकि घर पर मेरा इंतज़ार हो रहा होगा। उसने मुझे ये भी बोला कि घर पर मत बताना कि हम पिक्चर गए थे। दोस्तों मुझे चुदाई का शुरू से ही बहुत शौक रहा है। अभी मैं चाहता हूँ कि नई चूत चोदने के लिए मिले ! अगली बार आपको बताऊँगा कि कैसे मैंने शबनम और उसकी बेटी की एक ही पलंग पर रात भर चुदाई की। मेरी अगली कहानी का
चाची ने मुझे चुदवाया
मैं उन दिनों अपने चाचा के यहां आई हुई थी। मैं एम ए की छात्रा थी। चाचा बिजनेस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिये दिल्ली गये हुए थे। चाची घर पर ट्यूशन पढाती थी। चाची का नाम सुमन था। उनकी उम्र 35 वर्ष की थी। उसके पास कोलेज दो के छात्र पढने आते थे। रवि और सोनू नाम था उनका। दोनो ही 20 - 21 वर्ष के थे। मुझे पहले दिन से ही वो हाय हेल्लो करने लगे थे। उन दोनों से मेरी जल्दी ही दोस्ती हो गयी थी। ऊपर का कमरा खाली था सो सुमन उन्हे वहीं पढाया करती थी।
एक बार जब सुमन ट्यूशन पढा रही थी तब मैं किसी काम से ऊपर कमरे में गयी। जैसे ही मैं कमरे के पास पहुचीं तो मुझे सिसकारी की आवाज सुनायी पडी। मैं सावधान हो गयी। तभी मुझे फिर से हाऽऽय की आवाज सुनायी पडी। मैने धीरे से खिडकी से झांक कर देखा। वो लडके सुमन की चूंचियां दबा रहे थे। सुमन ने पेन्ट के ऊपर से ही एक का लन्ड पकड रखा था। सुमन बार बार आनन्द से सिसकारियां भर रही थी। मैं दबे पांव पीछे हट गयी और नीचे उतर आई।
मेरे सारे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी थी। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी। मेरी सांसे तेज चल रही थी। मेरे मन में उत्तेजना भरने लगी थी। मुझसे रहा नहीं गया…… मैं फिर से दबे पांव ऊपर गई … मैने फिर से झांक कर देखा… मुझे पसीना छूटने लग गया। कमरे में सभी नंगे थे… रवि ने अपना लन्ड सुमन की चूत में डाल रखा था…और तबियत से चोद रहा था…… सोनू ने अपना लन्ड सुमन के मुँह में दे रखा था… मैं फिर नीचे आ गयी… मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी… मैं अपनी चूत दबा कर बैठ गयी। मैं भी जवान थी…मेरे पास भी जवानी का पूरा खजाना था। मेरे मन में भी चुदवाने तेज इच्छा उठने लगी। मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी… जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा।
मैं मन मार कर कमरे से बाहर निकल आई… पास की दुकान से अपना मोबाईल रीचार्ज करवाने लगी। जब मैं वापस आई तो उनका कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। रवि और सोनू जाने की तैयारी में थे। मुझे देख कर कर वो दोनों ही मुसकराये, मैने भी उन्हे तिरछी निगाहों से मुसकरा कर देखा। वो दोनो चले गये और मैं सुमन की किस्मत पर जल उठी… जो कि दो जवान लण्डों की मालकिन थी। मेरे मन में हलचल हो रही थी…। मन अशान्त था …… मुझसे सुमन की चुदाई बरदाश्त नही हो पा रही थी।
रात के करीब 10 बज रहे थे…। मैने कमरे की लाईट बन्द कर दी और सोने के लिये लेट गयी। पर नींद कहां थी। रह रह कर सुमन की चुदाई की याद आ रही थी। मैने अपनी पेन्टी उतारी , रात को मैं ब्रा नहीं पहनती थी। मैने सोचा कि चूत में उंगली करके झड़ जाती हूं…… पर मुझे उसी समय बाहर कुछ आवाज आई… मैने दरवाजे से झांक कर देखा तो रवि और सोनू सुमन के कमरे की तरफ़ जा रहे थे। मैने अपने कमरे के दरवाजे के छेद में आंखे गडा दी , यह दरवाजा चाचा के कमरे में खुलता था, और सुनने का प्रयास करने लगी। मुझे ये सुन कर हैरानी हुई कि सुमन उन दोनो के साथ मेरी चुदाई का प्रोग्राम बना रही थी… पर कैसे…?
वे तीनों मेरे कमरे की ओर आने लगे। मैं भाग कर अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी। मुझे लगा कि वो तीनों मेरे कमरे के बाहर आ गये है…… तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला… मैने देखा सुमन पहले अन्दर आयी… फिर दोनो उनके पीछे पीछे आये……। मैने सोने का बहाना किया। सोनू ने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया। पर तीनों मेरे साथ क्या करेंगे …… क्या बलात्कार… यानी मेरी चुदाई… मेरा मन खुशी के मारे उछलने लगा…बिना कुछ किये मन की मुराद पूरी हो जाये तो… फिर ऊपर वाले का धन्यवाद करो…। मेरा सोचना बिलकुल सही निकला। रवि ने लाईट जला दी… मुझे देख कर उन दोनो के मुंह में पानी आ गया। मैने पेन्टी और ब्रा वैसे भी नहीं पहन रखी थी। स्कर्ट भी जांघों से उपर आ चुका था। अन्दर से मेरी चूत झांक रही थी।
रवि ने बिस्तर पर पास बैठ कर मेरी छोटी सी कमीज़ को ऊपर कर दिया। मेरे नंगी चूंचियां उसके सामने तनी हुयी खडी थी। मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मुझे लग रहा था कि मेरी चूंचियां पकड कर मसल दे… लेकिन उसने बडे प्यार से मेरे स्तन सहलाये… मेरी नोकों को हौले हौले से पकड कर मसलते हुये घुमाया। इतने में सोनू ने मेरे स्कर्ट को ऊंचा करके मेरी चूत नंगी कर दी। अचानक मुझे मेरी चूत पर गीलापन लगा…… सोनू की जीभ से थूक मेरी चूत पर टपका कर उसे चाट लिया था…… मैं तड़प उठी… पर मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पडा। सुमन ने मेरे दोनो हाथ ऊपर कस कर पकड़ लिये। सोनू ने मेरी टांगे चीर कर फ़ैला दी। और मेरी टांगों के बीच में आ गया। अब मुझे लग गया कि मैं चुदने वाली हूं……तो मैने नाटक शुरु कर दिया…… मैने जाग जाने का नाटक किया…
"अरे ये क्या…… छोडो मुझे……… चाची…"
"चुप हो जा…कुतिया… मजे ले अब…"
" चाची… नहीं प्लीज़……"
इतने में सोनू का लन्ड मेरी चूत में घुस गया। मन में मस्ती छा गयी। चूत को लन्ड मिल गया था… तेज गुदगुदी सी उठी।
"सोनू…ये क्या कर दिया तूने… मुझे छोड दे……मत कर ना…मादरचोद…"
"रीता रानी … ऐसी मस्त जवान लड़की को तो चुदना ही पड़ता है… देख क्य टाइट चूत है…अब हम तेरी बहन चोद देंगे।" सोनू मस्त हो कर बोला।
रवि मेरे चूंचकों को चूस रहा था… सुमन ने खुद के कपड़े उतार फ़ेंके…वो पूरी नंगी हो गयी। हम सभी को पता था कि कार्यक्रम सफ़ल हो चुका है। सुमन ने रवि की पेन्ट और कमीज़ उतार कर उसे नन्गा कर दिया। सोनू पहले ही नंगा हो चुका था। चाची मुझे समझा रही थी
"देख रीता… लन्ड तो तेरी चूत में फ़िट हो ही गया है… अब मजा ले ले…ना'
"चाची… प्लीज़… मत करो ना…देखो मैं मर जाऊगीं…" मैने फिर नाटक किया। चाची ने मेरे होंठ चूमते हुये कहा
"अच्छा… दो मिनट के बाद छोड देंगे… मजा नहीं आये… तो नहीं सही… बस"
चाची समझ चुकी थी…कि मै यूं ही ऊपर से कह रही हूं और वास्तव में मुझे मजा आ रहा है।
"सोनू …मत करो…… इसे अच्छा नहीं लग रहा है… चलो मेरी मां चोद दो…"
अरे ये क्या हो गया…मैने तुरन्त पासा पलटा……
"चाची… तुम बडी खराब हो…एक दम हरामी … मां की लौड़ी"
मैने नीचे से सोनू को नीचे से चूतड़ उछाल कर एक तेज धक्का दिया…। और रवि का लन्ड पकड कर अपने मुख में डाल दिया। मेरी फ़ुर्ती देख कर दोनों को मस्ती आ गयी। दोनो सिसकारियां भरने लगे। चाची ने रवि और सोनू को रोक दिया।
"अब देखो कोई जबरदस्ती नहीं करना है…ये मादरचोद तो… रीता राज़ी है …"
सभी बिस्तर पर बैठ गये… मेरे बचे हुये शरीर के कपडे भी उतार दिये। फिर सुमन सभी को बताने लगी कि उन्हे क्या करना है… मैने अपनी बात रख दी,"पहले सोनू को मेरे पर चढने दो… उसका लन्ड मेरी चूत में रहने दो…फिर बात करो…"
"चलो सोनू तुम रीता को चोद डालो…रवि तुम मुझे चोदो… फिर बदल लेंगे…"
सोनू मुझसे लिपट गया… मुझे बुरी तरह से चूमने चाटने लगा… उस ने मुझे तुरन्त मुझे घोड़ी बनाया… और अपना कड़क लन्ड मेरी गान्ड पर मारने लगा। तो सोनू अब मेरी गान्ड चोदेगा। मेरी गान्ड में उसने ढेर सारा थूक लगाया और लन्ड को छेद पर रख कर अन्दर दबा कर घुसा दिया… उसका लाल सुपाडा फ़क से अन्दर घुस गया। मैं आनन्द से निहाल हो उठी… दूसरे धक्के में आधा लन्ड अन्दर था… तीसरा धक्का लन्ड को पूरा जड़ तक ले गया…… गान्ड मैने कई बार चुदाई थी… इसलिये मुझे इसमें बहुत मजा आता है…उसका गान्ड में फ़ंसा हुआ मोटा सा लन्ड मुझे बहुत ही आनन्द दे रहा था। सोनू अब धीरे धीरे धक्के तेज़ करने लगा… उधर रवि और सुमन मेरे साथ ही आ गये… शायद रवि को मैं अधिक पसन्द आ रही थी… रवि ने मेरी चूंचियां पकड कर मचकानी चालू कर दी… सुमन ने भी अपनी कला दिखाने लगी… उसने अपनी दो उंगलियों को मेरी चूत में घुसा दी। मेरे मुख से आनन्द की हंसी और सिस्कारियां निकलने लगी। सोनू की धक्के मारने की गति तेज हो गयी थी… उसके मुख से आनन्द की सीत्कारें तेज हो उठी थी। मेरे चूतड अपने आप उछले जा रहे थे। मुझे ऐसे गान्ड मरवाने में बडा मजा आता था। सोनू के धक्के बढने लगे… उसका शरीर अकडने लगा।
अचानक सुमन ने मेरी चूत से दोनों उंगलियां निकाल दी और सोनू के दोनों चूतडों को कस कस के दबाने लगी। तभी सोनू के लन्ड ने मेरी गान्ड के अन्दर ही अपना वीर्य तेजी से छोड दिया। सुमन उसके चूतडों को दबाती ही रही जब तक कि उसका पूरा वीर्य नहीं छूट गया। तब रवि ने उसकी जगह ले ली। रवि बिस्तर पर लेट गया उसका खडा लन्ड मेरी चूत को आमन्त्रण दे रहा था … मैं रवि पर चढ गयी और उसके लन्ड को सीधे चूत पर टिका दिया… और फिर हौले से लन्ड पर दबा दिया…
"आऽऽऽऽऽऽह …… चुद गयी रे… चाची…"
"चुद जा… रीता…तेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार में ही तुझे दो दो लन्ड बिना कुछ किये ही मिल गये……चुद जा छिनाल अब…"
"चाची …… आई लव यू…… आप दिल की बात जानती हैं…आप बडी हरामी हैं…" मेरी बात सुन कर सुमन मुस्करा उठी…
"अब चुदने में मन लगा…रन्डी… मजा आयेगा…"
"हाय चाची …… चुद तो रही हू ना… देखो ना कैसे मोटे तगडे जवान लन्ड हैं…मेरी तो मां चोद देंगे ये…"
अब सोनू ने सुमन के उरोज पकड लिये… और लन्ड सुमन की गान्ड में घुसाने लगा… वह फिर से तैयार हो चुका था। सुमन हंस कर बोली-"देखा सोनू को … गान्ड मारने में माहिर है…… इसे सिर्फ़ गान्ड मारना ही अच्छा लगता है…"
मैं अब रवि पर लेट गयी थी… रवि नीचे से चुदाई का मजा ले रहा था। मैं उपर से उसे जबर्दस्त झटकों से चोद रही थी। मेरी गान्ड से सोनू का वीर्य निकल कर उसके लन्ड को तर कर रहा था।
"मेरे राजा… हाय…… क्या लन्ड है…मेरी चूत फ़ाड दे…राजा… " कहते हुये उसके खुले हुये मुख में मैने अपना मुख चिपका दिया… मेरे थूक से उसका चेहरा गीला हो गया था… पर मैं उसे चाटे जा रही थी। मुझे कुछ भी होश नही था। मेरा पूरा जोर उसके लन्ड पर था। फ़च फ़च की मधुर आवाजे माहोल को और सेक्सी बना रही थी। चूत के धक्कों से फ़च फ़च कि आवाज के साथ वीर्य के छीटें भी उछल रहे थे। उधर सोनू सुमन की गान्ड चोदने में लगा था।
अचानक रवि ने अन्गडाई ली … उसका लन्ड कडकने लगा…बेहद टाइट हो गया… उसका चेहरा लाल हो गया… दान्त भिंच गये……
' मै गया…… रानी…… निकला… हाऽऽऽऽय्…… गया…।"
मैने धक्कों की रफ़्तार बढा दी… अपनी चूत टाइट कर ली……… और मेरा भी निकलने को तैयार हो गया। मैने चूत टाइट कर के दो धक्के खींच के मारे …… तो उसकी और मेरी उत्तेजना चरम सीमा को पार कर गयी-"राजा …… मैं तो पूरी चुद गयी………गयी मैं तो…… निकला मेरा… हाऽऽऽऽय्…"
उधर रवि को झटके लगने चालू हो गये थे… उसका वीर्य झटके मार मार कर पिचकारी छोड रहा था। मैं भी झडने लगी थी…… हम दोनो ने एक दूसरे को कस कर पकड लिया। हमारा माल निकलता रहा…। अब हम पूरे झड चुके थे। हम ऐसे ही पडे सुस्ताते रहे…फिर में बिस्तर पर से उतर गयी।
सोनू भी झडने वाला था। उसका लन्ड सुमन की चूत चोद रहा था। मै और रवि ने तुरन्त उनकी मदद की… सुमन के चूचकों को मैने खींचना और मरोडना चालु कर दिया। रवि ने सोनू के चूतडों को जोर जोर से दबाने लगा… सुमन अचानक धीरे से चीख उठी… "रीतू… छोड मेरी चूंची को …… मैं गयी…… हाय… बस कर सोनू…"
पर सोनू तो चरम सीमा पर पहुन्च गया था… चूतडों के दबाते ही उसका लन्ड बरस पडा…… सारा वीर्य सुमन की चूत में भरने लगा। मैने सोनू के चूतडों को थपथपाया… और प्यार कर लिया…
रवि, मैं, सुमन वहीं बिस्तर पर लेट गये… और बातें करने लगे। मैं बोली-"चाची…… आज तो कस कर चुद गयी… थेन्क यू …चाची॥"
"मैने तुझे देख लिया था… फिर जब दूसरी बार आयी तो मैं समझ गयी …कि तू चुदना चाहती है…"
"चाऽऽऽची… जब मालूम था तो वहीं पकड कर क्यों नहीं चोद दिया…"
"नहीं रीतू रानी… बिना तडप के… चुदाई की कोई कीमत नही होती है…"
"नहीं चाची…… आप मुझे पकड के चुदवा देती… तो भी मुझे चुदना तो था ही ना॥"
"और अब चुदने में ज्यादा मजा आया ना…"
"आय… हाय चाची………मन शान्त हो गया… चूत की खुजली मिट गयी…"
सोनू और रवि बिस्तर के एक कोने में नन्गे पडे ही खर्राटे भर रहे थे… हम दोनो भी न जाने कब बातें करते करते सो गये
एक बार जब सुमन ट्यूशन पढा रही थी तब मैं किसी काम से ऊपर कमरे में गयी। जैसे ही मैं कमरे के पास पहुचीं तो मुझे सिसकारी की आवाज सुनायी पडी। मैं सावधान हो गयी। तभी मुझे फिर से हाऽऽय की आवाज सुनायी पडी। मैने धीरे से खिडकी से झांक कर देखा। वो लडके सुमन की चूंचियां दबा रहे थे। सुमन ने पेन्ट के ऊपर से ही एक का लन्ड पकड रखा था। सुमन बार बार आनन्द से सिसकारियां भर रही थी। मैं दबे पांव पीछे हट गयी और नीचे उतर आई।
मेरे सारे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी थी। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी। मेरी सांसे तेज चल रही थी। मेरे मन में उत्तेजना भरने लगी थी। मुझसे रहा नहीं गया…… मैं फिर से दबे पांव ऊपर गई … मैने फिर से झांक कर देखा… मुझे पसीना छूटने लग गया। कमरे में सभी नंगे थे… रवि ने अपना लन्ड सुमन की चूत में डाल रखा था…और तबियत से चोद रहा था…… सोनू ने अपना लन्ड सुमन के मुँह में दे रखा था… मैं फिर नीचे आ गयी… मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी… मैं अपनी चूत दबा कर बैठ गयी। मैं भी जवान थी…मेरे पास भी जवानी का पूरा खजाना था। मेरे मन में भी चुदवाने तेज इच्छा उठने लगी। मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी… जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा।
मैं मन मार कर कमरे से बाहर निकल आई… पास की दुकान से अपना मोबाईल रीचार्ज करवाने लगी। जब मैं वापस आई तो उनका कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। रवि और सोनू जाने की तैयारी में थे। मुझे देख कर कर वो दोनों ही मुसकराये, मैने भी उन्हे तिरछी निगाहों से मुसकरा कर देखा। वो दोनो चले गये और मैं सुमन की किस्मत पर जल उठी… जो कि दो जवान लण्डों की मालकिन थी। मेरे मन में हलचल हो रही थी…। मन अशान्त था …… मुझसे सुमन की चुदाई बरदाश्त नही हो पा रही थी।
रात के करीब 10 बज रहे थे…। मैने कमरे की लाईट बन्द कर दी और सोने के लिये लेट गयी। पर नींद कहां थी। रह रह कर सुमन की चुदाई की याद आ रही थी। मैने अपनी पेन्टी उतारी , रात को मैं ब्रा नहीं पहनती थी। मैने सोचा कि चूत में उंगली करके झड़ जाती हूं…… पर मुझे उसी समय बाहर कुछ आवाज आई… मैने दरवाजे से झांक कर देखा तो रवि और सोनू सुमन के कमरे की तरफ़ जा रहे थे। मैने अपने कमरे के दरवाजे के छेद में आंखे गडा दी , यह दरवाजा चाचा के कमरे में खुलता था, और सुनने का प्रयास करने लगी। मुझे ये सुन कर हैरानी हुई कि सुमन उन दोनो के साथ मेरी चुदाई का प्रोग्राम बना रही थी… पर कैसे…?
वे तीनों मेरे कमरे की ओर आने लगे। मैं भाग कर अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी। मुझे लगा कि वो तीनों मेरे कमरे के बाहर आ गये है…… तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला… मैने देखा सुमन पहले अन्दर आयी… फिर दोनो उनके पीछे पीछे आये……। मैने सोने का बहाना किया। सोनू ने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया। पर तीनों मेरे साथ क्या करेंगे …… क्या बलात्कार… यानी मेरी चुदाई… मेरा मन खुशी के मारे उछलने लगा…बिना कुछ किये मन की मुराद पूरी हो जाये तो… फिर ऊपर वाले का धन्यवाद करो…। मेरा सोचना बिलकुल सही निकला। रवि ने लाईट जला दी… मुझे देख कर उन दोनो के मुंह में पानी आ गया। मैने पेन्टी और ब्रा वैसे भी नहीं पहन रखी थी। स्कर्ट भी जांघों से उपर आ चुका था। अन्दर से मेरी चूत झांक रही थी।
रवि ने बिस्तर पर पास बैठ कर मेरी छोटी सी कमीज़ को ऊपर कर दिया। मेरे नंगी चूंचियां उसके सामने तनी हुयी खडी थी। मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मुझे लग रहा था कि मेरी चूंचियां पकड कर मसल दे… लेकिन उसने बडे प्यार से मेरे स्तन सहलाये… मेरी नोकों को हौले हौले से पकड कर मसलते हुये घुमाया। इतने में सोनू ने मेरे स्कर्ट को ऊंचा करके मेरी चूत नंगी कर दी। अचानक मुझे मेरी चूत पर गीलापन लगा…… सोनू की जीभ से थूक मेरी चूत पर टपका कर उसे चाट लिया था…… मैं तड़प उठी… पर मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पडा। सुमन ने मेरे दोनो हाथ ऊपर कस कर पकड़ लिये। सोनू ने मेरी टांगे चीर कर फ़ैला दी। और मेरी टांगों के बीच में आ गया। अब मुझे लग गया कि मैं चुदने वाली हूं……तो मैने नाटक शुरु कर दिया…… मैने जाग जाने का नाटक किया…
"अरे ये क्या…… छोडो मुझे……… चाची…"
"चुप हो जा…कुतिया… मजे ले अब…"
" चाची… नहीं प्लीज़……"
इतने में सोनू का लन्ड मेरी चूत में घुस गया। मन में मस्ती छा गयी। चूत को लन्ड मिल गया था… तेज गुदगुदी सी उठी।
"सोनू…ये क्या कर दिया तूने… मुझे छोड दे……मत कर ना…मादरचोद…"
"रीता रानी … ऐसी मस्त जवान लड़की को तो चुदना ही पड़ता है… देख क्य टाइट चूत है…अब हम तेरी बहन चोद देंगे।" सोनू मस्त हो कर बोला।
रवि मेरे चूंचकों को चूस रहा था… सुमन ने खुद के कपड़े उतार फ़ेंके…वो पूरी नंगी हो गयी। हम सभी को पता था कि कार्यक्रम सफ़ल हो चुका है। सुमन ने रवि की पेन्ट और कमीज़ उतार कर उसे नन्गा कर दिया। सोनू पहले ही नंगा हो चुका था। चाची मुझे समझा रही थी
"देख रीता… लन्ड तो तेरी चूत में फ़िट हो ही गया है… अब मजा ले ले…ना'
"चाची… प्लीज़… मत करो ना…देखो मैं मर जाऊगीं…" मैने फिर नाटक किया। चाची ने मेरे होंठ चूमते हुये कहा
"अच्छा… दो मिनट के बाद छोड देंगे… मजा नहीं आये… तो नहीं सही… बस"
चाची समझ चुकी थी…कि मै यूं ही ऊपर से कह रही हूं और वास्तव में मुझे मजा आ रहा है।
"सोनू …मत करो…… इसे अच्छा नहीं लग रहा है… चलो मेरी मां चोद दो…"
अरे ये क्या हो गया…मैने तुरन्त पासा पलटा……
"चाची… तुम बडी खराब हो…एक दम हरामी … मां की लौड़ी"
मैने नीचे से सोनू को नीचे से चूतड़ उछाल कर एक तेज धक्का दिया…। और रवि का लन्ड पकड कर अपने मुख में डाल दिया। मेरी फ़ुर्ती देख कर दोनों को मस्ती आ गयी। दोनो सिसकारियां भरने लगे। चाची ने रवि और सोनू को रोक दिया।
"अब देखो कोई जबरदस्ती नहीं करना है…ये मादरचोद तो… रीता राज़ी है …"
सभी बिस्तर पर बैठ गये… मेरे बचे हुये शरीर के कपडे भी उतार दिये। फिर सुमन सभी को बताने लगी कि उन्हे क्या करना है… मैने अपनी बात रख दी,"पहले सोनू को मेरे पर चढने दो… उसका लन्ड मेरी चूत में रहने दो…फिर बात करो…"
"चलो सोनू तुम रीता को चोद डालो…रवि तुम मुझे चोदो… फिर बदल लेंगे…"
सोनू मुझसे लिपट गया… मुझे बुरी तरह से चूमने चाटने लगा… उस ने मुझे तुरन्त मुझे घोड़ी बनाया… और अपना कड़क लन्ड मेरी गान्ड पर मारने लगा। तो सोनू अब मेरी गान्ड चोदेगा। मेरी गान्ड में उसने ढेर सारा थूक लगाया और लन्ड को छेद पर रख कर अन्दर दबा कर घुसा दिया… उसका लाल सुपाडा फ़क से अन्दर घुस गया। मैं आनन्द से निहाल हो उठी… दूसरे धक्के में आधा लन्ड अन्दर था… तीसरा धक्का लन्ड को पूरा जड़ तक ले गया…… गान्ड मैने कई बार चुदाई थी… इसलिये मुझे इसमें बहुत मजा आता है…उसका गान्ड में फ़ंसा हुआ मोटा सा लन्ड मुझे बहुत ही आनन्द दे रहा था। सोनू अब धीरे धीरे धक्के तेज़ करने लगा… उधर रवि और सुमन मेरे साथ ही आ गये… शायद रवि को मैं अधिक पसन्द आ रही थी… रवि ने मेरी चूंचियां पकड कर मचकानी चालू कर दी… सुमन ने भी अपनी कला दिखाने लगी… उसने अपनी दो उंगलियों को मेरी चूत में घुसा दी। मेरे मुख से आनन्द की हंसी और सिस्कारियां निकलने लगी। सोनू की धक्के मारने की गति तेज हो गयी थी… उसके मुख से आनन्द की सीत्कारें तेज हो उठी थी। मेरे चूतड अपने आप उछले जा रहे थे। मुझे ऐसे गान्ड मरवाने में बडा मजा आता था। सोनू के धक्के बढने लगे… उसका शरीर अकडने लगा।
अचानक सुमन ने मेरी चूत से दोनों उंगलियां निकाल दी और सोनू के दोनों चूतडों को कस कस के दबाने लगी। तभी सोनू के लन्ड ने मेरी गान्ड के अन्दर ही अपना वीर्य तेजी से छोड दिया। सुमन उसके चूतडों को दबाती ही रही जब तक कि उसका पूरा वीर्य नहीं छूट गया। तब रवि ने उसकी जगह ले ली। रवि बिस्तर पर लेट गया उसका खडा लन्ड मेरी चूत को आमन्त्रण दे रहा था … मैं रवि पर चढ गयी और उसके लन्ड को सीधे चूत पर टिका दिया… और फिर हौले से लन्ड पर दबा दिया…
"आऽऽऽऽऽऽह …… चुद गयी रे… चाची…"
"चुद जा… रीता…तेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार में ही तुझे दो दो लन्ड बिना कुछ किये ही मिल गये……चुद जा छिनाल अब…"
"चाची …… आई लव यू…… आप दिल की बात जानती हैं…आप बडी हरामी हैं…" मेरी बात सुन कर सुमन मुस्करा उठी…
"अब चुदने में मन लगा…रन्डी… मजा आयेगा…"
"हाय चाची …… चुद तो रही हू ना… देखो ना कैसे मोटे तगडे जवान लन्ड हैं…मेरी तो मां चोद देंगे ये…"
अब सोनू ने सुमन के उरोज पकड लिये… और लन्ड सुमन की गान्ड में घुसाने लगा… वह फिर से तैयार हो चुका था। सुमन हंस कर बोली-"देखा सोनू को … गान्ड मारने में माहिर है…… इसे सिर्फ़ गान्ड मारना ही अच्छा लगता है…"
मैं अब रवि पर लेट गयी थी… रवि नीचे से चुदाई का मजा ले रहा था। मैं उपर से उसे जबर्दस्त झटकों से चोद रही थी। मेरी गान्ड से सोनू का वीर्य निकल कर उसके लन्ड को तर कर रहा था।
"मेरे राजा… हाय…… क्या लन्ड है…मेरी चूत फ़ाड दे…राजा… " कहते हुये उसके खुले हुये मुख में मैने अपना मुख चिपका दिया… मेरे थूक से उसका चेहरा गीला हो गया था… पर मैं उसे चाटे जा रही थी। मुझे कुछ भी होश नही था। मेरा पूरा जोर उसके लन्ड पर था। फ़च फ़च की मधुर आवाजे माहोल को और सेक्सी बना रही थी। चूत के धक्कों से फ़च फ़च कि आवाज के साथ वीर्य के छीटें भी उछल रहे थे। उधर सोनू सुमन की गान्ड चोदने में लगा था।
अचानक रवि ने अन्गडाई ली … उसका लन्ड कडकने लगा…बेहद टाइट हो गया… उसका चेहरा लाल हो गया… दान्त भिंच गये……
' मै गया…… रानी…… निकला… हाऽऽऽऽय्…… गया…।"
मैने धक्कों की रफ़्तार बढा दी… अपनी चूत टाइट कर ली……… और मेरा भी निकलने को तैयार हो गया। मैने चूत टाइट कर के दो धक्के खींच के मारे …… तो उसकी और मेरी उत्तेजना चरम सीमा को पार कर गयी-"राजा …… मैं तो पूरी चुद गयी………गयी मैं तो…… निकला मेरा… हाऽऽऽऽय्…"
उधर रवि को झटके लगने चालू हो गये थे… उसका वीर्य झटके मार मार कर पिचकारी छोड रहा था। मैं भी झडने लगी थी…… हम दोनो ने एक दूसरे को कस कर पकड लिया। हमारा माल निकलता रहा…। अब हम पूरे झड चुके थे। हम ऐसे ही पडे सुस्ताते रहे…फिर में बिस्तर पर से उतर गयी।
सोनू भी झडने वाला था। उसका लन्ड सुमन की चूत चोद रहा था। मै और रवि ने तुरन्त उनकी मदद की… सुमन के चूचकों को मैने खींचना और मरोडना चालु कर दिया। रवि ने सोनू के चूतडों को जोर जोर से दबाने लगा… सुमन अचानक धीरे से चीख उठी… "रीतू… छोड मेरी चूंची को …… मैं गयी…… हाय… बस कर सोनू…"
पर सोनू तो चरम सीमा पर पहुन्च गया था… चूतडों के दबाते ही उसका लन्ड बरस पडा…… सारा वीर्य सुमन की चूत में भरने लगा। मैने सोनू के चूतडों को थपथपाया… और प्यार कर लिया…
रवि, मैं, सुमन वहीं बिस्तर पर लेट गये… और बातें करने लगे। मैं बोली-"चाची…… आज तो कस कर चुद गयी… थेन्क यू …चाची॥"
"मैने तुझे देख लिया था… फिर जब दूसरी बार आयी तो मैं समझ गयी …कि तू चुदना चाहती है…"
"चाऽऽऽची… जब मालूम था तो वहीं पकड कर क्यों नहीं चोद दिया…"
"नहीं रीतू रानी… बिना तडप के… चुदाई की कोई कीमत नही होती है…"
"नहीं चाची…… आप मुझे पकड के चुदवा देती… तो भी मुझे चुदना तो था ही ना॥"
"और अब चुदने में ज्यादा मजा आया ना…"
"आय… हाय चाची………मन शान्त हो गया… चूत की खुजली मिट गयी…"
सोनू और रवि बिस्तर के एक कोने में नन्गे पडे ही खर्राटे भर रहे थे… हम दोनो भी न जाने कब बातें करते करते सो गये
सिलसिला 18
सुनयना के ढेर होते ही उसके हाथों की पकड़ मेरे बालों पर से ढीली पड़ती चली गई. मैं उठा तो मैंने अपना पूरा मुँह उसके योनी-रस से लिथड़ा हुआ पाया.
मैंने बाथरूम जाकर अपना चेहरा साफ़ किया और वापिस आकर सुनयना के बाजू में लेट गया.
वो तो अभी भी अपने इस भीषण ओर्गास्म के गिरफ्त में थी और उसकी साँसे अब तक सामान्य नहीं हो पा रही थी.
मैं करवट लेकर अपना मुँह उसके कंधे में घुसाता हूं और एक हाथ उसके मम्मों पर रखकर अपना एक पैर मोड़ कर उसके पैरों के ऊपर रखता हूं.
जैसे ही मेरे बेईमान हाथ की शैतानी शुरू हुई, वो तुरंत करवट लेकर मुझ से लिपट गई और मुझे कस के जकड़ लिया.
मेरे होंठ उसके नंगे कंधे पर आ जाते हैं. मुलायम गद्देदार अंग का स्पर्श मेरे होंठों पर थरथराहट उत्पन्न कर देता है और मैं उन्हें चूमने का लोभ संवरण नहीं कर पाया.
उधर उसे भी कुछ मस्ती सूझी तो उसने अपने होंठ से मेरे कान की लटकन सड़प ली और फिर उस मृदु-अंग को मज़े ले लेकर चूसने लगी.
उसके शरीर की सुगंध मुझे बेहद खुशगवार लग रही थी. अपनी नाक को उसकी त्वचा पर घिस घिस कर उसे अपने नथुनों में समाने लगा.
इतनी खेली-खायी होने के बावजूद भी वो मुझे इतनी मासूम सी प्रतीत हो रही थी कि मैं उस पर फ़िदा होने लगा. मैं उसके पावन प्रेमाबंध में नख से शिख तक आबद्ध होने लगा था.
इस श्वेत-वर्णीय तरुणी पर मुझे दुनिया भर का प्यार उमड़ आया और उसी के वशीभूत मैंने उसकी काया को कस कर आबंधित कर लिया और उसके गालों पर चुम्मों की अनवरत झड़ी लगा दी.
उसने भी मेरी भावनाएं एकदम सही ट्यूनिंग से कैच कर ली और उसने भी मुझे अपने में लिपटा लिया और कस के चिपटने लगी.
हम दोनों ही एक दूसरे के और और नज़दीक पहुंचना चाह रहे थे परन्तु शरीर की सीमा-रेखा हमें एक जान नहीं होने दे रही थी.
पता नहीं एक-दूजे लोग कैसे समा जाते हैं, हम तो इस वक्त जरा भी सफल नहीं हो पा रहे थे.
अब मैंने फिर से अपना निशाना ताड़ा और अपना मुँह उसके निप्पल पर ले आया. उसे गुलाबजामुन की तरह पूरा गप्प किया और फिर पूरी शिद्दत से उसे चूसने लगा.
उसने कोई विरोध नहीं किया वरन वो पलट कर पीठ के बल हुई और मुझे अपने पर्वत शिखरों पर जी भर कर कुलाँचे भरने की पूरी आज़ादी प्रदान कर दी.
मैंने अपने आपको, अपने चोपायों पर संतुलित किया और उसके उभरे कोमलांगों में फिर से यहाँ वहाँ मुँह मारने लगा.
मेरे होंठ और जीभ की सरपट-सरपट गीली कार्यवाही, उसमे पुन: काम तरंगे प्रवाहित करने लगी.
उसके शरीर में डायनामिक फ़ोर्स उत्पन्न होने लगा जिसके चलते वो मस्ती से मचलने लगी. मज़े की अधिकता उसके मुँह से कराहों के माध्यम से अभिव्यक्त होने लगी.
वो इतनी मदमस्त हो गई कि उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करें. कभी मेरा मुँह अपनी छाती में दबाती कभी; अपनी दोनों टाँगे बिस्तर पर पटकती, तो कभी मुझे अपनी बाँहों में समेटने का असफल प्रयास करती.
इसी तारतम्य में अचानक उसके कर-कमल मेरे कटी-प्रदेश मध्य स्थित, अग्र-उर्ध्व दौलीत, मखमली चर्म-मंडित, अति-सख्त श्याम दंड पर पड़े, तो उसके अंग-प्रत्यंग में उत्साह और उमंग की सैकड़ों लहरें दौड़ गई.
वो मस्तानी अब मेरे दंड को बड़ी ही बेहयाई से मुठियाने लगी.
मैं अभी भी उसके पर्वत-द्वय की ख़ाक छान रहा था जबकि पर्वतमाला के सुदूर ढलान पर स्थित उसका महीनों से सूखा पड़ा पहाड़ी झरना आज ही आज में दूसरी बार पुन: तीव्र वेग से छलक उठा.
मेरी जालिम कार्यवाही से उसकी छाती पर जड़े दो श्याम-रत्नों पर उत्पन्न होने वाले कामुक संवेगों से वो इतनी उद्वेलित हो गई कि उसका दूसरा हाथ, खुद-ब-खुद उसके झर-झर फुरफुराते पहाड़ी नाले पर पहुँच गया.
उसकी उँगलियाँ उस तंग गीली गार में रिसती चिकनाई में मटकने लगी. ये उसका, इस अजब-गजब संवेदनों से भरे खेल में लगातार बढ़ती बैचेनी को काबू में लाने का असफल सा प्रयास था.
पर वो बावली क्या जाने कि अनजाने ही वो अपने अति-संवेदनशील अंग को कुरेद कुरेद कर उसकी खुजली को और बड़ा ही रही थी.
अब उसके दोनों कर-कमल, हस्त-मैथुन में लिप्त थे. एक हाथ मेरे दंड पर व्यस्त, तो दूजा स्वयं की फुद्दी में पैवस्त.
आखिर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती. अब तो उसकी शीरी को मेरे फरहाद से मिलना ही था.
और ये नेक कार्य भी उसके ही दोनों हाथों ने अंजाम दिया. वो अपने हाथ से मेरे बकरे को हलाल-गृह की ओर खींचने लगी.
मैंने भी अपने दोनों घुटने उसकी जांघों के बीच में फसायें और उनको चौड़ाते हुए अपने पिस्टन को इंजन के मुख पर झुकाता चला गया.
केस्ट्रोल की उत्तम चिकनाई युक्त स्निग्धता में मेरा पिस्टन इंजन में समाता चला गया और देखते ही देखते किसी कुशल डाइवर की भांति वो उस पूल में ओझल हो गया.
उसके हाथों ने जो जिम्मा लिया था वो पूरा हो गया था. मेरा पप्पू जन्नते-गार में मस्ती की डुबकियां लगाने लगा.
और अब शुरू हुआ वो खेल जिसके लिए सारी कायनात पागल है. मैं भी पूरा मगन होकर एक्स्बी-नेशन के इस राष्ट्रिय खेल को खेलने लगा.
खेल के शुरुवाती दौर में सारी सर्विस में ही कर रहा था. कभी मेरे धक्के दायर हो रहे थे, तो कभी कुछ मिस-फायर. लेकिन कुछ ही देर में हम दोनों खिलाडियों ने अपनी लय पकड़ ली.
नीचे जब सब कुछ स्मूथली हेंडल होने लगा तो, कुछ अतिरिक्त बोनस मज़े पाने और देने के लिए मैंने अपने होंठ सुनयना के होंठों में ठेल दिए. उसने उचक-निचक करते करते ही मेरे अधरों को बुरी तरह से जकड़ लिया.
अब तो उसकी निकलने वाली सारी कराहें और आंहे मुँह के बजाय नाक से निकलने लगी.
मैंने उसकी मस्ती में थोड़ा और तड़का लगाने के लिए अपनी कोहनियों को मोड़ कर उँगलियाँ उसकी छाती पर उभरे अंगूरों के इर्द-गिर्द कसी और लगा उन्हें मरोड़ने.
मेरा ऐसा करना हुआ और सामने वाला खिलाड़ी का खेल भी पूरे शवाब पर आने लगा.
मुझे अब वो एक भी ‘ऐस’ नहीं मारने दे रही थी और हर सर्विस पर जोरदार रिटर्न लगाने लगी.
अब लंबी लंबी रैली चलने लगी. दोनों ही पूरे जोशो-खरोश से शॉट पे शॉट लगाने लगे.
अभी कुछ देर पहले ही उसने पहला सेट लूज किया था तो इस सेट में वो कतई खेल को जल्दी खतम करना नहीं चाहती थी. पर उसे डर था कि मैं जल्दी ये सेट ना छोड़ दूं.
पर आप तो जानते ही हैं ना आपके अभि ब्रो को. वो जब तक चाहे, खेल में बना रह सकता है. लिहाजा अब मैं सर्विस करने में थोड़ी ढील देने लगा.
वो डर गई कि शायद मैं आ रहा हूं तो उसने मेरे होंठ उगले और बोली.....’अभि, मुझे तो जरा और देर लगेगी. कहीं तुम हो तो नहीं रहे हो ना.’
तो मैं बोला.......’बेबी, आज तुम पर किस्मत मेहरबान है तो मैं तुम्हारे साथ ना-इंसाफी करने वाला कौन होता हूं. तुम हुकुम तो करो, ये उचक-निचक अगले एक घंटे तक भी जारी रह सकती है.’
‘ओह माय जानू, यू आर सिम्पली सुपर्ब.’.........ये कहते हुए मारे खुशी के मुझसे कस के चिपट गई और नीचे से हौले हौले शॉट मारने लगी.
‘एनिथिंग फोर यू डार्लिंग. आज तो तुम जी भर के जी ही लो.’......ये कहते हुए मैंने फिर से अपने सारे मोर्चे मुस्तैदी से संभाल लिए. वोही.... चुम्बन ..... मर्दन.... और..... धमाधम.
कुछ देर यूँ ही लयबद्ध आवृति में दोनों ओर से बराबरी का खेल चलता रहा.
फिर जब दोनों को ही एक अल्प विराम की आवश्यकता महसूस हुई तो मैंने रूककर उससे कहा........ ‘सुनयना, तुम अब मेरे घोड़े की सवारी करना चाहोगी.’
वो बड़ी ही हैरानगी से देख कर बोली........ ‘ये घोड़ा कहाँ से बीच में आ गया हमारे.’
मैं हँसा और एक झटके में पलटी मारते हुए. बम्बू घुसाये हुए ही, उसको अपने ऊपर ले लिया.
उसके कन्धों को थामते हुए उससे कहा..........’ये रहा घुड़सवार और ये रहा घोड़ा.’
मैंने उसके हाथ मेरे आधे बाहर पप्पू पर टिकाते हुए घोड़े का मतलब समझाया और फिर बोला.......’तो चलो अब हो जाये घुड़सवारी.’.......ऐसा बोलकर मैं अपने पुट्ठों को ऊपर नीचे कर करके उसे उछालने लगा.
बात उसके पूरी समझ में आ गई थी. उसने मेरी छाती पर फिसलते हुए अपने हाथों से मेरे कन्धों को थामा और धचक-पेल शुरू कर दी.
वो घस्से तो लगा रही थी पर एकदम अनाड़ी की तरह. रिदम सेट ही नहीं हो पा रही थी.
ये देख कर मैंने अपने हाथों में उसके नितंब थामे और फिर नीचे से जोरदार घस्सों की बौछार कर दी. वो अचानक नीचे से होने वाले लगातार तेज़ आक्रमण से हकबका उठी.
उसके पेल्विस में मस्ती का जो तेज़ बवंडर उठा वो उससे सराबोर हो उठी. पता नहीं सैकड़ों घस्सों के बाद मैं थक कर रुक गया.
वो तो परन्तु तेज़ लहरों में बहे जा रही थी. मेरे रुकने पर वो फिर से अपना अनाड़ी खेल दिखने लगी.
मैं एकबार से फिर उसको साधारण भारतीय मुद्रा में ले आया........मतलब कि मिशनरी पोस्चर में. पप्पू को एकबारगी अच्छे से सेट किया और जड़ तक अंदर ठेल दिया.
कोहनियों को टिकाते हुए अपने दोनों निप्पल्स को उसके निप्पल्स से जोड़ दिया और हाथों में उसका चेहरा थामा और होंठों से होंठ मिला दिए. आल सेट .............एंड गो............
और चल पड़ी अपनी नाव.........धमाधम.... धमाधम.... धमाधम....
और उधर वो भी लगी थी मेरी हर ईंट का जवाब पत्थर से देने में. घस्सों का बहुत ही सुन्दर तारतम्य जम गया था. हम दोनों अनवरत सिन्क्रोनाईस्ड घस्सों में लीन हो गए.
उसके दोनों पैरों ने मेरे पैरों के इर्द-गिर्द कुंडली मारी हुई थी और दोनों हाथों से मेरी पीठ को जकडा हुआ था.
दोनों ही पसीने पसीने हो चुके थे.
मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे और उसके निप्पल्स एक दूसरे से चिपक गए हैं और उसकी नोंकों से तेज़ उर्जा मेरे अंदर भर रही है.
और यही उर्जा मेरे पप्पू से होते हुए पुन: उसमे प्रवाहित हो रही है.
ऊपर से आ रही है और नीचे से वापिस जा रही है.
इस तरह एनर्जी का एक सर्किल बन गया है और वो हम दोनों में रोटेट हो रही है.
घस्सों में तेज़ी आती जा रही थी और दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से जकड़े हुए थे.
मैंने उसके होंठ छोड़े और अपना चेहरा उसके सिर के पास तकिये में घुसा दिया.
और जैसे जैसे शीर्ष के करीब आने लगे ये उर्जा का चक्र तेज़ी से हम दोनों के शरीरों में घूमने लगा.
हम अब अपने भौतिक शरीर के अहसास से मुक्त होते जा रहे थे और ये उर्जा हम दोनों को एक दूसरे से और और नजदीकी से आबद्ध किये जा रही थी.
घस्सों का वेग अपने चरम पर था.......और अचानक उसके मुँह से एक चीख सुनाई दी और फिर वो पत्तों की तरह कांपने लगी.
यही वो वक्त था जब मेरे अंदर भी दो स्थानों पर विस्फोट हुए.
एक तो नीचे, जिसके परिणाम स्वरुप मेरे दंड की सख्ती अब पिघल कर सुनयना के प्रेम-छिद्र में समाने लगी थी.
और दूसरा मेरे मस्तिष्क में जिसके फलस्वरूप मेरा दिमाग शून्य हो गया.
.............
............
............
पता सब चल रहा था पर दिमाग बिलकुल रुक गया था. अवेयरनेस पूरी थी पर विचार सारे के सारे दम तोड़ चुके थे.
और ये क्या हुआ........मैं तो पूरा का पूरा मेल्ट होकर उसमे समा गया.
द्वेत मिट गया...... एक जान हो गए हम...... शरीर का कोई भी भान नहीं था इस वक्त............उर्जा-शरीर एक दूसरे में आकंठ डूबे हुए थे.
ये था सम्भोग के शिखर पर ट्रान्स का मेरा पहला अनुभव.
शायद भौतिक और मानसिक तल पर होने वाले सेक्स से एक कदम आगे बड़ा कर .............आत्मिक तल पर घटित होने वाले सम्भोग की एक विरल सी झलक.
जाने कितनी ही देर हम एक दूसरे में समाये रहे.
फिर थोड़ा सा खिसक कर मैंने नाईट बल्ब को ऑन कर दिया. मेरा पप्पू सिकुड़ कर उसकी गली से बाहर आ चुका था पर मैं वैसे ही लेटा रहा और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगा.
उसने आँख खोली........मेरी और देखा.............उसके होंठ कुछ कहने को लरजे.........फिर वे कंपकपाने लगे.........
कंठ अवरुद्ध हो गया............कुछ कहने का अथक प्रयास किया उसने पर सब व्यर्थ............अंदर की सारी भावनाएं आँखों से फूट पड़ी.
उसने अपनी हथेलियों से अपना चेहरा छुपाने का प्रयास किया पर मैंने उसके हाथ पकड़ लिए.
उसने अपना चेहरा मोड़ा तो उसका बाँध टूट पड़ा और उसकी भरभरा कर रुलाई फूट पड़ी.
मैंने उसका चेहरा अपनी ओर किया तो देखा कि वो एक मासूम बच्ची की तरह से रो रही थी.
मुझे उस पर इतना ज्यादा प्यार उमड़ आया कि मेरे भी आँसू निकलने को तत्पर हो गए.
पुरुषोचित इगो के वशीभूत हो मैंने अपनी भावनाएं दबाई और उसको अपने पहलु में लपेट लिया.
काफी देर तक उसका, पता नहीं क्या-क्या अंदर रुका हुआ, आंसुओं में धुल-धुल कर साफ़ होता रहा.
मैं उसे लिपटाये हुए ही करवट से हो गया और अपने हाथ से उसकी पीठ सहलाते रहा.
वो चुप हुई तो हम दोनों उठ कर बैठ गए. एक बार फिर मैंने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में भरा.
उसका अश्रुपूरित चेहरा............उसने मुझसे नज़र मिलाई.........
मैंने अपने होंठों को उसकी पलकों से लगा कर उसकी अमूल्य अश्रु की बूंदों को अंगीकार किया.
उसने फिर से मुझसे नज़रें मिलाई और फिर एक मनमोहक मुस्कान के साथ पलकें झुका ली.
उसके पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं बचा था.
मैंने बाथरूम जाकर अपना चेहरा साफ़ किया और वापिस आकर सुनयना के बाजू में लेट गया.
वो तो अभी भी अपने इस भीषण ओर्गास्म के गिरफ्त में थी और उसकी साँसे अब तक सामान्य नहीं हो पा रही थी.
मैं करवट लेकर अपना मुँह उसके कंधे में घुसाता हूं और एक हाथ उसके मम्मों पर रखकर अपना एक पैर मोड़ कर उसके पैरों के ऊपर रखता हूं.
जैसे ही मेरे बेईमान हाथ की शैतानी शुरू हुई, वो तुरंत करवट लेकर मुझ से लिपट गई और मुझे कस के जकड़ लिया.
मेरे होंठ उसके नंगे कंधे पर आ जाते हैं. मुलायम गद्देदार अंग का स्पर्श मेरे होंठों पर थरथराहट उत्पन्न कर देता है और मैं उन्हें चूमने का लोभ संवरण नहीं कर पाया.
उधर उसे भी कुछ मस्ती सूझी तो उसने अपने होंठ से मेरे कान की लटकन सड़प ली और फिर उस मृदु-अंग को मज़े ले लेकर चूसने लगी.
उसके शरीर की सुगंध मुझे बेहद खुशगवार लग रही थी. अपनी नाक को उसकी त्वचा पर घिस घिस कर उसे अपने नथुनों में समाने लगा.
इतनी खेली-खायी होने के बावजूद भी वो मुझे इतनी मासूम सी प्रतीत हो रही थी कि मैं उस पर फ़िदा होने लगा. मैं उसके पावन प्रेमाबंध में नख से शिख तक आबद्ध होने लगा था.
इस श्वेत-वर्णीय तरुणी पर मुझे दुनिया भर का प्यार उमड़ आया और उसी के वशीभूत मैंने उसकी काया को कस कर आबंधित कर लिया और उसके गालों पर चुम्मों की अनवरत झड़ी लगा दी.
उसने भी मेरी भावनाएं एकदम सही ट्यूनिंग से कैच कर ली और उसने भी मुझे अपने में लिपटा लिया और कस के चिपटने लगी.
हम दोनों ही एक दूसरे के और और नज़दीक पहुंचना चाह रहे थे परन्तु शरीर की सीमा-रेखा हमें एक जान नहीं होने दे रही थी.
पता नहीं एक-दूजे लोग कैसे समा जाते हैं, हम तो इस वक्त जरा भी सफल नहीं हो पा रहे थे.
अब मैंने फिर से अपना निशाना ताड़ा और अपना मुँह उसके निप्पल पर ले आया. उसे गुलाबजामुन की तरह पूरा गप्प किया और फिर पूरी शिद्दत से उसे चूसने लगा.
उसने कोई विरोध नहीं किया वरन वो पलट कर पीठ के बल हुई और मुझे अपने पर्वत शिखरों पर जी भर कर कुलाँचे भरने की पूरी आज़ादी प्रदान कर दी.
मैंने अपने आपको, अपने चोपायों पर संतुलित किया और उसके उभरे कोमलांगों में फिर से यहाँ वहाँ मुँह मारने लगा.
मेरे होंठ और जीभ की सरपट-सरपट गीली कार्यवाही, उसमे पुन: काम तरंगे प्रवाहित करने लगी.
उसके शरीर में डायनामिक फ़ोर्स उत्पन्न होने लगा जिसके चलते वो मस्ती से मचलने लगी. मज़े की अधिकता उसके मुँह से कराहों के माध्यम से अभिव्यक्त होने लगी.
वो इतनी मदमस्त हो गई कि उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करें. कभी मेरा मुँह अपनी छाती में दबाती कभी; अपनी दोनों टाँगे बिस्तर पर पटकती, तो कभी मुझे अपनी बाँहों में समेटने का असफल प्रयास करती.
इसी तारतम्य में अचानक उसके कर-कमल मेरे कटी-प्रदेश मध्य स्थित, अग्र-उर्ध्व दौलीत, मखमली चर्म-मंडित, अति-सख्त श्याम दंड पर पड़े, तो उसके अंग-प्रत्यंग में उत्साह और उमंग की सैकड़ों लहरें दौड़ गई.
वो मस्तानी अब मेरे दंड को बड़ी ही बेहयाई से मुठियाने लगी.
मैं अभी भी उसके पर्वत-द्वय की ख़ाक छान रहा था जबकि पर्वतमाला के सुदूर ढलान पर स्थित उसका महीनों से सूखा पड़ा पहाड़ी झरना आज ही आज में दूसरी बार पुन: तीव्र वेग से छलक उठा.
मेरी जालिम कार्यवाही से उसकी छाती पर जड़े दो श्याम-रत्नों पर उत्पन्न होने वाले कामुक संवेगों से वो इतनी उद्वेलित हो गई कि उसका दूसरा हाथ, खुद-ब-खुद उसके झर-झर फुरफुराते पहाड़ी नाले पर पहुँच गया.
उसकी उँगलियाँ उस तंग गीली गार में रिसती चिकनाई में मटकने लगी. ये उसका, इस अजब-गजब संवेदनों से भरे खेल में लगातार बढ़ती बैचेनी को काबू में लाने का असफल सा प्रयास था.
पर वो बावली क्या जाने कि अनजाने ही वो अपने अति-संवेदनशील अंग को कुरेद कुरेद कर उसकी खुजली को और बड़ा ही रही थी.
अब उसके दोनों कर-कमल, हस्त-मैथुन में लिप्त थे. एक हाथ मेरे दंड पर व्यस्त, तो दूजा स्वयं की फुद्दी में पैवस्त.
आखिर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती. अब तो उसकी शीरी को मेरे फरहाद से मिलना ही था.
और ये नेक कार्य भी उसके ही दोनों हाथों ने अंजाम दिया. वो अपने हाथ से मेरे बकरे को हलाल-गृह की ओर खींचने लगी.
मैंने भी अपने दोनों घुटने उसकी जांघों के बीच में फसायें और उनको चौड़ाते हुए अपने पिस्टन को इंजन के मुख पर झुकाता चला गया.
केस्ट्रोल की उत्तम चिकनाई युक्त स्निग्धता में मेरा पिस्टन इंजन में समाता चला गया और देखते ही देखते किसी कुशल डाइवर की भांति वो उस पूल में ओझल हो गया.
उसके हाथों ने जो जिम्मा लिया था वो पूरा हो गया था. मेरा पप्पू जन्नते-गार में मस्ती की डुबकियां लगाने लगा.
और अब शुरू हुआ वो खेल जिसके लिए सारी कायनात पागल है. मैं भी पूरा मगन होकर एक्स्बी-नेशन के इस राष्ट्रिय खेल को खेलने लगा.
खेल के शुरुवाती दौर में सारी सर्विस में ही कर रहा था. कभी मेरे धक्के दायर हो रहे थे, तो कभी कुछ मिस-फायर. लेकिन कुछ ही देर में हम दोनों खिलाडियों ने अपनी लय पकड़ ली.
नीचे जब सब कुछ स्मूथली हेंडल होने लगा तो, कुछ अतिरिक्त बोनस मज़े पाने और देने के लिए मैंने अपने होंठ सुनयना के होंठों में ठेल दिए. उसने उचक-निचक करते करते ही मेरे अधरों को बुरी तरह से जकड़ लिया.
अब तो उसकी निकलने वाली सारी कराहें और आंहे मुँह के बजाय नाक से निकलने लगी.
मैंने उसकी मस्ती में थोड़ा और तड़का लगाने के लिए अपनी कोहनियों को मोड़ कर उँगलियाँ उसकी छाती पर उभरे अंगूरों के इर्द-गिर्द कसी और लगा उन्हें मरोड़ने.
मेरा ऐसा करना हुआ और सामने वाला खिलाड़ी का खेल भी पूरे शवाब पर आने लगा.
मुझे अब वो एक भी ‘ऐस’ नहीं मारने दे रही थी और हर सर्विस पर जोरदार रिटर्न लगाने लगी.
अब लंबी लंबी रैली चलने लगी. दोनों ही पूरे जोशो-खरोश से शॉट पे शॉट लगाने लगे.
अभी कुछ देर पहले ही उसने पहला सेट लूज किया था तो इस सेट में वो कतई खेल को जल्दी खतम करना नहीं चाहती थी. पर उसे डर था कि मैं जल्दी ये सेट ना छोड़ दूं.
पर आप तो जानते ही हैं ना आपके अभि ब्रो को. वो जब तक चाहे, खेल में बना रह सकता है. लिहाजा अब मैं सर्विस करने में थोड़ी ढील देने लगा.
वो डर गई कि शायद मैं आ रहा हूं तो उसने मेरे होंठ उगले और बोली.....’अभि, मुझे तो जरा और देर लगेगी. कहीं तुम हो तो नहीं रहे हो ना.’
तो मैं बोला.......’बेबी, आज तुम पर किस्मत मेहरबान है तो मैं तुम्हारे साथ ना-इंसाफी करने वाला कौन होता हूं. तुम हुकुम तो करो, ये उचक-निचक अगले एक घंटे तक भी जारी रह सकती है.’
‘ओह माय जानू, यू आर सिम्पली सुपर्ब.’.........ये कहते हुए मारे खुशी के मुझसे कस के चिपट गई और नीचे से हौले हौले शॉट मारने लगी.
‘एनिथिंग फोर यू डार्लिंग. आज तो तुम जी भर के जी ही लो.’......ये कहते हुए मैंने फिर से अपने सारे मोर्चे मुस्तैदी से संभाल लिए. वोही.... चुम्बन ..... मर्दन.... और..... धमाधम.
कुछ देर यूँ ही लयबद्ध आवृति में दोनों ओर से बराबरी का खेल चलता रहा.
फिर जब दोनों को ही एक अल्प विराम की आवश्यकता महसूस हुई तो मैंने रूककर उससे कहा........ ‘सुनयना, तुम अब मेरे घोड़े की सवारी करना चाहोगी.’
वो बड़ी ही हैरानगी से देख कर बोली........ ‘ये घोड़ा कहाँ से बीच में आ गया हमारे.’
मैं हँसा और एक झटके में पलटी मारते हुए. बम्बू घुसाये हुए ही, उसको अपने ऊपर ले लिया.
उसके कन्धों को थामते हुए उससे कहा..........’ये रहा घुड़सवार और ये रहा घोड़ा.’
मैंने उसके हाथ मेरे आधे बाहर पप्पू पर टिकाते हुए घोड़े का मतलब समझाया और फिर बोला.......’तो चलो अब हो जाये घुड़सवारी.’.......ऐसा बोलकर मैं अपने पुट्ठों को ऊपर नीचे कर करके उसे उछालने लगा.
बात उसके पूरी समझ में आ गई थी. उसने मेरी छाती पर फिसलते हुए अपने हाथों से मेरे कन्धों को थामा और धचक-पेल शुरू कर दी.
वो घस्से तो लगा रही थी पर एकदम अनाड़ी की तरह. रिदम सेट ही नहीं हो पा रही थी.
ये देख कर मैंने अपने हाथों में उसके नितंब थामे और फिर नीचे से जोरदार घस्सों की बौछार कर दी. वो अचानक नीचे से होने वाले लगातार तेज़ आक्रमण से हकबका उठी.
उसके पेल्विस में मस्ती का जो तेज़ बवंडर उठा वो उससे सराबोर हो उठी. पता नहीं सैकड़ों घस्सों के बाद मैं थक कर रुक गया.
वो तो परन्तु तेज़ लहरों में बहे जा रही थी. मेरे रुकने पर वो फिर से अपना अनाड़ी खेल दिखने लगी.
मैं एकबार से फिर उसको साधारण भारतीय मुद्रा में ले आया........मतलब कि मिशनरी पोस्चर में. पप्पू को एकबारगी अच्छे से सेट किया और जड़ तक अंदर ठेल दिया.
कोहनियों को टिकाते हुए अपने दोनों निप्पल्स को उसके निप्पल्स से जोड़ दिया और हाथों में उसका चेहरा थामा और होंठों से होंठ मिला दिए. आल सेट .............एंड गो............
और चल पड़ी अपनी नाव.........धमाधम.... धमाधम.... धमाधम....
और उधर वो भी लगी थी मेरी हर ईंट का जवाब पत्थर से देने में. घस्सों का बहुत ही सुन्दर तारतम्य जम गया था. हम दोनों अनवरत सिन्क्रोनाईस्ड घस्सों में लीन हो गए.
उसके दोनों पैरों ने मेरे पैरों के इर्द-गिर्द कुंडली मारी हुई थी और दोनों हाथों से मेरी पीठ को जकडा हुआ था.
दोनों ही पसीने पसीने हो चुके थे.
मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे और उसके निप्पल्स एक दूसरे से चिपक गए हैं और उसकी नोंकों से तेज़ उर्जा मेरे अंदर भर रही है.
और यही उर्जा मेरे पप्पू से होते हुए पुन: उसमे प्रवाहित हो रही है.
ऊपर से आ रही है और नीचे से वापिस जा रही है.
इस तरह एनर्जी का एक सर्किल बन गया है और वो हम दोनों में रोटेट हो रही है.
घस्सों में तेज़ी आती जा रही थी और दोनों एक दूसरे को बुरी तरह से जकड़े हुए थे.
मैंने उसके होंठ छोड़े और अपना चेहरा उसके सिर के पास तकिये में घुसा दिया.
और जैसे जैसे शीर्ष के करीब आने लगे ये उर्जा का चक्र तेज़ी से हम दोनों के शरीरों में घूमने लगा.
हम अब अपने भौतिक शरीर के अहसास से मुक्त होते जा रहे थे और ये उर्जा हम दोनों को एक दूसरे से और और नजदीकी से आबद्ध किये जा रही थी.
घस्सों का वेग अपने चरम पर था.......और अचानक उसके मुँह से एक चीख सुनाई दी और फिर वो पत्तों की तरह कांपने लगी.
यही वो वक्त था जब मेरे अंदर भी दो स्थानों पर विस्फोट हुए.
एक तो नीचे, जिसके परिणाम स्वरुप मेरे दंड की सख्ती अब पिघल कर सुनयना के प्रेम-छिद्र में समाने लगी थी.
और दूसरा मेरे मस्तिष्क में जिसके फलस्वरूप मेरा दिमाग शून्य हो गया.
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पता सब चल रहा था पर दिमाग बिलकुल रुक गया था. अवेयरनेस पूरी थी पर विचार सारे के सारे दम तोड़ चुके थे.
और ये क्या हुआ........मैं तो पूरा का पूरा मेल्ट होकर उसमे समा गया.
द्वेत मिट गया...... एक जान हो गए हम...... शरीर का कोई भी भान नहीं था इस वक्त............उर्जा-शरीर एक दूसरे में आकंठ डूबे हुए थे.
ये था सम्भोग के शिखर पर ट्रान्स का मेरा पहला अनुभव.
शायद भौतिक और मानसिक तल पर होने वाले सेक्स से एक कदम आगे बड़ा कर .............आत्मिक तल पर घटित होने वाले सम्भोग की एक विरल सी झलक.
जाने कितनी ही देर हम एक दूसरे में समाये रहे.
फिर थोड़ा सा खिसक कर मैंने नाईट बल्ब को ऑन कर दिया. मेरा पप्पू सिकुड़ कर उसकी गली से बाहर आ चुका था पर मैं वैसे ही लेटा रहा और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर सहलाने लगा.
उसने आँख खोली........मेरी और देखा.............उसके होंठ कुछ कहने को लरजे.........फिर वे कंपकपाने लगे.........
कंठ अवरुद्ध हो गया............कुछ कहने का अथक प्रयास किया उसने पर सब व्यर्थ............अंदर की सारी भावनाएं आँखों से फूट पड़ी.
उसने अपनी हथेलियों से अपना चेहरा छुपाने का प्रयास किया पर मैंने उसके हाथ पकड़ लिए.
उसने अपना चेहरा मोड़ा तो उसका बाँध टूट पड़ा और उसकी भरभरा कर रुलाई फूट पड़ी.
मैंने उसका चेहरा अपनी ओर किया तो देखा कि वो एक मासूम बच्ची की तरह से रो रही थी.
मुझे उस पर इतना ज्यादा प्यार उमड़ आया कि मेरे भी आँसू निकलने को तत्पर हो गए.
पुरुषोचित इगो के वशीभूत हो मैंने अपनी भावनाएं दबाई और उसको अपने पहलु में लपेट लिया.
काफी देर तक उसका, पता नहीं क्या-क्या अंदर रुका हुआ, आंसुओं में धुल-धुल कर साफ़ होता रहा.
मैं उसे लिपटाये हुए ही करवट से हो गया और अपने हाथ से उसकी पीठ सहलाते रहा.
वो चुप हुई तो हम दोनों उठ कर बैठ गए. एक बार फिर मैंने उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में भरा.
उसका अश्रुपूरित चेहरा............उसने मुझसे नज़र मिलाई.........
मैंने अपने होंठों को उसकी पलकों से लगा कर उसकी अमूल्य अश्रु की बूंदों को अंगीकार किया.
उसने फिर से मुझसे नज़रें मिलाई और फिर एक मनमोहक मुस्कान के साथ पलकें झुका ली.
उसके पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं बचा था.
सिलसिला 17
दिन के १० बज चुके थे. मैं नाश्ते के लिए उसी रेस्तरां ‘अल-नखील’ में गया जो सपने में देखा था.
बहुत वेक्यूम सा लग रहा था. एक साथ इतनी सारी हीरोइन तो हाथ से निकली ही निकली वो डायमंड भी हाथ से गए.
और हाँ, वो आक्शन गर्ल, उसे तो सपने में भी निपटा नहीं पाया.
मैंने अपने आप से प्रश्न किया. कल रात ज़रीन के साथ गुज़ारा समय और रात सपने में उड़ाए गुलछर्रे, दोनों में क्या फर्क है.
दोनों ही डेड हो चुके हैं और दोनों ही स्मृति का हिस्सा भर हैं. दोनों की याद बराबर गुदगुदा रही है.
बल्कि सपने वाली ज्यादा गुदगुदा रही है...... याने कि कोई फर्क नहीं......
गुज़रा समय भी सपने की ही मानिंद हो जाता है....... दोनों का ही कोई अस्तित्व नहीं अब .......
इसीलिए जो जानते है वो कहते है कि पास्ट से कोई अटेचमेंट ना रखते हुए सिर्फ और सिर्फ इस पल में जीना चाहिए. खैर..............
आज का दिन पूरा फ्री है.......कोई साथी भी नहीं.......क्यों ना नए क्लाइंट से बात की जाय, हो सकता है वो कोई जुगाड कर दे आज का.
मैं फोन लगाता हूं. सामान्य शिष्टाचार के बाद मैं मुद्दे की बात पर आता हूं.
वो मुझे अच्छी एस्कार्ट सर्विस से कोई बढ़िया लड़की उपलब्ध कराने की बात करता है.
मैं प्रोफेशनल लड़की के लिए मना करता हूं तो वो बोलता है कि आप इंतज़ार करो, आधे घंटे में आपको नान-प्रोफेशनल लड़की हाज़िर जो जायेगी.
***
रूम की बेल बजती है. दरवाजा खोला तो एक सुन्दर लड़की सलवार कुर्ते में नज़र आती है.
अपना परिचय वो सुनयना कह कर देती है. उसे अंदर सोफे पर बैठा कर उसके सामने बैठ जाता हूं.
‘आप हमारी कंपनी से नाता जोड़ रहे हैं इसकी हमें बहुत खुशी है. मैं एम.डी. सर की सेक्रेटरी हूं और उन्होंने मुझे आपको कंपनी देने के लिए भेजा है.’........सुनयना ने पूरा परिचय दिया.
‘थेंक यू सुनयना, बट ऐसा लगता है कि आप मजबूरी फील कर रही हैं यहाँ आने की’.....मैंने उसका चेहरा पढ़ते हुए कहा.
‘नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है, आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी, आप निश्चिन्त रहिये.’
‘नहीं सुनयना, मैं आपकी इच्छा के खिलाफ कुछ भी नहीं करूँगा. चलिए आप मुझे दुबई घुमाइये.’
‘नहीं सर, आप विश्वास कीजिये मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, आप आदेश कीजिये.’
‘सच कह रही हो.............. चलो तुरंत अपने सारे कपड़े निकालो.’....मैंने उसकी आँखों में आँखे डाल कर कहा.
उसने अपनी निगाहें झुका ली. वो कुछ एकदम जड़ हो गई.
मैं उसके पास जाता हूं और उसके दोनों कंधे पकड़ता हूं. वो निगाहें ऊपर करती है.
उसकी आँखों में पानी आ जाता है. मैं आँखों से उसे निश्चिन्त रहने का इशारा करता हूं.
‘आप कहीं एम.डी. सर से बोल तो नहीं देंगे, वरना वो नाराज़ हो जायेंगे.’......उसने पूछा.
‘सुनयना, तुम बिलकुल भी डरो मत, मैं तुम्हारी बहुत तारीफ़ करूँगा उनसे.’
‘थेंक यू सर.’
‘इट्स आल राईट सुनयना. पर ये बताओ कि जो मैं पूछूँगा उसका सही सही जवाब दोगी.’
‘जी आप कुछ भी पूछिये.’
‘मैं समझता हूं कि तुम कई बार सेक्स कर चुकी हो, तो फिर सेक्स से घबरा क्यों रही हो.’....मैं पूछता हूं.
‘हाँ सर, मुझे रेगुलर सेक्स करना पड़ता है, पर किससे करना है ये चुनाव मेरे हाथ में नहीं होता है. या तो सर का बिस्तर गरम करना होता है या उनके मेहमान का, ऐसे भी कहीं सेक्स का मज़ा आ पाता है.’...वो बोली.
‘तो इसका मतलब तुम्हे सिर्फ और सिर्फ दूसरे को ही खुश करना होता है, शायद सामने वाला तुम्हारी फीलिंग्स का कोई ख्याल नहीं करता होगा. है ना ‘......मैंने फिर पूछा.
इस बार वो कुछ बोल नहीं पाई और सिर्फ सिर हिलाकर हाँ मैं जवाब दिया और फिर अपनी हथेलियों से अपना चेहरा ढँक लिया. जब हाथ हटाया तो उसके चेहरे से बड़ी बेचारगी झलक रही थी.
मैं उठकर फिर सामने बैठ जाता हूं. कुछ देर सिर्फ उसे देखता रहता हूं. वो कभी नीचे देखती तो कभी मुझे.
मैं उठकर कॉफी का आर्डर देता हूं. कुछ देर मैं चुप रहता हूं.
वो बाथरूम चली जाती है. जब वो वापिस बाहर आती है तब तक कॉफी आ चुकी होती है.
वो तुरंत कॉफी तैयार करती है. हम दोनों कॉफी पीने लगते हैं. मैं जब उसपर से नज़रें नहीं हटाता हूं तो उसे हलकी सी हंसी आ जाती है.
‘ऐसे क्यों देख रहे हैं आप मुझे. मेरी नादानी पर हंसी आ रही है ना आपको.’.......वो काफी संयत हो चुकी थी.
‘नहीं ऐसी बात नहीं है.........बस आज तक तुम्हारी जैसी लड़की नहीं मिली मुझे इसलिए तुम्हे जी भर के देख रहा हूं.’ ......... मैं जवाब देता हूं.
‘आप जैसा भी मैंने कोई नहीं देखा है. आप बहुत अच्छे हैं.’........वो निगाहें झुकाती हुई बोली.
‘चलो आगे पूछता हूं. तुम्हारे एम.डी. बिस्तर में कैसे पेश आते हैं तुम्हारे साथ.’
‘वो सिर्फ अपना ही ख्याल करते हैं. मुझे तो बस वो खिलौना समझ कर खेलते हैं.’
‘और बाकि उनके मेहमान.’
‘वो तो मुझे बाजारू समझ कर बर्ताव भी बुरा करते हैं. सब कुछ सहन करना पड़ता है.’
‘तो फिर ऐसी नौकरी क्यों कर रही हो.’
‘एम.डी. सर बहुत दयालु इंसान है. उन्होंने मेरे परिवार के लिए मुंबई में घर खरीद कर दिया है. और भी बहुत
अहसान है तो बस वो ही चुका रही हूं.’
‘तो क्या तुम्हे ओर्गास्म नहीं होता है जब भी ऐसे सेक्स करती हो.’
‘सच बताऊँ, मजबूरी में कभी भी ओर्गास्म नहीं होता है.’
‘और अगर वो बहुत लंबा चले तब भी नहीं, कभी तो तुम्हारी छूट होती होगी.’.....मेरे प्रश्न जारी थे.
‘शुरू से ही नेगेटिव माइंड-सेट हो जाता है, तो हालाँकि दोनों पैर तो खुल जाते हैं मजबूरी में पर मन नहीं खुल पता है.
बस यही कारण है कि ओर्गास्म नहीं हो पता है. पहले कभी होता था पर आजकल तो बिलकुल नहीं.’......वो बताती है.
‘इसका मतलब तुम सेक्स से विरक्त होती जा रही हो. ये तो अच्छी बात नहीं है.........अभी तो तुम्हारी शादी भी होनी है........ऐसे कैसे चलेगी लाइफ.’
‘अब जैसे भी चले काटनी तो पड़ेगी ही.’
‘अच्छा ये बताओ तुम्हे क्या याद आता है, कब तुमने आखिर बार सेक्स को एन्जॉय किया था.’
‘साल भर से तो ऊपर ही हो गए होंगे.’
‘तुम्हारा मन नहीं करता है.’
‘सच बताऊँ, बहुत करता है.......कभी कभी तो मुझे अपने आप को शांत करना पड़ जाता है.’
‘तो तुम क्या सोचती हो कि किस परिस्थिति में तुम सेक्स का भरपूर मज़ा ले सकती हो.’...मैं इस तरह की लड़की की मानसिकता जानना चाह रहा था.
वो थोड़ा सकुचाती है. परन्तु फिर बताने लगती है.........
‘मुझे कोई बहुत प्यार करे और मैं बिलकुल डूब जाऊं उसमे तो फिर उसके साथ जो सेक्स होगा वो बहुत आनंददायक होगा. पर ये सिर्फ मेरी सोच है, शायद यथार्थ में ऐसा संभव नहीं है.’
मैं उसकी आँखों में फिर से झाँकने लगता हूं.
कुछ ही देर में उसकी निगाहें फिर से झुक जाती है. वो जब फिर नज़रें उठती है तो मुझे अपने में डूबा पाती है.
‘आप फिर ऐसे क्यों देखने लगे मुझे.’
______________________________
‘इसलिए कि तुम जैसी कोई दिखी नहीं मुझे कभी.’.......और उसकी आँखों में झांकते झांकते उसकी ओर बढता हूं.
और फिर उसके पैर के पास बैठ कर उसकी गोद में अपने हाथ रख देता हूं.
नज़रें अभी भी उनकी आँखों में ही थी. अब वो भी अपलक मुझे ही देख रही थी.
अचानक वो अपने हाथ मेरी आँखों पर रख देती है. मेरी आँखे बंद हो जाती है.
अब मैं अपना सर उसकी गोद में रख कर उसके पैरों को बड़े ही प्यार से पकड़ लेता हूं.
उसके हाथ स्वमेव ही मेरे सर पर आ जाते हैं.
कुछ देर हम इसी अवस्था में रहते हैं.
फिर पता नहीं उसे क्या होता है वो अपने हाथों से मेरे बालों को हौले से सहलाने लगती है.
मुझे बहुत अच्छा फील होता है. मैं उसकी गोद को और कस के पकड़ लेता हूं. वो काफी देर तक मेरा सर सहलाती रहती है.
दस मिनट ऐसे ही निकल जाते हैं.
अचानक वो बोलती है........’क्या मैं आपको सर के बजाय आपके नाम से बुला सकती हूं.’
मैं अचानक चौंक कर उठता हूं ......’ऑफ कोर्स, माय प्लेज़र.’
‘अभि आप बहुत अच्छे हो. आप सबसे अलग लगे मुझे.’....अब उसके बाल सहलाते हाथ मेरे चेहरे की ओर बढ़ चले.
मैं मुस्कुरा देता हूं. वो हथेली में मेरा चेहरा थाम लेती है.
मैं उठ कर उसके बराबर सोफे पर बैठ जाता हूं. उसके हाथ अभी भी मेरा चेहरा बड़े ही प्यार से थामे हुए थे.
मैं भी अपनी हथेलियों में उसका चेहरा भर लेता हूं. वो अब बड़े प्यार से मुझे देखने लगती है.
तभी मैं बोलता हूं.........’सुनयना अगर बुरा ना मानो तो मैं तुमको हग कर सकता हूं एक बार.’
इस बात का जवाब देने के बजाय वो मेरा चेहरा छोडती है और मेरे सीने पर झुकते हुए उसमे एकदम से सिमट जाती है.
मेरे हाथ अपने आप उसके इर्द गिर्द लिपट जाते हैं. मैं उसको अपने सीने में छुपा लेता हूं.
अपने एक हाथ से उसकी पीठ सहलाने लगता हूं और दूसरे से उसके बाल. पता नहीं कितनी देर हम ऐसे ही रहते है.
जब मैं उसे उठा कर अलग करता हूं तो वो मेरे आगोश से निकलने के लिए मना कर देती है.
‘‘यार इस तरह से मेरी कमर दुखने लगी है.’.....मैं उसे कहता हूं.
वो जवाब देने के बजाय अपने वजन से मुझे पीछे सोफे पर धकेलने लगती हैं.
मैं पीठ के बल धीरे से पीछे ढुलक जाता हूं और साथ साथ वो भी मेरे ऊपर आ जाती है. अभी भी उसका चेहरा मेरे सीने में पैवस्त था.
अब मैं लेटे लेटे ही उसे फिर से लपेट लेता हूं. फिर इसी तरह कुछ देर और हम पड़े रहते हैं.
फिर मैं उसे थोड़ा ऊपर खींचता हूं. वो अपना गला मेरे कंधे में घुसा देती है. अब वो ठीक मेरे ऊपर आ जाती है, उसके वक्ष मेरे सीने पर महसूस होने लगते हैं.
मैं उत्तेजना से भर उठता हूं. मेरा पप्पू कड़क हो जाता है.
अब वो अपना सर उठाती है और अपने गाल मेरे गालों पर रख देती है. कुछ देर तक वो गाल से गाल सहलाती रहती है.
अचानक वो मेरा मुँह पकडती है और अपना सिर उठाकर मेरे होंठों में अपने होंठ डाल देती है और उन्हें बेतहाशा चूमने लगती है.
जिस तरह से वो चूम रही थी ऐसा लग रहा था कि पहली बार वो ऐसा कर रही है. बहुत ही पेशोनेट हो जाती है वो.
कोई दस मिनट बाद वो रूकती है और मेरी आँखों में देखती है. फिर वो अपनी नज़रें झुका कर मुस्कुराती है और फिर से मेरे सीने में गुम हो जाती है.
मैं उसे जकड़े हुए धीरे से बैठ जाता हूं और फिर उसे गोद में उठा कर बेड रूम की ओर बढता हूं. वो अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लेटी है.
जैसे ही उसे बेड पर रखता हूं वो शर्मा कर बिस्तर में मुँह छुपा लेटी है और बस इतना ही कह पाती है कि .........’प्लीज़ लाईट बंद कर दो.’
मैं एकदम अँधेरा कर देता हूं. फिर धीरे से उसके पास आकर लेट जाता हूं. वो मेरी ओर करवट लेटी है और फिर से मुझसे चिपक जाती है. मैं भी उसे फिर जकड़ लेता हूं.
वो खींच कर मुझे अपने ऊपर करने लगती है. मैं अपने दोनों हाथ और पैरों पर वजन लेटे हुए उसके ऊपर आ जाता हूं.
वो अपने दोनों पैर चौड़े करके मुझे अपने अंदर ले लेती है. मेरा पप्पू उसके क्रोच पर टिक जाता है.
वो अपने हाथों से मेरा चेहरा खींच कर फिर चूमने लगती है.
उसके हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगते हैं.
अचानक उसके हाथ मेरे लोअर को नीचे खिसकाने लगते हैं. कुछ ही देर मैं वो मेरा लोअर और अंडरवियर निकालने में कामयाब हो जाती है. अभी भी चुम्बन जारी था.
अब उसके हाथ मेरे पुट्ठों को सहलाने लगते हैं.
अचानक मैं घूमता हूं और उसको अपने ऊपर ले लेता हूं. उसके कुर्ते को पकड़ कर ऊपर खींचने लगता हूं. वो भी थोड़ा उठ कर निकालने में मदद करती है. वो फिर मुझसे चिपक जाती है.
अब मैं उसकी ब्रा के हुक खोलता हूं और उसके स्ट्रेप कन्धों से नीचे सरका देता हूं. वो खुद ब्रा को अपने वक्ष से खींच कर अलग कर देती है.
फिर वो उठ कर मेरे पेट पर बैठ जाती है और अपने सलवार का नाडा खोलती है. मैं भी अपना टीशर्ट और बनियान निकाल देता हूं.
वो खड़ी होकर अपनी सलवार और पेंटी निकाल देती है और फिर से मेरे ऊपर आकार लेट जाती है.
उसके बब्बू मेरे सीने में चुभने लगते हैं वहीँ मेरा पप्पू उसके पेट पर.
अब वो मुझे अपने ऊपर कर लेती है. मैं अपना सिर उसके मम्मों पर लाता हूं तो वो उसे उन पर दबा देती है. मैं उन्हें चूसने लगता हूं.
कुछ ही देर में वो सिसकने लगती है. बारी बारी से दोनों मम्मों को चूसता जाता हूं.
वो गरमाने लगती है. वो अपनी क्रोच को मेरे पप्पू पर घिसने लगती है.
मैं अपना एक हाथ उसकी योनी पर ले जाता हूं. जैसे ही क्लिट को छूता हूं वो सरसरा उठती है.
मैं अचानक उसके मम्में छोड़ता हूं और सीधा अपना मुँह उसकी योनी पर ले जाता हूं. वो मना करती है पर मैं जबरदस्ती उसमे मुँह घुसेड़ देता हूं
वो चीख उठती है. मैं जोर जोर से उसकी योनी को चूसने और चाटने लगता हूं. वो पनियाने लगती है.
उसकी लगातार चींखे निकल रही थी और मैं उसे चूसता ही जा रहा था. वो अचानक भरभरा कर ढेर हो जाती है.
बहुत वेक्यूम सा लग रहा था. एक साथ इतनी सारी हीरोइन तो हाथ से निकली ही निकली वो डायमंड भी हाथ से गए.
और हाँ, वो आक्शन गर्ल, उसे तो सपने में भी निपटा नहीं पाया.
मैंने अपने आप से प्रश्न किया. कल रात ज़रीन के साथ गुज़ारा समय और रात सपने में उड़ाए गुलछर्रे, दोनों में क्या फर्क है.
दोनों ही डेड हो चुके हैं और दोनों ही स्मृति का हिस्सा भर हैं. दोनों की याद बराबर गुदगुदा रही है.
बल्कि सपने वाली ज्यादा गुदगुदा रही है...... याने कि कोई फर्क नहीं......
गुज़रा समय भी सपने की ही मानिंद हो जाता है....... दोनों का ही कोई अस्तित्व नहीं अब .......
इसीलिए जो जानते है वो कहते है कि पास्ट से कोई अटेचमेंट ना रखते हुए सिर्फ और सिर्फ इस पल में जीना चाहिए. खैर..............
आज का दिन पूरा फ्री है.......कोई साथी भी नहीं.......क्यों ना नए क्लाइंट से बात की जाय, हो सकता है वो कोई जुगाड कर दे आज का.
मैं फोन लगाता हूं. सामान्य शिष्टाचार के बाद मैं मुद्दे की बात पर आता हूं.
वो मुझे अच्छी एस्कार्ट सर्विस से कोई बढ़िया लड़की उपलब्ध कराने की बात करता है.
मैं प्रोफेशनल लड़की के लिए मना करता हूं तो वो बोलता है कि आप इंतज़ार करो, आधे घंटे में आपको नान-प्रोफेशनल लड़की हाज़िर जो जायेगी.
***
रूम की बेल बजती है. दरवाजा खोला तो एक सुन्दर लड़की सलवार कुर्ते में नज़र आती है.
अपना परिचय वो सुनयना कह कर देती है. उसे अंदर सोफे पर बैठा कर उसके सामने बैठ जाता हूं.
‘आप हमारी कंपनी से नाता जोड़ रहे हैं इसकी हमें बहुत खुशी है. मैं एम.डी. सर की सेक्रेटरी हूं और उन्होंने मुझे आपको कंपनी देने के लिए भेजा है.’........सुनयना ने पूरा परिचय दिया.
‘थेंक यू सुनयना, बट ऐसा लगता है कि आप मजबूरी फील कर रही हैं यहाँ आने की’.....मैंने उसका चेहरा पढ़ते हुए कहा.
‘नहीं सर ऐसी कोई बात नहीं है, आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी, आप निश्चिन्त रहिये.’
‘नहीं सुनयना, मैं आपकी इच्छा के खिलाफ कुछ भी नहीं करूँगा. चलिए आप मुझे दुबई घुमाइये.’
‘नहीं सर, आप विश्वास कीजिये मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, आप आदेश कीजिये.’
‘सच कह रही हो.............. चलो तुरंत अपने सारे कपड़े निकालो.’....मैंने उसकी आँखों में आँखे डाल कर कहा.
उसने अपनी निगाहें झुका ली. वो कुछ एकदम जड़ हो गई.
मैं उसके पास जाता हूं और उसके दोनों कंधे पकड़ता हूं. वो निगाहें ऊपर करती है.
उसकी आँखों में पानी आ जाता है. मैं आँखों से उसे निश्चिन्त रहने का इशारा करता हूं.
‘आप कहीं एम.डी. सर से बोल तो नहीं देंगे, वरना वो नाराज़ हो जायेंगे.’......उसने पूछा.
‘सुनयना, तुम बिलकुल भी डरो मत, मैं तुम्हारी बहुत तारीफ़ करूँगा उनसे.’
‘थेंक यू सर.’
‘इट्स आल राईट सुनयना. पर ये बताओ कि जो मैं पूछूँगा उसका सही सही जवाब दोगी.’
‘जी आप कुछ भी पूछिये.’
‘मैं समझता हूं कि तुम कई बार सेक्स कर चुकी हो, तो फिर सेक्स से घबरा क्यों रही हो.’....मैं पूछता हूं.
‘हाँ सर, मुझे रेगुलर सेक्स करना पड़ता है, पर किससे करना है ये चुनाव मेरे हाथ में नहीं होता है. या तो सर का बिस्तर गरम करना होता है या उनके मेहमान का, ऐसे भी कहीं सेक्स का मज़ा आ पाता है.’...वो बोली.
‘तो इसका मतलब तुम्हे सिर्फ और सिर्फ दूसरे को ही खुश करना होता है, शायद सामने वाला तुम्हारी फीलिंग्स का कोई ख्याल नहीं करता होगा. है ना ‘......मैंने फिर पूछा.
इस बार वो कुछ बोल नहीं पाई और सिर्फ सिर हिलाकर हाँ मैं जवाब दिया और फिर अपनी हथेलियों से अपना चेहरा ढँक लिया. जब हाथ हटाया तो उसके चेहरे से बड़ी बेचारगी झलक रही थी.
मैं उठकर फिर सामने बैठ जाता हूं. कुछ देर सिर्फ उसे देखता रहता हूं. वो कभी नीचे देखती तो कभी मुझे.
मैं उठकर कॉफी का आर्डर देता हूं. कुछ देर मैं चुप रहता हूं.
वो बाथरूम चली जाती है. जब वो वापिस बाहर आती है तब तक कॉफी आ चुकी होती है.
वो तुरंत कॉफी तैयार करती है. हम दोनों कॉफी पीने लगते हैं. मैं जब उसपर से नज़रें नहीं हटाता हूं तो उसे हलकी सी हंसी आ जाती है.
‘ऐसे क्यों देख रहे हैं आप मुझे. मेरी नादानी पर हंसी आ रही है ना आपको.’.......वो काफी संयत हो चुकी थी.
‘नहीं ऐसी बात नहीं है.........बस आज तक तुम्हारी जैसी लड़की नहीं मिली मुझे इसलिए तुम्हे जी भर के देख रहा हूं.’ ......... मैं जवाब देता हूं.
‘आप जैसा भी मैंने कोई नहीं देखा है. आप बहुत अच्छे हैं.’........वो निगाहें झुकाती हुई बोली.
‘चलो आगे पूछता हूं. तुम्हारे एम.डी. बिस्तर में कैसे पेश आते हैं तुम्हारे साथ.’
‘वो सिर्फ अपना ही ख्याल करते हैं. मुझे तो बस वो खिलौना समझ कर खेलते हैं.’
‘और बाकि उनके मेहमान.’
‘वो तो मुझे बाजारू समझ कर बर्ताव भी बुरा करते हैं. सब कुछ सहन करना पड़ता है.’
‘तो फिर ऐसी नौकरी क्यों कर रही हो.’
‘एम.डी. सर बहुत दयालु इंसान है. उन्होंने मेरे परिवार के लिए मुंबई में घर खरीद कर दिया है. और भी बहुत
अहसान है तो बस वो ही चुका रही हूं.’
‘तो क्या तुम्हे ओर्गास्म नहीं होता है जब भी ऐसे सेक्स करती हो.’
‘सच बताऊँ, मजबूरी में कभी भी ओर्गास्म नहीं होता है.’
‘और अगर वो बहुत लंबा चले तब भी नहीं, कभी तो तुम्हारी छूट होती होगी.’.....मेरे प्रश्न जारी थे.
‘शुरू से ही नेगेटिव माइंड-सेट हो जाता है, तो हालाँकि दोनों पैर तो खुल जाते हैं मजबूरी में पर मन नहीं खुल पता है.
बस यही कारण है कि ओर्गास्म नहीं हो पता है. पहले कभी होता था पर आजकल तो बिलकुल नहीं.’......वो बताती है.
‘इसका मतलब तुम सेक्स से विरक्त होती जा रही हो. ये तो अच्छी बात नहीं है.........अभी तो तुम्हारी शादी भी होनी है........ऐसे कैसे चलेगी लाइफ.’
‘अब जैसे भी चले काटनी तो पड़ेगी ही.’
‘अच्छा ये बताओ तुम्हे क्या याद आता है, कब तुमने आखिर बार सेक्स को एन्जॉय किया था.’
‘साल भर से तो ऊपर ही हो गए होंगे.’
‘तुम्हारा मन नहीं करता है.’
‘सच बताऊँ, बहुत करता है.......कभी कभी तो मुझे अपने आप को शांत करना पड़ जाता है.’
‘तो तुम क्या सोचती हो कि किस परिस्थिति में तुम सेक्स का भरपूर मज़ा ले सकती हो.’...मैं इस तरह की लड़की की मानसिकता जानना चाह रहा था.
वो थोड़ा सकुचाती है. परन्तु फिर बताने लगती है.........
‘मुझे कोई बहुत प्यार करे और मैं बिलकुल डूब जाऊं उसमे तो फिर उसके साथ जो सेक्स होगा वो बहुत आनंददायक होगा. पर ये सिर्फ मेरी सोच है, शायद यथार्थ में ऐसा संभव नहीं है.’
मैं उसकी आँखों में फिर से झाँकने लगता हूं.
कुछ ही देर में उसकी निगाहें फिर से झुक जाती है. वो जब फिर नज़रें उठती है तो मुझे अपने में डूबा पाती है.
‘आप फिर ऐसे क्यों देखने लगे मुझे.’
______________________________
‘इसलिए कि तुम जैसी कोई दिखी नहीं मुझे कभी.’.......और उसकी आँखों में झांकते झांकते उसकी ओर बढता हूं.
और फिर उसके पैर के पास बैठ कर उसकी गोद में अपने हाथ रख देता हूं.
नज़रें अभी भी उनकी आँखों में ही थी. अब वो भी अपलक मुझे ही देख रही थी.
अचानक वो अपने हाथ मेरी आँखों पर रख देती है. मेरी आँखे बंद हो जाती है.
अब मैं अपना सर उसकी गोद में रख कर उसके पैरों को बड़े ही प्यार से पकड़ लेता हूं.
उसके हाथ स्वमेव ही मेरे सर पर आ जाते हैं.
कुछ देर हम इसी अवस्था में रहते हैं.
फिर पता नहीं उसे क्या होता है वो अपने हाथों से मेरे बालों को हौले से सहलाने लगती है.
मुझे बहुत अच्छा फील होता है. मैं उसकी गोद को और कस के पकड़ लेता हूं. वो काफी देर तक मेरा सर सहलाती रहती है.
दस मिनट ऐसे ही निकल जाते हैं.
अचानक वो बोलती है........’क्या मैं आपको सर के बजाय आपके नाम से बुला सकती हूं.’
मैं अचानक चौंक कर उठता हूं ......’ऑफ कोर्स, माय प्लेज़र.’
‘अभि आप बहुत अच्छे हो. आप सबसे अलग लगे मुझे.’....अब उसके बाल सहलाते हाथ मेरे चेहरे की ओर बढ़ चले.
मैं मुस्कुरा देता हूं. वो हथेली में मेरा चेहरा थाम लेती है.
मैं उठ कर उसके बराबर सोफे पर बैठ जाता हूं. उसके हाथ अभी भी मेरा चेहरा बड़े ही प्यार से थामे हुए थे.
मैं भी अपनी हथेलियों में उसका चेहरा भर लेता हूं. वो अब बड़े प्यार से मुझे देखने लगती है.
तभी मैं बोलता हूं.........’सुनयना अगर बुरा ना मानो तो मैं तुमको हग कर सकता हूं एक बार.’
इस बात का जवाब देने के बजाय वो मेरा चेहरा छोडती है और मेरे सीने पर झुकते हुए उसमे एकदम से सिमट जाती है.
मेरे हाथ अपने आप उसके इर्द गिर्द लिपट जाते हैं. मैं उसको अपने सीने में छुपा लेता हूं.
अपने एक हाथ से उसकी पीठ सहलाने लगता हूं और दूसरे से उसके बाल. पता नहीं कितनी देर हम ऐसे ही रहते है.
जब मैं उसे उठा कर अलग करता हूं तो वो मेरे आगोश से निकलने के लिए मना कर देती है.
‘‘यार इस तरह से मेरी कमर दुखने लगी है.’.....मैं उसे कहता हूं.
वो जवाब देने के बजाय अपने वजन से मुझे पीछे सोफे पर धकेलने लगती हैं.
मैं पीठ के बल धीरे से पीछे ढुलक जाता हूं और साथ साथ वो भी मेरे ऊपर आ जाती है. अभी भी उसका चेहरा मेरे सीने में पैवस्त था.
अब मैं लेटे लेटे ही उसे फिर से लपेट लेता हूं. फिर इसी तरह कुछ देर और हम पड़े रहते हैं.
फिर मैं उसे थोड़ा ऊपर खींचता हूं. वो अपना गला मेरे कंधे में घुसा देती है. अब वो ठीक मेरे ऊपर आ जाती है, उसके वक्ष मेरे सीने पर महसूस होने लगते हैं.
मैं उत्तेजना से भर उठता हूं. मेरा पप्पू कड़क हो जाता है.
अब वो अपना सर उठाती है और अपने गाल मेरे गालों पर रख देती है. कुछ देर तक वो गाल से गाल सहलाती रहती है.
अचानक वो मेरा मुँह पकडती है और अपना सिर उठाकर मेरे होंठों में अपने होंठ डाल देती है और उन्हें बेतहाशा चूमने लगती है.
जिस तरह से वो चूम रही थी ऐसा लग रहा था कि पहली बार वो ऐसा कर रही है. बहुत ही पेशोनेट हो जाती है वो.
कोई दस मिनट बाद वो रूकती है और मेरी आँखों में देखती है. फिर वो अपनी नज़रें झुका कर मुस्कुराती है और फिर से मेरे सीने में गुम हो जाती है.
मैं उसे जकड़े हुए धीरे से बैठ जाता हूं और फिर उसे गोद में उठा कर बेड रूम की ओर बढता हूं. वो अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लेटी है.
जैसे ही उसे बेड पर रखता हूं वो शर्मा कर बिस्तर में मुँह छुपा लेटी है और बस इतना ही कह पाती है कि .........’प्लीज़ लाईट बंद कर दो.’
मैं एकदम अँधेरा कर देता हूं. फिर धीरे से उसके पास आकर लेट जाता हूं. वो मेरी ओर करवट लेटी है और फिर से मुझसे चिपक जाती है. मैं भी उसे फिर जकड़ लेता हूं.
वो खींच कर मुझे अपने ऊपर करने लगती है. मैं अपने दोनों हाथ और पैरों पर वजन लेटे हुए उसके ऊपर आ जाता हूं.
वो अपने दोनों पैर चौड़े करके मुझे अपने अंदर ले लेती है. मेरा पप्पू उसके क्रोच पर टिक जाता है.
वो अपने हाथों से मेरा चेहरा खींच कर फिर चूमने लगती है.
उसके हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगते हैं.
अचानक उसके हाथ मेरे लोअर को नीचे खिसकाने लगते हैं. कुछ ही देर मैं वो मेरा लोअर और अंडरवियर निकालने में कामयाब हो जाती है. अभी भी चुम्बन जारी था.
अब उसके हाथ मेरे पुट्ठों को सहलाने लगते हैं.
अचानक मैं घूमता हूं और उसको अपने ऊपर ले लेता हूं. उसके कुर्ते को पकड़ कर ऊपर खींचने लगता हूं. वो भी थोड़ा उठ कर निकालने में मदद करती है. वो फिर मुझसे चिपक जाती है.
अब मैं उसकी ब्रा के हुक खोलता हूं और उसके स्ट्रेप कन्धों से नीचे सरका देता हूं. वो खुद ब्रा को अपने वक्ष से खींच कर अलग कर देती है.
फिर वो उठ कर मेरे पेट पर बैठ जाती है और अपने सलवार का नाडा खोलती है. मैं भी अपना टीशर्ट और बनियान निकाल देता हूं.
वो खड़ी होकर अपनी सलवार और पेंटी निकाल देती है और फिर से मेरे ऊपर आकार लेट जाती है.
उसके बब्बू मेरे सीने में चुभने लगते हैं वहीँ मेरा पप्पू उसके पेट पर.
अब वो मुझे अपने ऊपर कर लेती है. मैं अपना सिर उसके मम्मों पर लाता हूं तो वो उसे उन पर दबा देती है. मैं उन्हें चूसने लगता हूं.
कुछ ही देर में वो सिसकने लगती है. बारी बारी से दोनों मम्मों को चूसता जाता हूं.
वो गरमाने लगती है. वो अपनी क्रोच को मेरे पप्पू पर घिसने लगती है.
मैं अपना एक हाथ उसकी योनी पर ले जाता हूं. जैसे ही क्लिट को छूता हूं वो सरसरा उठती है.
मैं अचानक उसके मम्में छोड़ता हूं और सीधा अपना मुँह उसकी योनी पर ले जाता हूं. वो मना करती है पर मैं जबरदस्ती उसमे मुँह घुसेड़ देता हूं
वो चीख उठती है. मैं जोर जोर से उसकी योनी को चूसने और चाटने लगता हूं. वो पनियाने लगती है.
उसकी लगातार चींखे निकल रही थी और मैं उसे चूसता ही जा रहा था. वो अचानक भरभरा कर ढेर हो जाती है.
सिलसिला 16
एक दूसरी दुनिया की सैर करके वापस लौटे.
मैं धीरे से उसके ऊपर से उठने लगा तो उसने फिर मुझे कस लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए.
दोनों गहन चुम्बन-रत हो गए. फिर उसने गाल पर एक मीठी पप्पी देते हुए कहा......थैंक्यू.
मैंने भी उसको पप्पी देते हुए कहा सेम टू यू.
फिर मैं उस पर से उठा और साइड में पलटते हुए ब्लेंकेट में घुस गया.
पहली बार ऐ.सी. की ठंडक महसूस हुई वरना तो माहौल इतना गरम था कि ठंडक का पता ही नहीं चल रहा था.
मैं आपको बता नहीं सकता के मुझे कितना मज़ा आया.
घुप्प अंधरे में, एक अत्यंत भरे बदन वाली कामुक लड़की के साथ, जो के एकदम अजनबी है, सेक्स करने का मज़ा..........अवर्णनीय है.
वो साथ में होते हुए भी आपकी इमेजिनेशन सौ फीसदी इन्वोल्व थी इस पूरी प्रक्रियां में. सारी कांशियसनेस और होश उस लड़की की छवि बना रहा था.
सारा कृत्य ही इतनी अवेयरनेस के साथ हुआ कि मज़ा तो कई गुना ज्यादा आना ही था. इंसान को हमेशा ही अननोन में बहुत ज्यादा आनंद आता है.
आज मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. इस तरह ये डार्क नाईट अननोन सेक्स की समाप्ति एक विशिष्ठ तृप्ति के साथ हुई.
वो उठी और फिर कुछ चलने की आवाज़ सुनाई दी. मैं एकदम रिलेक्स होकर पड़ा रहा.
अचानक लाईट आन हुई और मेरी आँखे एकदम से बंद हो गई.
अरे इसने लाईट क्यों चला दी. क्या उसे मैं देख सकता हूं........मेरे रोंगटे खड़े हो गए इस विचार से ही.
मैंने आँख खोलने का असफल प्रयास किया और फिर चिल्लाया...........आयशा....आयशा.......
कोई भी रेस्पोंस नहीं मिला मुझे. मैंने अपनी आँखों को लाईट की तेज़ी से समायोजित करते हुए जैसे तैसे खोला और इधर उधर देखने लगा.
कहाँ है वो.........मेरा दिल जोरो से धडकने लगा.............
क्या वो मेरी कल्पना जैसी होगी या फिर एकदम अलग........मेरी जिज्ञासा चरम पर पहुँच गई और रोमांच उसके तो कहने ही क्या...................
अचानक दीवार पर मुझे एक सफ़ेद छाया नज़र आई. मैंने अपनी आँखों को मसला और गौर से देखा कि कौन है.
मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था.........मैं काम्पने लगा.........
और मेरी दृष्टी जैसे ही साफ़ उई, अचानक दिमाग में एक जोर का धमाका हुआ और मैं सुन्न सा हो गया
अचानक दीवार पर मुझे एक सफ़ेद छाया नज़र आई. मैंने अपनी आँखों को मसला और गौर से देखा कि कौन है.
मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था.........मैं काम्पने लगा.........
और मेरी दृष्टी जैसे ही साफ़ उई, अचानक दिमाग में एक जोर का धमाका हुआ और मैं सुन्न सा हो गया..........
जोर का झटका एक दम जोर से लगा.
हुआ यूँ कि एक सफ़ेद साया दूर लाईट के पास दिखा. गौर से देखने पर किसी ने अपने आपको सफ़ेद चादर से ढँक रखा था.
फिर उसने अपना मुंह बाहर निकला और चेहरा देखते ही मुझे करंट लगा. मैं यकीन नहीं कर पा रहा था कि ये थी अभी मेरे साथ..........................
जरीन!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
बस उसे आँख फाड़े देखता ही रह गया. वो मुस्कुराते हुए चादर लपेटे हुए मेरे पास आई.
मेरे गालों पर एक ऊँगली फिराते हुए एक चुम्मा दे दिया. फिर भी जब मैं स्टेचू ही बना रहा तो उसने मुझे झिंझोडा ........’हे अभी, अरे ये मैं हूं यार, इतना अचंभित क्यों है.........’
‘तुम ......तुम तो चली गई थी........फिर.......तो ये तुम थी................मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा है...........’......मैं बहुत ही विस्मय के साथ बड़ी मुश्किल से बोल पाया.
‘सॉरी अभि, तुम्हे अँधेरे में रखने के लिए.............बट सच बताओ...........मज़ा तो आया ना........’
‘मज़ा...........भयंकर से भयानक मज़ा आया.....पर ये सब हुआ कैसे.........तुम कैसे आई......तो तुम्हारी दोस्त जो शुरू में यहाँ थी वो कहाँ और कब गायब हो गई..........ये....”
‘बस बस ........सब बताती हूं.........तो जानू ये था मेरा असली सरप्राइज़, आई होप की तुम्हे पसंद आया होगा'
जब तुम नहाने गए तब मेरी सहेली चली गई और उसकी जगह मैं आ गई और फिर पूरे वक्त हम दोनों ही थे यहाँ..............व्हिस्पर में बोलने के कारण तुम मेरी आवाज़ नहीं पहचान पाए.’....वो थोड़ा रुकी.
‘पर अभि, मैं बता नहीं सकती कि ये डार्क नाईट सेक्स में मुझे कितना ज्यादा मज़ा आया. ये कुछ अलग ही था..........थेंक्स अभि.’..............और ये कहते हुए उसने अपने होंठ से मेरे होंठो पर एक गीली गीली पप्पी ले ली.
‘ज़रीन द ग्रेट, मान गया तुम्हे और तुम्हारे सरप्राइज़ को......हेट्स ऑफ टू यू यार.’ और ये कहते हुए मैं थोड़ा सा ब्लेंकेट से बाहर आया और उसे चादर समेत जोर से गले लगा लिया.
अचानक उसने मुझे थोड़ा परे किया और मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरते हुए बोली......’अभि, अब मुझे तुमसे सच में ही माफ़ी मांगनी पढेगी क्योंकि वाकई मेरी सुबह दोहा कि फ्लाईट में ड्यूटी है और देखो कितना लेट हो गई हूं.’
‘ओह नो, थोड़ी देर तो रुक जाओ ज़रीन.’
‘अभि, कल मैं शाम तक आ जाउंगी, बस शाम के बाद सिर्फ और सिर्फ हम दोनों, ठीक है.’ .... ये कहकर उसने चादर हटाई और बाथरूम की ओर चल पड़ी.
उस शार्ट और ट्रांसपेरेंट नाइटी में उसका ढला हुआ शरीर को देखकर मेरे शरीर में रोमांच की लहर दौड़ गई. मैंने उसे पुकारा कि दो मिनट तो इधर आओ तो वो हँसते हुए घड़ी में समय बताते हुए बाथरूम में घुस गई.
जब तक वो तैयार होकर बाहर आई मैं भी कपड़े पहन कर तैयार हो गया.
मैंने उसे बाँहों में भरा तो वो समय की दुहाई देने लगी. उसका इस तरह ठंडापन मेरे उत्साह पर पूरा पानी फेरता चलता गया. मैं उसकी मजबूरी को बड़ी ही मजबूरी के साथ स्वीकार करते हुए तुरंत बाहर आ गए.
उसने अपनी टेक्सी पकड़ी और मैंने अपनी.
कोंटिनेंटल ब्रेकफ़ास्ट के लिए होटल की मध्य लोबी में स्थित ‘अल-नखिल लाउंज’ मैं पहुंचा.
नाश्ते के दौरान मेरी नज़र स्वाभाविक रूप से चार-पांच अति सेक्सी सुंदरियों और उनसे घिरे एक शेख पर पड़ी. वो काफी हँस बोल रहे थे.
मैं नाश्ता खतम करके भी वहीँ बैठे बैठे उन्हें निहार रहा था.
वे जब उठ कर चले गए, तो मैं भी उठा और बाहर आने लगा. इस दौरान मुझे शेख जहाँ बैठा था वहाँ सोफे पर एक लाल शनील की पोटली नज़र आई. शायद वो शेख भूल गया था.
मैंने वो पोटली उठाई और तुरंत कर पार्किंग की ओर भागा. नीचे पोर्टिको में मुझे वो नज़र आया और मैंने उसे रोका.
उसने सुंदरियों को जाने का इशारा करके वो मेरे पास आया. जब मैंने उससे उस पोटली कि तस्दीक करा कर उसके हवाले की तो उसने लिटररी मुझे गले लगा लिया.
‘बिरादर, तुम नहीं जानते तुमने मुझे कितनी कीमती चीज़ लौटाई है. आज के ज़माने में भी तुम जैसे लोग होते हैं मैं सोच भी नहीं सकता था.’
उसने मुझे बताया कि उसमे कीमती डायमंड थे. मुझे उसने इनाम देने की पेशकश की जिसे मैंने विनम्रता से ठुकरा दिया. वो मेरा कायल हो गया.
‘बिरादर, मेरा नाम मोहम्मद बिन-ज़ायद अल-मख्तूम है और मेरा बहुत बड़ा केसिनो है दुबई में. अब तुम मेरे खास दोस्त और मेहमान हो. अब जब तक तुम यहाँ हो, देखो मैं तुम्हारी कैसी खिदमत करता हूं. चलो आओ लॉबी में बैठकर बातें करते हैं.’
उसने फोन पर ड्रायवर को कुछ देर वेट करने का बोल कर मुझसे मुखातिब हुआ.
‘दरअसल केसिनो के बेसमेंट में मेरा एस्कोर्ट सर्विस का सीक्रेट बिजनेस है. सारी दुनिया का चुनिन्दा और नायब हुस्न मैं यहाँ के हाई क्लास रईसों को उपलब्ध कराता हूं. एक हाई क्लास केटेगरी भी है जिसमे हफ्ते में एक बार हम किसी सेलेब्रिटी को आक्शन करते हैं. वो सिर्फ १०-१२ खास मेंबर के बीच ही होता है.’
‘तुम्हे एकदम मज़ा आ जायेगा क्योंकि बोलीवुड का बहुत हुस्न है मेरे यहाँ. और इस बार की आक्शन गर्ल भी इंडिया से आ रही है आज. परसों दिन में आक्शन है, तो कल दिन में वो फ्री रहेगी और दोस्त कल तुम और वो............’
ये सुन कर मेरे रोंगटे खड़े होने लगे. मेरी तो एकदम से लोटरी ही निकाल आई थी.
‘कौन है वो’ मैंने रोमांच से पूछा.
‘बिरादर, आक्शन गर्ल को हम बहुत सीक्रेट रखते हैं और सिर्फ विनर को ही बस उसके बारे में पता चलता है वो भी एक राउंड खतम होने के बाद. पहला राउंड तो हमारा विनर सोच सोच के ही मर जाता है कि आखिर ये सेलेब्रिटी कौन है.’
ये तो कल रात मैंने भी महसूस किया डार्क नाईट अननोन सेक्स करके.
‘तुम कल की छोडो बिरादर. तुम अभी चलो मेरे साथ. बोलीवुड की इस वक्त आठ सुंदरियां मौजूद है. जैसे चाहो वैसे एन्जॉय करो.’ और ये कहकर उसने मेरा हाथ थामा और अपनी मर्सीडीज़ मैं बैठा कर अपने केसिनो की ओर ले चला.
********************
केसिनो पहुँच कर मुझे वो अपने सीक्रेट बेसमेंट में ले गया.
एक बहुत बड़ा राऊंड रूम था जिसके बीचो बीच एक गोल स्टेज था और घेरे में बैठने की शानदार कुर्सियां लगी हुई थी.
मोहम्मद ने बताना शुरू किया कि किस तरह से आक्शन का खेल होता है यहाँ.......
'हमारे सभी सम्माननीय और रईस मेहमान दोपहर २ बजे तक यहाँ मौजूद कुर्सियों पर आकर अपना स्थान ले लेते हैं. ठीक २ बजे सभी लाइट्स बंद कर दी जाती है.’
‘धीमी आवाज़ में कामुक अरेबियन संगीत फिजां को रंगीन बनाता रहता है. हमारा एक आदमी स्टेज के पास माइक लेकर खेल शुरू करवाता है.’
‘मंच के बीचोबीच हमारी आक्शन सेलेब्रिटी निचे से एक लिफ्ट के द्वारा प्रकट होती है. एक बहुत ही मद्धिम रंगीन रोशनी उस पर पड़ती है.’
‘उसके चेहरे पर एक नकाब होता है कि उसे पहचाना ना जा सके. वो एक पारदर्शी गाउन में लिपटी हुई होती है जिससे उसके जिस्म का जर्रा जर्रा नुमाया होता है.’
तालियों से स्वागत के बीच उद्घोषक, अब उसके जिस्म की तमाम खूबियाँ मेहमानों को बताता है. वो सेलेब्रिटी फिर धीरे से अपना गाउन गिरा कर अपने शफ्फाक़ जिस्म की नुमाइश करते हुए विभिन्न कामुक पोज़ बनाती है.'
अब तक हम मंच के ऊपर पहुँच चुके थे. उसने आगे बताना शुरू किया....
'उद्घोषक अब बेस प्राइज से बोली शुरू करता है. कल की हमारी बोली १०० हज़ार दिरहम (पंद्रह लाख रूपये) से प्रारंभ होगी.
‘मेरा अनुमान है कि ये २०० से २५० हज़ार दिरहम तक जाएगी.’
‘बोली के दौरान एक व्यवस्था और रखी जाती है कि दस हज़ार दिरहम देकर कोई भी मेहमान उस सेलेब्रिटी को २ मिनट तक पास जाकर छू कर, देख कर उसके हुस्न को करीब से महसूस कर सकता है.’
‘अमूमन सभी १४-१५ मेहमान इस आप्शन को लेते हैं. इस दौरान उन्हें अपना हाथ उसके पूरे शरीर पर फिराने की आज़ादी होती है.’
‘हाँ वो उसका चेहरा नहीं देख सकता, योनी में अन्दर हाथ नहीं डाल सकता है और चून्चियों को सिर्फ आहिस्ता से सहला सकता है.’
हाथ तो किसी एक के ही लगेगी वो पर कम से कम कुछ तो मज़े सारे मेहमान लेकर ही जाते हैं.'
मैं सारी बातें सुनकर अचंभित हो उठा. कितना कामुक द्रश्य रहता होगा वो.
इतनी महंगी हसीना जिसके लिए बाकि सभी लोगों की KLPD हो जाती है वो कल मुझे मिलने वाली है ......ये सोच सोच कर मेरे रोमांच की कोई सीमा नहीं रही.
'मोहम्मद भाई, मैं आपका दिल से बहुत आभारी हूँ कि आपने मुझे इस लायक समझा और ऐसा नायाब तोहफा दे रहे हैं.'
'बिरादर, आपने तो मोहम्मद भाई को ही जीत लिया है, आपके लिए तो जितना भी करूँ वो कम है. '
इसी तरह से बातें करते हुए हम एक दुसरे हॉल में पहुँचते हैं जहाँ पर कुछ हसीनाएं सिर्फ छोटे से टॉप और स्किर्ट में गपशप कर रही थीं.
वहां पर याना गुप्ता और उदिता गोस्वामी भी थी और बाकी दुसरे मुल्कों की लग रही थी.
जैसे ही उन्होंने हमें आते देखा, सब की सब दौड़ कर मोहम्मद के इर्द गिर्द आकर चिपक कर खड़ी हो गई.
'चलो तुम सबको मेरे एक बहुत ही प्यारे मेहमान से मिलवाता हूँ, ये अभि भाई हैं, इंडिया से आयें हैं. आज आप सबको इनका खास ख्याल रखना है. और बिरादर ये मेरी प्यारी प्यारी गर्ल फ्रेंड्स हैं.'
और फिर बारी बारी से सबका परिचय करवाया. सब मुझसे गले मिल मिल कर अभिवादन करती रहीं.
’मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए उदिता मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.
मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा.
फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.
उदिता बोली...’मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए वो मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.
मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा.
फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.
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अब आगे.......
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ऑफिस की सजावट देखते ही बनती थी. कुछ ही देर में उदिता बोलीवुड से आई छ: और सुंदरियों के साथ ऑफिस में प्रविष्ठ हुई. सभी एक छोटे से टॉप और स्किर्ट में थी.
सभी आकर मोहम्मद की आलिशान कुर्सी के आसपास खड़ी हो गई और मुझे कौतुहल से देखने लगी.
‘इनसे मिलो, ये मेरे एकदम खास मेहमान और छोटे भाई जैसे हैं. तुम सबको इनका खास ख्याल रखना है.’...........मोहम्मद उन सब से बोला.
‘मोहम्मद भाई, आप जरा भी फ़िकर न करें. खुदा कसम आज इन्हें हम जन्नत की सैर करा देंगे.
वैसे भाईजान, ये भी माशाल्लाह , किसी हीरो से कम नहीं हैं.........मज़ा आएगा.’.........वीना मलिक पीछे से चहकते हुए मेरे पास आकर बोली.
फिर उसने मुझे बाँहों में भरते हुए मस्त चुम्मा दिया. वीना को अपनी बाँहों में पाकर मैं बहुत उत्तेजना से भर गया और उसके भारी नितम्बों को हाथ में भरकर जोर से दबा दिया.
‘चलिए आप सब भी बारी बारी से हमारे दोस्त से परिचय कीजिये.’...........मोहम्मद अब बाकी सब से मुखातिब होते हुए बोला.
वीना हटी तो उसके ठीक पीछे से मेघना नायडू बाहें फैलाये मेरी ओर बड़ी.
पहले होंठों का चुम्मा लिया ओर फिर उसने अपने मम्मे मेरे सीने में घुसा कर उन्हें थोड़ा मसला. मैं उसके शरीर पर जहाँ भी हाथ गया उसे सहलाता चला गया.
फिर आई याना गुप्ता. बिलकुल फ्रेंच गुड़िया जैसी लग रही थी. हालांकि चेहरा उसका भावहीन था फिर भी मुझे बड़ी गर्मजोशी से किस करने लगी.
उसे तो मैंने बाँहों में भरकर लगभग उठा ही लिया. मेरा पप्पू एकदम तन चुका था. वो याना की योनी पर एकदम गुचा.
वो 'ओउच' करते हुए नीचे उतरी और मुझे एक मुक्का मारते हुए बोली ‘यू नोटी’ और फिर अपनी योनी सहलाती हुई पीछे चली गई.
मेरा पप्पू एकदम नब्बे डिग्री पर सर उठाये पेंट को तम्बू बनाने की कोशिश में लगा हुआ था.
मैं उसे ऊपर से ही सेट करने का प्रयास करने लगा तभी शेफाली ज़रीवाला आगे आई और उसने मेरे बेल्ट को ढीला करके ट्राउसर का बटन खोला और अपना हाथ मेरे क्रोच में घुसा दिया.
फिर पप्पू को थामा और थोड़ी कोशिश के बाद ऊपर की ओर कर दिया. मेरे पप्पू पर ऐसी सरसराहट हुई कि जैसे कि कोई ....‘काँटा लगा....... हाय लगा’.
जैसे ही उसने मुट्ठी में थामा तो सहज ही बोल पड़ी ‘हाय रे एकदम मस्त हथियार है हमारे भाईजान के दोस्त का तो.’
ये सुनते है सारी की सारी खिलखिला के हँस पड़ी. मोहम्मद भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाया. मेरे कान थोड़े से लाल हो गए.
अबके शेफाली ने अपनी क्रोच मेरे हथियार पर रखी और उसे मसलते मसलते मेरे हाथ उसके मोम्मों पर रखवा लिए.
मैं उन्हें मसलने लगा. फिर उसने अपना मुंह मेरे मुंह में दिया और अपनी लार मेरे मुंह में ट्रांसफर करने लगी.
उसके मुंह और सांस से बड़ी ही अच्छी खुशबू आ रही थी. मेरे पूरे होंठ गीले हो गए.
उसके हट्ते ही पूनम पांडे सामने आ गई. एकदम छम्मक छल्लो लग रही थी.
मैं धीरे से उसके ऊपर से उठने लगा तो उसने फिर मुझे कस लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए.
दोनों गहन चुम्बन-रत हो गए. फिर उसने गाल पर एक मीठी पप्पी देते हुए कहा......थैंक्यू.
मैंने भी उसको पप्पी देते हुए कहा सेम टू यू.
फिर मैं उस पर से उठा और साइड में पलटते हुए ब्लेंकेट में घुस गया.
पहली बार ऐ.सी. की ठंडक महसूस हुई वरना तो माहौल इतना गरम था कि ठंडक का पता ही नहीं चल रहा था.
मैं आपको बता नहीं सकता के मुझे कितना मज़ा आया.
घुप्प अंधरे में, एक अत्यंत भरे बदन वाली कामुक लड़की के साथ, जो के एकदम अजनबी है, सेक्स करने का मज़ा..........अवर्णनीय है.
वो साथ में होते हुए भी आपकी इमेजिनेशन सौ फीसदी इन्वोल्व थी इस पूरी प्रक्रियां में. सारी कांशियसनेस और होश उस लड़की की छवि बना रहा था.
सारा कृत्य ही इतनी अवेयरनेस के साथ हुआ कि मज़ा तो कई गुना ज्यादा आना ही था. इंसान को हमेशा ही अननोन में बहुत ज्यादा आनंद आता है.
आज मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. इस तरह ये डार्क नाईट अननोन सेक्स की समाप्ति एक विशिष्ठ तृप्ति के साथ हुई.
वो उठी और फिर कुछ चलने की आवाज़ सुनाई दी. मैं एकदम रिलेक्स होकर पड़ा रहा.
अचानक लाईट आन हुई और मेरी आँखे एकदम से बंद हो गई.
अरे इसने लाईट क्यों चला दी. क्या उसे मैं देख सकता हूं........मेरे रोंगटे खड़े हो गए इस विचार से ही.
मैंने आँख खोलने का असफल प्रयास किया और फिर चिल्लाया...........आयशा....आयशा.......
कोई भी रेस्पोंस नहीं मिला मुझे. मैंने अपनी आँखों को लाईट की तेज़ी से समायोजित करते हुए जैसे तैसे खोला और इधर उधर देखने लगा.
कहाँ है वो.........मेरा दिल जोरो से धडकने लगा.............
क्या वो मेरी कल्पना जैसी होगी या फिर एकदम अलग........मेरी जिज्ञासा चरम पर पहुँच गई और रोमांच उसके तो कहने ही क्या...................
अचानक दीवार पर मुझे एक सफ़ेद छाया नज़र आई. मैंने अपनी आँखों को मसला और गौर से देखा कि कौन है.
मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था.........मैं काम्पने लगा.........
और मेरी दृष्टी जैसे ही साफ़ उई, अचानक दिमाग में एक जोर का धमाका हुआ और मैं सुन्न सा हो गया
अचानक दीवार पर मुझे एक सफ़ेद छाया नज़र आई. मैंने अपनी आँखों को मसला और गौर से देखा कि कौन है.
मेरा दिल धाड़ धाड़ करके बज रहा था.........मैं काम्पने लगा.........
और मेरी दृष्टी जैसे ही साफ़ उई, अचानक दिमाग में एक जोर का धमाका हुआ और मैं सुन्न सा हो गया..........
जोर का झटका एक दम जोर से लगा.
हुआ यूँ कि एक सफ़ेद साया दूर लाईट के पास दिखा. गौर से देखने पर किसी ने अपने आपको सफ़ेद चादर से ढँक रखा था.
फिर उसने अपना मुंह बाहर निकला और चेहरा देखते ही मुझे करंट लगा. मैं यकीन नहीं कर पा रहा था कि ये थी अभी मेरे साथ..........................
जरीन!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
बस उसे आँख फाड़े देखता ही रह गया. वो मुस्कुराते हुए चादर लपेटे हुए मेरे पास आई.
मेरे गालों पर एक ऊँगली फिराते हुए एक चुम्मा दे दिया. फिर भी जब मैं स्टेचू ही बना रहा तो उसने मुझे झिंझोडा ........’हे अभी, अरे ये मैं हूं यार, इतना अचंभित क्यों है.........’
‘तुम ......तुम तो चली गई थी........फिर.......तो ये तुम थी................मेरा तो दिमाग ही काम नहीं कर रहा है...........’......मैं बहुत ही विस्मय के साथ बड़ी मुश्किल से बोल पाया.
‘सॉरी अभि, तुम्हे अँधेरे में रखने के लिए.............बट सच बताओ...........मज़ा तो आया ना........’
‘मज़ा...........भयंकर से भयानक मज़ा आया.....पर ये सब हुआ कैसे.........तुम कैसे आई......तो तुम्हारी दोस्त जो शुरू में यहाँ थी वो कहाँ और कब गायब हो गई..........ये....”
‘बस बस ........सब बताती हूं.........तो जानू ये था मेरा असली सरप्राइज़, आई होप की तुम्हे पसंद आया होगा'
जब तुम नहाने गए तब मेरी सहेली चली गई और उसकी जगह मैं आ गई और फिर पूरे वक्त हम दोनों ही थे यहाँ..............व्हिस्पर में बोलने के कारण तुम मेरी आवाज़ नहीं पहचान पाए.’....वो थोड़ा रुकी.
‘पर अभि, मैं बता नहीं सकती कि ये डार्क नाईट सेक्स में मुझे कितना ज्यादा मज़ा आया. ये कुछ अलग ही था..........थेंक्स अभि.’..............और ये कहते हुए उसने अपने होंठ से मेरे होंठो पर एक गीली गीली पप्पी ले ली.
‘ज़रीन द ग्रेट, मान गया तुम्हे और तुम्हारे सरप्राइज़ को......हेट्स ऑफ टू यू यार.’ और ये कहते हुए मैं थोड़ा सा ब्लेंकेट से बाहर आया और उसे चादर समेत जोर से गले लगा लिया.
अचानक उसने मुझे थोड़ा परे किया और मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरते हुए बोली......’अभि, अब मुझे तुमसे सच में ही माफ़ी मांगनी पढेगी क्योंकि वाकई मेरी सुबह दोहा कि फ्लाईट में ड्यूटी है और देखो कितना लेट हो गई हूं.’
‘ओह नो, थोड़ी देर तो रुक जाओ ज़रीन.’
‘अभि, कल मैं शाम तक आ जाउंगी, बस शाम के बाद सिर्फ और सिर्फ हम दोनों, ठीक है.’ .... ये कहकर उसने चादर हटाई और बाथरूम की ओर चल पड़ी.
उस शार्ट और ट्रांसपेरेंट नाइटी में उसका ढला हुआ शरीर को देखकर मेरे शरीर में रोमांच की लहर दौड़ गई. मैंने उसे पुकारा कि दो मिनट तो इधर आओ तो वो हँसते हुए घड़ी में समय बताते हुए बाथरूम में घुस गई.
जब तक वो तैयार होकर बाहर आई मैं भी कपड़े पहन कर तैयार हो गया.
मैंने उसे बाँहों में भरा तो वो समय की दुहाई देने लगी. उसका इस तरह ठंडापन मेरे उत्साह पर पूरा पानी फेरता चलता गया. मैं उसकी मजबूरी को बड़ी ही मजबूरी के साथ स्वीकार करते हुए तुरंत बाहर आ गए.
उसने अपनी टेक्सी पकड़ी और मैंने अपनी.
कोंटिनेंटल ब्रेकफ़ास्ट के लिए होटल की मध्य लोबी में स्थित ‘अल-नखिल लाउंज’ मैं पहुंचा.
नाश्ते के दौरान मेरी नज़र स्वाभाविक रूप से चार-पांच अति सेक्सी सुंदरियों और उनसे घिरे एक शेख पर पड़ी. वो काफी हँस बोल रहे थे.
मैं नाश्ता खतम करके भी वहीँ बैठे बैठे उन्हें निहार रहा था.
वे जब उठ कर चले गए, तो मैं भी उठा और बाहर आने लगा. इस दौरान मुझे शेख जहाँ बैठा था वहाँ सोफे पर एक लाल शनील की पोटली नज़र आई. शायद वो शेख भूल गया था.
मैंने वो पोटली उठाई और तुरंत कर पार्किंग की ओर भागा. नीचे पोर्टिको में मुझे वो नज़र आया और मैंने उसे रोका.
उसने सुंदरियों को जाने का इशारा करके वो मेरे पास आया. जब मैंने उससे उस पोटली कि तस्दीक करा कर उसके हवाले की तो उसने लिटररी मुझे गले लगा लिया.
‘बिरादर, तुम नहीं जानते तुमने मुझे कितनी कीमती चीज़ लौटाई है. आज के ज़माने में भी तुम जैसे लोग होते हैं मैं सोच भी नहीं सकता था.’
उसने मुझे बताया कि उसमे कीमती डायमंड थे. मुझे उसने इनाम देने की पेशकश की जिसे मैंने विनम्रता से ठुकरा दिया. वो मेरा कायल हो गया.
‘बिरादर, मेरा नाम मोहम्मद बिन-ज़ायद अल-मख्तूम है और मेरा बहुत बड़ा केसिनो है दुबई में. अब तुम मेरे खास दोस्त और मेहमान हो. अब जब तक तुम यहाँ हो, देखो मैं तुम्हारी कैसी खिदमत करता हूं. चलो आओ लॉबी में बैठकर बातें करते हैं.’
उसने फोन पर ड्रायवर को कुछ देर वेट करने का बोल कर मुझसे मुखातिब हुआ.
‘दरअसल केसिनो के बेसमेंट में मेरा एस्कोर्ट सर्विस का सीक्रेट बिजनेस है. सारी दुनिया का चुनिन्दा और नायब हुस्न मैं यहाँ के हाई क्लास रईसों को उपलब्ध कराता हूं. एक हाई क्लास केटेगरी भी है जिसमे हफ्ते में एक बार हम किसी सेलेब्रिटी को आक्शन करते हैं. वो सिर्फ १०-१२ खास मेंबर के बीच ही होता है.’
‘तुम्हे एकदम मज़ा आ जायेगा क्योंकि बोलीवुड का बहुत हुस्न है मेरे यहाँ. और इस बार की आक्शन गर्ल भी इंडिया से आ रही है आज. परसों दिन में आक्शन है, तो कल दिन में वो फ्री रहेगी और दोस्त कल तुम और वो............’
ये सुन कर मेरे रोंगटे खड़े होने लगे. मेरी तो एकदम से लोटरी ही निकाल आई थी.
‘कौन है वो’ मैंने रोमांच से पूछा.
‘बिरादर, आक्शन गर्ल को हम बहुत सीक्रेट रखते हैं और सिर्फ विनर को ही बस उसके बारे में पता चलता है वो भी एक राउंड खतम होने के बाद. पहला राउंड तो हमारा विनर सोच सोच के ही मर जाता है कि आखिर ये सेलेब्रिटी कौन है.’
ये तो कल रात मैंने भी महसूस किया डार्क नाईट अननोन सेक्स करके.
‘तुम कल की छोडो बिरादर. तुम अभी चलो मेरे साथ. बोलीवुड की इस वक्त आठ सुंदरियां मौजूद है. जैसे चाहो वैसे एन्जॉय करो.’ और ये कहकर उसने मेरा हाथ थामा और अपनी मर्सीडीज़ मैं बैठा कर अपने केसिनो की ओर ले चला.
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केसिनो पहुँच कर मुझे वो अपने सीक्रेट बेसमेंट में ले गया.
एक बहुत बड़ा राऊंड रूम था जिसके बीचो बीच एक गोल स्टेज था और घेरे में बैठने की शानदार कुर्सियां लगी हुई थी.
मोहम्मद ने बताना शुरू किया कि किस तरह से आक्शन का खेल होता है यहाँ.......
'हमारे सभी सम्माननीय और रईस मेहमान दोपहर २ बजे तक यहाँ मौजूद कुर्सियों पर आकर अपना स्थान ले लेते हैं. ठीक २ बजे सभी लाइट्स बंद कर दी जाती है.’
‘धीमी आवाज़ में कामुक अरेबियन संगीत फिजां को रंगीन बनाता रहता है. हमारा एक आदमी स्टेज के पास माइक लेकर खेल शुरू करवाता है.’
‘मंच के बीचोबीच हमारी आक्शन सेलेब्रिटी निचे से एक लिफ्ट के द्वारा प्रकट होती है. एक बहुत ही मद्धिम रंगीन रोशनी उस पर पड़ती है.’
‘उसके चेहरे पर एक नकाब होता है कि उसे पहचाना ना जा सके. वो एक पारदर्शी गाउन में लिपटी हुई होती है जिससे उसके जिस्म का जर्रा जर्रा नुमाया होता है.’
तालियों से स्वागत के बीच उद्घोषक, अब उसके जिस्म की तमाम खूबियाँ मेहमानों को बताता है. वो सेलेब्रिटी फिर धीरे से अपना गाउन गिरा कर अपने शफ्फाक़ जिस्म की नुमाइश करते हुए विभिन्न कामुक पोज़ बनाती है.'
अब तक हम मंच के ऊपर पहुँच चुके थे. उसने आगे बताना शुरू किया....
'उद्घोषक अब बेस प्राइज से बोली शुरू करता है. कल की हमारी बोली १०० हज़ार दिरहम (पंद्रह लाख रूपये) से प्रारंभ होगी.
‘मेरा अनुमान है कि ये २०० से २५० हज़ार दिरहम तक जाएगी.’
‘बोली के दौरान एक व्यवस्था और रखी जाती है कि दस हज़ार दिरहम देकर कोई भी मेहमान उस सेलेब्रिटी को २ मिनट तक पास जाकर छू कर, देख कर उसके हुस्न को करीब से महसूस कर सकता है.’
‘अमूमन सभी १४-१५ मेहमान इस आप्शन को लेते हैं. इस दौरान उन्हें अपना हाथ उसके पूरे शरीर पर फिराने की आज़ादी होती है.’
‘हाँ वो उसका चेहरा नहीं देख सकता, योनी में अन्दर हाथ नहीं डाल सकता है और चून्चियों को सिर्फ आहिस्ता से सहला सकता है.’
हाथ तो किसी एक के ही लगेगी वो पर कम से कम कुछ तो मज़े सारे मेहमान लेकर ही जाते हैं.'
मैं सारी बातें सुनकर अचंभित हो उठा. कितना कामुक द्रश्य रहता होगा वो.
इतनी महंगी हसीना जिसके लिए बाकि सभी लोगों की KLPD हो जाती है वो कल मुझे मिलने वाली है ......ये सोच सोच कर मेरे रोमांच की कोई सीमा नहीं रही.
'मोहम्मद भाई, मैं आपका दिल से बहुत आभारी हूँ कि आपने मुझे इस लायक समझा और ऐसा नायाब तोहफा दे रहे हैं.'
'बिरादर, आपने तो मोहम्मद भाई को ही जीत लिया है, आपके लिए तो जितना भी करूँ वो कम है. '
इसी तरह से बातें करते हुए हम एक दुसरे हॉल में पहुँचते हैं जहाँ पर कुछ हसीनाएं सिर्फ छोटे से टॉप और स्किर्ट में गपशप कर रही थीं.
वहां पर याना गुप्ता और उदिता गोस्वामी भी थी और बाकी दुसरे मुल्कों की लग रही थी.
जैसे ही उन्होंने हमें आते देखा, सब की सब दौड़ कर मोहम्मद के इर्द गिर्द आकर चिपक कर खड़ी हो गई.
'चलो तुम सबको मेरे एक बहुत ही प्यारे मेहमान से मिलवाता हूँ, ये अभि भाई हैं, इंडिया से आयें हैं. आज आप सबको इनका खास ख्याल रखना है. और बिरादर ये मेरी प्यारी प्यारी गर्ल फ्रेंड्स हैं.'
और फिर बारी बारी से सबका परिचय करवाया. सब मुझसे गले मिल मिल कर अभिवादन करती रहीं.
’मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए उदिता मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.
मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा.
फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.
उदिता बोली...’मोहम्मद भाई आपके खास मेहमान तो हमारे अति खास मेहमान. अब देखिये कैसी खिदमत होगी अभि जी की.’.....ये कहते हुए वो मेरे गले लगी और अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए.
मैं तो जैसे अपने आप में ही नहीं था. उदिता के होंठ से उसका रस चूसने लगा.
फिर वो मुझे अपने भव्य ऑफिस में ले गया.
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अब आगे.......
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ऑफिस की सजावट देखते ही बनती थी. कुछ ही देर में उदिता बोलीवुड से आई छ: और सुंदरियों के साथ ऑफिस में प्रविष्ठ हुई. सभी एक छोटे से टॉप और स्किर्ट में थी.
सभी आकर मोहम्मद की आलिशान कुर्सी के आसपास खड़ी हो गई और मुझे कौतुहल से देखने लगी.
‘इनसे मिलो, ये मेरे एकदम खास मेहमान और छोटे भाई जैसे हैं. तुम सबको इनका खास ख्याल रखना है.’...........मोहम्मद उन सब से बोला.
‘मोहम्मद भाई, आप जरा भी फ़िकर न करें. खुदा कसम आज इन्हें हम जन्नत की सैर करा देंगे.
वैसे भाईजान, ये भी माशाल्लाह , किसी हीरो से कम नहीं हैं.........मज़ा आएगा.’.........वीना मलिक पीछे से चहकते हुए मेरे पास आकर बोली.
फिर उसने मुझे बाँहों में भरते हुए मस्त चुम्मा दिया. वीना को अपनी बाँहों में पाकर मैं बहुत उत्तेजना से भर गया और उसके भारी नितम्बों को हाथ में भरकर जोर से दबा दिया.
‘चलिए आप सब भी बारी बारी से हमारे दोस्त से परिचय कीजिये.’...........मोहम्मद अब बाकी सब से मुखातिब होते हुए बोला.
वीना हटी तो उसके ठीक पीछे से मेघना नायडू बाहें फैलाये मेरी ओर बड़ी.
पहले होंठों का चुम्मा लिया ओर फिर उसने अपने मम्मे मेरे सीने में घुसा कर उन्हें थोड़ा मसला. मैं उसके शरीर पर जहाँ भी हाथ गया उसे सहलाता चला गया.
फिर आई याना गुप्ता. बिलकुल फ्रेंच गुड़िया जैसी लग रही थी. हालांकि चेहरा उसका भावहीन था फिर भी मुझे बड़ी गर्मजोशी से किस करने लगी.
उसे तो मैंने बाँहों में भरकर लगभग उठा ही लिया. मेरा पप्पू एकदम तन चुका था. वो याना की योनी पर एकदम गुचा.
वो 'ओउच' करते हुए नीचे उतरी और मुझे एक मुक्का मारते हुए बोली ‘यू नोटी’ और फिर अपनी योनी सहलाती हुई पीछे चली गई.
मेरा पप्पू एकदम नब्बे डिग्री पर सर उठाये पेंट को तम्बू बनाने की कोशिश में लगा हुआ था.
मैं उसे ऊपर से ही सेट करने का प्रयास करने लगा तभी शेफाली ज़रीवाला आगे आई और उसने मेरे बेल्ट को ढीला करके ट्राउसर का बटन खोला और अपना हाथ मेरे क्रोच में घुसा दिया.
फिर पप्पू को थामा और थोड़ी कोशिश के बाद ऊपर की ओर कर दिया. मेरे पप्पू पर ऐसी सरसराहट हुई कि जैसे कि कोई ....‘काँटा लगा....... हाय लगा’.
जैसे ही उसने मुट्ठी में थामा तो सहज ही बोल पड़ी ‘हाय रे एकदम मस्त हथियार है हमारे भाईजान के दोस्त का तो.’
ये सुनते है सारी की सारी खिलखिला के हँस पड़ी. मोहम्मद भी मुस्कुराये बिना नहीं रह पाया. मेरे कान थोड़े से लाल हो गए.
अबके शेफाली ने अपनी क्रोच मेरे हथियार पर रखी और उसे मसलते मसलते मेरे हाथ उसके मोम्मों पर रखवा लिए.
मैं उन्हें मसलने लगा. फिर उसने अपना मुंह मेरे मुंह में दिया और अपनी लार मेरे मुंह में ट्रांसफर करने लगी.
उसके मुंह और सांस से बड़ी ही अच्छी खुशबू आ रही थी. मेरे पूरे होंठ गीले हो गए.
उसके हट्ते ही पूनम पांडे सामने आ गई. एकदम छम्मक छल्लो लग रही थी.
सिलसिला 15
हंस लो तुम भी, आज तो किस्मत ही खराब है.’..........मैं थोड़ा रूठते हुए बोला.
उसने गाल पर प्यारा सा चुम्मा देते हुए कहा..........’बहुत अच्छी किस्मत है जिसने हमें मिलाया है आज. देखते जाओ, तुम्हे जरा सी भी शिकायत नहीं रह जायेगी.
‘हाँ लग तो कुछ ऐसा ही रहा है’.........और हम दोनों हंस दिए.
‘आयशा, सबसे पहले मैं तुम्हे अच्छे से फील करना चाहता हूँ. मेरी मन की आँखे हाथों के माध्यम से तुम्हे देखेगी.’...........मैंने सुझाव दिया.
‘वॉव, सुभानअल्लाह..........तो फिर देर किस बात की है’........वो चहकते हुए बोली.
मैंने अपने हाथ उसके सर पर रख दिए और उसकी जुल्फों से खेलने लगा.
धीरे धीरे उसके पीठ तक फैले खुले बालों में हाथ फिराता रहा. इन खुली हुई घनी रेशमी जुल्फों में क्या सेक्सी लगती होगी.
अब पीठ से सारे बाल आगे कर दिए और उन्हें हाथों में भर उसमे मुंह घुसा कर लंबी सांस खींची.
मदमस्त खुशबू से मेरा मन अंगडाईयाँ लेने लगा.
फिर दोनों हाथों को कन्धों से होते हुए उसकी पीठ पर ले गया और उन्हें सहलाने लगा.
उसने अपने दोनों हाथ मेरे कन्धों पर रख दिए. मेरा गाल उसके गाल से टच हो रहा था.
अब मैं धीरे धीरे उसकी पूरी पीठ पर हाथ फिराने लगा या यूँ कहो कि मालिश ही करने लगा था.
उसकी सिल्की नाईटी के ऊपर से उसका बदन भी रेशमी महसूस हो रहा था.
मैंने उसको थोड़ा अपनी ओर खींचा तो हम दोनों के मुंह एक दूसरों के कन्धों पर टिक गए. उसने भी अपने हाथ मेरी गर्दन में लपेट दिए.
अब हौले से उसके उभार मुझे अपनी छाती पर महसूस होने लगे थे. मैं अपने कान से उसके नाजुक कान को छेड़ने लगा.
पूरी पीठ को अच्छे से सहलाने पर मुझे आभास हुआ कि उसका बदन भरा हुआ किन्तु ठोस है.
तो उसकी लेने में मुझे बहुत मज़ा आने वाला है. वो भी धीरे धीरे मेरी पीठ सहलाने लगी.
अब मैंने उसको पलटाया और उसके पीछे से सट गया. उसकी पीठ मेरे पेट एवं छाती से चिपक गई.
मेरा पप्पू उसकी कमर में मेरे टेरी-टॉवेल के गाउन की मोटी दीवार होने के बावजूद उसके पुट्ठों पर गड़ने लगा था.
उसने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. मेरी नाक उसकी घनी खुशबूदार जुल्फों से महक उठी.
अब मैंने अपनी हथेलियों को उसके फोरहेड पर रख कर उन्हें सहलाना चालू किया.
वहाँ से पलक पर, फिर मूंदी आँखों पर, फिर नाक पर और फिर दोनों गालों पर इस तरह से सहलाने लगा जैसे उसका फेशियल कर रहा हूँ.
उसका चेहरा बेदाग़ और चिकना था. उसके भरे हुए स्पोंजी गालों को मैंने ललचा कर एकबारगी खींच ही लिया.
उसके मुंह से जोर का आउउच निकला और उसने मेरा हाथ पकड लिया. मैंने हँस कर उसे सॉरी बोला.
अब उसकी चिन से होते हुए मेरी उँगलियाँ उसके नाजुक मांसल होंठो पर पहुंची.
अपनी उँगलियों के पोरों से उसके बंद होंठो को सहलाने लगा.
इधर मैं अपने होंठ उसके कान पर ले आया और गर्म सांसो को उनमे भरने लगा.
वो रह रह कर अपना कान मेरी नाक पर रगड़ने लगी.
अब उसके कान से होते हुए मैं उसके गाल पर आया और उसको पप्पी देने लगा.....
लगातार......कोई १५-२०......फिर मैंने उसके गाल को अपने मुंह में भर कर उसे गीला कर दिया.
उधर मैं अब अपनी उँगलियों से उसके होंठों को रगड़ कर मसलने लगा.
कभी ऊपर का होंठ तो कभी नीचे का होंठ. क्या गुदाज और मांसल होंठ थे.
तभी उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरी उँगलियाँ चाटने लगी.
उसकी नाज़ुक और मुलायम जीभ की मेरी उँगलियों पर हरकत से मेरे अंदर एकाएक हरकत हुई और मैं उसके कान में घुस गया और उसके इयर-लोब को चूसने लगा.
सनसनाहट के अतिरेक से वो अपना कान लगातार मेरे मुंह पर घिसने लगी.
उसकी जीभ और मेरी उँगलियों के द्वंद के बीच मैंने अपनी सारी उँगलियाँ उसके मुंह में घुसा दी.
मैं उँगलियों को उसके मुंह के हर हिस्से में घुमा रहा था.....जीभ पर, दांतो पर और अंदरूनी गालों में.
अब फिर मैंने उन्हें अंदर बाहर करने लगा और वो भी उन्हें मज़े से चूसने लगी.
मेरी सारी उँगलियाँ उसके थूक से सन चुकी थी और थोड़ा सा बह कर मेरे हाथ पर भी रिसने लगा था.
तभी मैंने अपने मुंह पर उसके हाथ को थिरकते पाया.
मैंने भी उसकी उँगलियों को अपने मुंह में लिया और चूसने लगा. चूसने चूसते उसका पूरा हाथ ही थूक से लथेड़ दिया.
अब मैंने अपना हाथ उसके मुंह से बाहर निकला और उसके हिप पर ले गया.
उसकी नाइटी को पकड़ कर अब उससेअपना हाथ साफ किया. इस दौरान उसकी हिप पर एक चिकोटी भी काट ली जिससे वो चिहुंक उठी.
मैंने सॉरी बोला और उसके गाल की एक जोरदार गीली और मीठी सी पप्पी ली.
अब मैं अपने हाथ फिर उसके मुंह पर ले आया और अब पूरे मुंह को सहला-सहला कर स्केन करने लगा.
मैं अपने मन में उसके चेहरे की तस्वीर बना रहा था.
दिलो-दिमाग पर आयशा ऐसे हावी थी कि बस उसी की ही इमेज बन रही थी.
______________________________
अब मैंने उसकी नाइटी की ज़िप पीछे से थोड़ी खोली और नाइटी से उसके दोनों हाथ निकाल दिए और उसके दोनों कंधे नंगे कर दिए.
अब दोनों हाथों के उसके गले पर फिराने लगा.
वहाँ से दोनों कंधो पर आया और अपना मुंह वहाँ रख कर चूमने लगा.
चूमते चूमते उसकी गर्दन पर आया और फिर नंगी पीठ पर.
वहाँ से दूसरे कंधे पर. इतने प्यार से चूम रहा था कि वो सिसकने लगी.
फिर उसकी एक बांह ऊपर की और उसके आर्म-पिट में अपना मुंह घुसा दिया.
उसके बदन की खुशबू, डियो की स्मेल के साथ मिक्स होकर मुझे मदहोश करने लगी.
मैं उसके चिकनी बगल को चाटने लगा.
फिर दूसरी बगल में घुस कर उसे भी चाट चाट कर गीला कर दिया. वो बहुत ऊंह-आह करने लगी.
अब उसने दोनों हाथ ऊपर किये और मोड़ कर मेरे सर के पीछे टिका दिए.
मैंने अपने दोनों हाथ नीचे किये और उन्हें उसके पेट पर नाइटी के ऊपर से फिराने लगा. क्या मुलायम और पतला पेट था.
कुछ देर अछे से सहलाने के बाद अब बारी थी उसके सबसे खास अंग को फतह करने की.
पता नहीं इतनी स्लिम है, उसके बूब्स भी कहीं एकदम छोटे हुए तो......
अब जो भी हो कुचलना तो है ही उन्हें.
मेरे हाथ उसके सीने के उपरी भाग पर काबिज हुए और वहाँ से मसलते मसलते नीचे की ओर बढने लगे.
नीचे का बदन नाइटी में ढंका हुआ था. हाथ वहाँ पहुंचे जहाँ से पहाड के चढाई शुरू होती है.
मन में यही आ रहा था कि एकदम छोटे छोटे टप्पू निकलेंगे. और जैसे ही अपने कांपते हाथ नीचे को सरकाए एकदम खड़ी चढाई महसूस हुई.
हाथ सरकते चले गए और चढाई भी बढती चली गई. मैं आश्चर्यचकित.
और जब हाथ चोटी पर पहुंचा तो लगा कि मैं तो कंचनजंगा की गगनचुम्बी ऊंचाई पर आ गया हूं.
फिर हाथों को चारो ओर घुमा कर उसके ढलानों की वक्रियता को नापने लगा.
ये तो दो बड़े बड़े टापू थे. मैंने अपने दोनों हथेलियों में उन्हें भरना चाहा तो हाथ में ही नहीं आये. ये तो बहुत बड़े माउन्ड्स हैं.
उन्हें दबाया तो एकदम कड़क लगे. फिर तो उन पहाड़ों को बुरी तरह खंगालने लगा.
फिर मैंने उन दोनों तरबूजों के साथ वो सब किया जो जो संभव था मसलन-
pressing, pumping, fondling, squeezing, pinching, twisting, rubbing, massaging, patting, crushing.......
stroking, taping, thumping, mashing, draining, grasping, compressing, wringing, mangling, pounding, mauling………
और एक शब्द में कहें तो ...’molesting’. ............ बाईस तरह से प्यार किया.
चूंचियों के मर्दन पर तो वो कांपने लगी और मेरे गाल पर चुम्मियों की बौछार कर दी.
फिर जब उसकी सहनशक्ति जवाब दे गई तो उसने मेरे दोनों हाथ थामे और पहाड़ के ढलान से फिसलती हुई एकबार फिर पेट की तराई के ओर ले चली.
तो इस तरह काश्मीर से शुरू हुआ सफर दक्षिणी महाराष्ट्र तक आ पहुंचा था. अब बारी थी साउथ इंडिया के सैर की.
अब वो मेरी ओर घूम गई. उसकी खुशबूदार सांसे मेरे नथुनों में ताजगी पैदा करने लगी.
मेरे होंठ मदहोश से उसके होंठो से जा लगे और जैसे ही उन्हें चूसता उससे पहले ही वो बोली.....’ये अभी नहीं.’
और फिर मेरे कन्धों को दबाते हुए नीचे बैठने का इशारा किया. मैं सरकता हुआ नीचे बैठ गया.
उसकी नाइटी एकदम माइक्रो थी, जरा सी जांघे ही ढंक पा रही थी.
मैं उसकी चिकनी जांघों पर अपने हाथ फिराने लगा. दोनों जांघों को सहलाने के बाद उन्हें बेतहाशा चूमने लगा.
दोनों हाथों से उसके पुट्ठे पकड़ कर उन्हें दबाने लगा. फिर हाथ थोड़े से नीचे सरकाकर नाइटी के अंदर ले जाते हुए उसके नंगे पुट्ठों को भींचने लगा.
उसकी योनी से ताज़े रस-फुहार की खुशबू आने लगी थी जो मुझे बहुत पागल बना रही थी.
मैंने अपना मुंह नाइटी के ऊपर से ही उसकी योनी पर रख दिया. वो जोर से सिसक पड़ी.
मैंने उसकी नाइटी का कोना पकड़ा और ऊपर कर दिया. रसीली योनी अब मेरे मुंह के सामने थी. मैंने अपना मुंह उसमे घुसा दिया.
वो एकदम पगला सी गई और उसके दोनों हाथ सहज ही मेरे सर पर आ गए. मैं उसकी योनी में घुसता चला गया.
मैं यद्यपि माँसाहारी नहीं हूं फिर भी इन मुलायम मांस की बोटियों से कोई भी परहेज़ नहीं.
हर लटकन को होंठों में दबा दबा कर चूसने लगा. उसके दोनों बाहरी होंठ, फिर अंदरूनी कोमल होंठ और उसका दाना ..........सब को कस कस के चूसने लगा.
फिर जीभ से उसका दाना कुरेदने लगा............
कुछ देर सहन करने के बाद अचानक वो चीखी........’नो ओओओओओओओओ’, .......
और फिर उसने मेरा सर पकड़ा और मुझे खीच कर ऊपर उठा लिया.
जैसे ही मुंह उसके मुंह पर आया मैंने दोनों हाथों से उसका चेहरा थामा और मुंह में मुंह घुसेड दिया.
उसके रसभरे गुदगुदे होंठों पर टूट पड़ा और जबरदस्त चुसाई शुरू कर दी.
मेरे होंठों पर लगी उसके यौवन की निशानी को उसके मुंह में ट्रांसफर करता चला गया.
वो भी बहुत गरम हो चुकी थी लिहाजा वो भी मेरे मुंह में अंदर तक अपनी जीभ घुसा रही थी.
इधर चुसाई चल रही थी और उधर दोनों के हाथ एक दूसरे के बदन का जायजा लेने लगे
अब कपड़े अड़चन महसूस होने लगे थे. तो उसने मेरे बाथ गाउन की नॉट खोली और उसे खोल कर मुझे पूरा नंगा कर दिया.
मैंने भी उसी चुम्बन-रत अवस्था में ही उसकी नाइटी को उसके बोबों पर से खींच कर नीचे सरका दिया.
उसके ढाई ढाई किलो के मम्मे मेरे सीने पर आ लगे और मैंने उसे कस के बाँहों में जकड़ लिया.
वो भी मुझे भींचने लगी. दोनों की गर्मी इतनी बढ़ने लगी के लगा दोनों एक दूसरे में समां जायेंगे.
चुम्बन क्रिया अभी भी जारी थी. वो अपने तरबूजों को मेरे सीने पे रगड़ने लगी.
उसकी चुन्ची जब भी मेरी चुन्ची को रगडती एक करंट सा दौड़ रहा था जो मेरे पप्पू को बहुत विचलित करने लगा था.
वो भनभना कर उसकी योनी पर सट गया और वहाँ फडकने लगा. थोड़ा नीचे होकर उसके दाने को पीसने लगा.
उसने मेरा मुंह पकड़ा और होंठों को आज़ाद करते हुए उसे अपनी छाती में घुसा दिया.
एकबारगी तो बब्बू की इतनी मोटाई पर मेरा मुंह उलझ कर रह गया.
पगला कर यहाँ वहाँ चूमने लगा पर नुक्के नहीं मिल पा रहे थे.
कभी एक पर्वत पर तो कभी उस पर, होंठों और जीभ से चुसाई और चटाई जारी थी, पर चुच्ची कहाँ गई.
और अचानक मुंह एक बड़ी मोटी और बोठी कील से टकराया. अरे ....इतनी बड़ी और कड़क चुन्ची....
और अगले ही पल वो मेरे मुंह में गुम हो गई. मैं जोर जोर से चूसने लगा.
फिर दूसरे पर्वत पर आकार वहाँ भी दूसरे नुक्के को फतह किया. दूध निकालने का पूरा प्रयास...इतनी कस के चुसाई हो रही थी.
अचानक उसने मुझे अलग किया और बैठ गई और मेरे हष्ट-पुष्ट पप्पू को हाथों में थाम कर उसके मुंह के हवाले कर दिया और चूसने लगी.
वो अपने हाथ भी साथ ही साथ चला रही थी पप्पू पर. पप्पू इस दोहरे हमले से पूरे फार्म में आ गया और पूरा तन्ना गया.
वो पप्पू को पूरा अपने में समां लेने का प्रयास कर तो रही थी पर संभव नहीं हो पा रहा था लिहाज़ा वो सुपाड़े पर कस के चूसने लगी...........
मुट्ठी से मुठियाते हुए सुपाड़े पर तेज़ मुलायम घिसाई..........वाकई कमाल का फीलिंग आ रही थी.
मैंने उसके चेहरे को पकड़ लिया और कस के मुख-मैथुन करने लगा.
इस प्रयास में एक बार पप्पू उसके गले तक पहुँच गया और वो झटके से अलग हो गई. उसे उबकाई सी आ गई थी. वो उठ खड़ी हुई.....
मैंने उसे सॉरी बोला तो वो मुझ से डाली की तरह चिपक गई. मेरा पप्पू एक बार फिर उसकी योनी पर जा लगा.
योनी से झरती रस की बूंदों के बीच, पप्पू पूरा गीला हो चूका था.
मैंने हिलना चालू कर दिया. पप्पू उसकी योनी पर ऊपर से नीचे तक घूमने लगा.
ऐसे ही रगड़ते रगड़ते पप्पू उस चिकनाई में फिसला और उसके छेद में एक इंच घुस गया.
वो पगला तो रही ही थी, उसने आव देखा ना ताव, मेरी हिप को पकड़ा और चूतड़ को धक्का मारा.
मेरा आधा पप्पू एक ही झटके में उसके अंदर.
मैंने उसकी जांघों को पीछे से पकड़ कर उसे अपने ऊपर चड़ा लिया.
उसने दोनों पैर मेरी कमर पे लपेटे और नीचे की जोर लगाया.
मेरा पप्पू पूरा अंदर सरक गया. थोड़ा हिल्हिला कर हम दोनों ने पप्पू को योनी में एकदम अडजस्ट कर लिया.
उसने गाल पर प्यारा सा चुम्मा देते हुए कहा..........’बहुत अच्छी किस्मत है जिसने हमें मिलाया है आज. देखते जाओ, तुम्हे जरा सी भी शिकायत नहीं रह जायेगी.
‘हाँ लग तो कुछ ऐसा ही रहा है’.........और हम दोनों हंस दिए.
‘आयशा, सबसे पहले मैं तुम्हे अच्छे से फील करना चाहता हूँ. मेरी मन की आँखे हाथों के माध्यम से तुम्हे देखेगी.’...........मैंने सुझाव दिया.
‘वॉव, सुभानअल्लाह..........तो फिर देर किस बात की है’........वो चहकते हुए बोली.
मैंने अपने हाथ उसके सर पर रख दिए और उसकी जुल्फों से खेलने लगा.
धीरे धीरे उसके पीठ तक फैले खुले बालों में हाथ फिराता रहा. इन खुली हुई घनी रेशमी जुल्फों में क्या सेक्सी लगती होगी.
अब पीठ से सारे बाल आगे कर दिए और उन्हें हाथों में भर उसमे मुंह घुसा कर लंबी सांस खींची.
मदमस्त खुशबू से मेरा मन अंगडाईयाँ लेने लगा.
फिर दोनों हाथों को कन्धों से होते हुए उसकी पीठ पर ले गया और उन्हें सहलाने लगा.
उसने अपने दोनों हाथ मेरे कन्धों पर रख दिए. मेरा गाल उसके गाल से टच हो रहा था.
अब मैं धीरे धीरे उसकी पूरी पीठ पर हाथ फिराने लगा या यूँ कहो कि मालिश ही करने लगा था.
उसकी सिल्की नाईटी के ऊपर से उसका बदन भी रेशमी महसूस हो रहा था.
मैंने उसको थोड़ा अपनी ओर खींचा तो हम दोनों के मुंह एक दूसरों के कन्धों पर टिक गए. उसने भी अपने हाथ मेरी गर्दन में लपेट दिए.
अब हौले से उसके उभार मुझे अपनी छाती पर महसूस होने लगे थे. मैं अपने कान से उसके नाजुक कान को छेड़ने लगा.
पूरी पीठ को अच्छे से सहलाने पर मुझे आभास हुआ कि उसका बदन भरा हुआ किन्तु ठोस है.
तो उसकी लेने में मुझे बहुत मज़ा आने वाला है. वो भी धीरे धीरे मेरी पीठ सहलाने लगी.
अब मैंने उसको पलटाया और उसके पीछे से सट गया. उसकी पीठ मेरे पेट एवं छाती से चिपक गई.
मेरा पप्पू उसकी कमर में मेरे टेरी-टॉवेल के गाउन की मोटी दीवार होने के बावजूद उसके पुट्ठों पर गड़ने लगा था.
उसने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. मेरी नाक उसकी घनी खुशबूदार जुल्फों से महक उठी.
अब मैंने अपनी हथेलियों को उसके फोरहेड पर रख कर उन्हें सहलाना चालू किया.
वहाँ से पलक पर, फिर मूंदी आँखों पर, फिर नाक पर और फिर दोनों गालों पर इस तरह से सहलाने लगा जैसे उसका फेशियल कर रहा हूँ.
उसका चेहरा बेदाग़ और चिकना था. उसके भरे हुए स्पोंजी गालों को मैंने ललचा कर एकबारगी खींच ही लिया.
उसके मुंह से जोर का आउउच निकला और उसने मेरा हाथ पकड लिया. मैंने हँस कर उसे सॉरी बोला.
अब उसकी चिन से होते हुए मेरी उँगलियाँ उसके नाजुक मांसल होंठो पर पहुंची.
अपनी उँगलियों के पोरों से उसके बंद होंठो को सहलाने लगा.
इधर मैं अपने होंठ उसके कान पर ले आया और गर्म सांसो को उनमे भरने लगा.
वो रह रह कर अपना कान मेरी नाक पर रगड़ने लगी.
अब उसके कान से होते हुए मैं उसके गाल पर आया और उसको पप्पी देने लगा.....
लगातार......कोई १५-२०......फिर मैंने उसके गाल को अपने मुंह में भर कर उसे गीला कर दिया.
उधर मैं अब अपनी उँगलियों से उसके होंठों को रगड़ कर मसलने लगा.
कभी ऊपर का होंठ तो कभी नीचे का होंठ. क्या गुदाज और मांसल होंठ थे.
तभी उसने अपनी जीभ बाहर निकाली और मेरी उँगलियाँ चाटने लगी.
उसकी नाज़ुक और मुलायम जीभ की मेरी उँगलियों पर हरकत से मेरे अंदर एकाएक हरकत हुई और मैं उसके कान में घुस गया और उसके इयर-लोब को चूसने लगा.
सनसनाहट के अतिरेक से वो अपना कान लगातार मेरे मुंह पर घिसने लगी.
उसकी जीभ और मेरी उँगलियों के द्वंद के बीच मैंने अपनी सारी उँगलियाँ उसके मुंह में घुसा दी.
मैं उँगलियों को उसके मुंह के हर हिस्से में घुमा रहा था.....जीभ पर, दांतो पर और अंदरूनी गालों में.
अब फिर मैंने उन्हें अंदर बाहर करने लगा और वो भी उन्हें मज़े से चूसने लगी.
मेरी सारी उँगलियाँ उसके थूक से सन चुकी थी और थोड़ा सा बह कर मेरे हाथ पर भी रिसने लगा था.
तभी मैंने अपने मुंह पर उसके हाथ को थिरकते पाया.
मैंने भी उसकी उँगलियों को अपने मुंह में लिया और चूसने लगा. चूसने चूसते उसका पूरा हाथ ही थूक से लथेड़ दिया.
अब मैंने अपना हाथ उसके मुंह से बाहर निकला और उसके हिप पर ले गया.
उसकी नाइटी को पकड़ कर अब उससेअपना हाथ साफ किया. इस दौरान उसकी हिप पर एक चिकोटी भी काट ली जिससे वो चिहुंक उठी.
मैंने सॉरी बोला और उसके गाल की एक जोरदार गीली और मीठी सी पप्पी ली.
अब मैं अपने हाथ फिर उसके मुंह पर ले आया और अब पूरे मुंह को सहला-सहला कर स्केन करने लगा.
मैं अपने मन में उसके चेहरे की तस्वीर बना रहा था.
दिलो-दिमाग पर आयशा ऐसे हावी थी कि बस उसी की ही इमेज बन रही थी.
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अब मैंने उसकी नाइटी की ज़िप पीछे से थोड़ी खोली और नाइटी से उसके दोनों हाथ निकाल दिए और उसके दोनों कंधे नंगे कर दिए.
अब दोनों हाथों के उसके गले पर फिराने लगा.
वहाँ से दोनों कंधो पर आया और अपना मुंह वहाँ रख कर चूमने लगा.
चूमते चूमते उसकी गर्दन पर आया और फिर नंगी पीठ पर.
वहाँ से दूसरे कंधे पर. इतने प्यार से चूम रहा था कि वो सिसकने लगी.
फिर उसकी एक बांह ऊपर की और उसके आर्म-पिट में अपना मुंह घुसा दिया.
उसके बदन की खुशबू, डियो की स्मेल के साथ मिक्स होकर मुझे मदहोश करने लगी.
मैं उसके चिकनी बगल को चाटने लगा.
फिर दूसरी बगल में घुस कर उसे भी चाट चाट कर गीला कर दिया. वो बहुत ऊंह-आह करने लगी.
अब उसने दोनों हाथ ऊपर किये और मोड़ कर मेरे सर के पीछे टिका दिए.
मैंने अपने दोनों हाथ नीचे किये और उन्हें उसके पेट पर नाइटी के ऊपर से फिराने लगा. क्या मुलायम और पतला पेट था.
कुछ देर अछे से सहलाने के बाद अब बारी थी उसके सबसे खास अंग को फतह करने की.
पता नहीं इतनी स्लिम है, उसके बूब्स भी कहीं एकदम छोटे हुए तो......
अब जो भी हो कुचलना तो है ही उन्हें.
मेरे हाथ उसके सीने के उपरी भाग पर काबिज हुए और वहाँ से मसलते मसलते नीचे की ओर बढने लगे.
नीचे का बदन नाइटी में ढंका हुआ था. हाथ वहाँ पहुंचे जहाँ से पहाड के चढाई शुरू होती है.
मन में यही आ रहा था कि एकदम छोटे छोटे टप्पू निकलेंगे. और जैसे ही अपने कांपते हाथ नीचे को सरकाए एकदम खड़ी चढाई महसूस हुई.
हाथ सरकते चले गए और चढाई भी बढती चली गई. मैं आश्चर्यचकित.
और जब हाथ चोटी पर पहुंचा तो लगा कि मैं तो कंचनजंगा की गगनचुम्बी ऊंचाई पर आ गया हूं.
फिर हाथों को चारो ओर घुमा कर उसके ढलानों की वक्रियता को नापने लगा.
ये तो दो बड़े बड़े टापू थे. मैंने अपने दोनों हथेलियों में उन्हें भरना चाहा तो हाथ में ही नहीं आये. ये तो बहुत बड़े माउन्ड्स हैं.
उन्हें दबाया तो एकदम कड़क लगे. फिर तो उन पहाड़ों को बुरी तरह खंगालने लगा.
फिर मैंने उन दोनों तरबूजों के साथ वो सब किया जो जो संभव था मसलन-
pressing, pumping, fondling, squeezing, pinching, twisting, rubbing, massaging, patting, crushing.......
stroking, taping, thumping, mashing, draining, grasping, compressing, wringing, mangling, pounding, mauling………
और एक शब्द में कहें तो ...’molesting’. ............ बाईस तरह से प्यार किया.
चूंचियों के मर्दन पर तो वो कांपने लगी और मेरे गाल पर चुम्मियों की बौछार कर दी.
फिर जब उसकी सहनशक्ति जवाब दे गई तो उसने मेरे दोनों हाथ थामे और पहाड़ के ढलान से फिसलती हुई एकबार फिर पेट की तराई के ओर ले चली.
तो इस तरह काश्मीर से शुरू हुआ सफर दक्षिणी महाराष्ट्र तक आ पहुंचा था. अब बारी थी साउथ इंडिया के सैर की.
अब वो मेरी ओर घूम गई. उसकी खुशबूदार सांसे मेरे नथुनों में ताजगी पैदा करने लगी.
मेरे होंठ मदहोश से उसके होंठो से जा लगे और जैसे ही उन्हें चूसता उससे पहले ही वो बोली.....’ये अभी नहीं.’
और फिर मेरे कन्धों को दबाते हुए नीचे बैठने का इशारा किया. मैं सरकता हुआ नीचे बैठ गया.
उसकी नाइटी एकदम माइक्रो थी, जरा सी जांघे ही ढंक पा रही थी.
मैं उसकी चिकनी जांघों पर अपने हाथ फिराने लगा. दोनों जांघों को सहलाने के बाद उन्हें बेतहाशा चूमने लगा.
दोनों हाथों से उसके पुट्ठे पकड़ कर उन्हें दबाने लगा. फिर हाथ थोड़े से नीचे सरकाकर नाइटी के अंदर ले जाते हुए उसके नंगे पुट्ठों को भींचने लगा.
उसकी योनी से ताज़े रस-फुहार की खुशबू आने लगी थी जो मुझे बहुत पागल बना रही थी.
मैंने अपना मुंह नाइटी के ऊपर से ही उसकी योनी पर रख दिया. वो जोर से सिसक पड़ी.
मैंने उसकी नाइटी का कोना पकड़ा और ऊपर कर दिया. रसीली योनी अब मेरे मुंह के सामने थी. मैंने अपना मुंह उसमे घुसा दिया.
वो एकदम पगला सी गई और उसके दोनों हाथ सहज ही मेरे सर पर आ गए. मैं उसकी योनी में घुसता चला गया.
मैं यद्यपि माँसाहारी नहीं हूं फिर भी इन मुलायम मांस की बोटियों से कोई भी परहेज़ नहीं.
हर लटकन को होंठों में दबा दबा कर चूसने लगा. उसके दोनों बाहरी होंठ, फिर अंदरूनी कोमल होंठ और उसका दाना ..........सब को कस कस के चूसने लगा.
फिर जीभ से उसका दाना कुरेदने लगा............
कुछ देर सहन करने के बाद अचानक वो चीखी........’नो ओओओओओओओओ’, .......
और फिर उसने मेरा सर पकड़ा और मुझे खीच कर ऊपर उठा लिया.
जैसे ही मुंह उसके मुंह पर आया मैंने दोनों हाथों से उसका चेहरा थामा और मुंह में मुंह घुसेड दिया.
उसके रसभरे गुदगुदे होंठों पर टूट पड़ा और जबरदस्त चुसाई शुरू कर दी.
मेरे होंठों पर लगी उसके यौवन की निशानी को उसके मुंह में ट्रांसफर करता चला गया.
वो भी बहुत गरम हो चुकी थी लिहाजा वो भी मेरे मुंह में अंदर तक अपनी जीभ घुसा रही थी.
इधर चुसाई चल रही थी और उधर दोनों के हाथ एक दूसरे के बदन का जायजा लेने लगे
अब कपड़े अड़चन महसूस होने लगे थे. तो उसने मेरे बाथ गाउन की नॉट खोली और उसे खोल कर मुझे पूरा नंगा कर दिया.
मैंने भी उसी चुम्बन-रत अवस्था में ही उसकी नाइटी को उसके बोबों पर से खींच कर नीचे सरका दिया.
उसके ढाई ढाई किलो के मम्मे मेरे सीने पर आ लगे और मैंने उसे कस के बाँहों में जकड़ लिया.
वो भी मुझे भींचने लगी. दोनों की गर्मी इतनी बढ़ने लगी के लगा दोनों एक दूसरे में समां जायेंगे.
चुम्बन क्रिया अभी भी जारी थी. वो अपने तरबूजों को मेरे सीने पे रगड़ने लगी.
उसकी चुन्ची जब भी मेरी चुन्ची को रगडती एक करंट सा दौड़ रहा था जो मेरे पप्पू को बहुत विचलित करने लगा था.
वो भनभना कर उसकी योनी पर सट गया और वहाँ फडकने लगा. थोड़ा नीचे होकर उसके दाने को पीसने लगा.
उसने मेरा मुंह पकड़ा और होंठों को आज़ाद करते हुए उसे अपनी छाती में घुसा दिया.
एकबारगी तो बब्बू की इतनी मोटाई पर मेरा मुंह उलझ कर रह गया.
पगला कर यहाँ वहाँ चूमने लगा पर नुक्के नहीं मिल पा रहे थे.
कभी एक पर्वत पर तो कभी उस पर, होंठों और जीभ से चुसाई और चटाई जारी थी, पर चुच्ची कहाँ गई.
और अचानक मुंह एक बड़ी मोटी और बोठी कील से टकराया. अरे ....इतनी बड़ी और कड़क चुन्ची....
और अगले ही पल वो मेरे मुंह में गुम हो गई. मैं जोर जोर से चूसने लगा.
फिर दूसरे पर्वत पर आकार वहाँ भी दूसरे नुक्के को फतह किया. दूध निकालने का पूरा प्रयास...इतनी कस के चुसाई हो रही थी.
अचानक उसने मुझे अलग किया और बैठ गई और मेरे हष्ट-पुष्ट पप्पू को हाथों में थाम कर उसके मुंह के हवाले कर दिया और चूसने लगी.
वो अपने हाथ भी साथ ही साथ चला रही थी पप्पू पर. पप्पू इस दोहरे हमले से पूरे फार्म में आ गया और पूरा तन्ना गया.
वो पप्पू को पूरा अपने में समां लेने का प्रयास कर तो रही थी पर संभव नहीं हो पा रहा था लिहाज़ा वो सुपाड़े पर कस के चूसने लगी...........
मुट्ठी से मुठियाते हुए सुपाड़े पर तेज़ मुलायम घिसाई..........वाकई कमाल का फीलिंग आ रही थी.
मैंने उसके चेहरे को पकड़ लिया और कस के मुख-मैथुन करने लगा.
इस प्रयास में एक बार पप्पू उसके गले तक पहुँच गया और वो झटके से अलग हो गई. उसे उबकाई सी आ गई थी. वो उठ खड़ी हुई.....
मैंने उसे सॉरी बोला तो वो मुझ से डाली की तरह चिपक गई. मेरा पप्पू एक बार फिर उसकी योनी पर जा लगा.
योनी से झरती रस की बूंदों के बीच, पप्पू पूरा गीला हो चूका था.
मैंने हिलना चालू कर दिया. पप्पू उसकी योनी पर ऊपर से नीचे तक घूमने लगा.
ऐसे ही रगड़ते रगड़ते पप्पू उस चिकनाई में फिसला और उसके छेद में एक इंच घुस गया.
वो पगला तो रही ही थी, उसने आव देखा ना ताव, मेरी हिप को पकड़ा और चूतड़ को धक्का मारा.
मेरा आधा पप्पू एक ही झटके में उसके अंदर.
मैंने उसकी जांघों को पीछे से पकड़ कर उसे अपने ऊपर चड़ा लिया.
उसने दोनों पैर मेरी कमर पे लपेटे और नीचे की जोर लगाया.
मेरा पप्पू पूरा अंदर सरक गया. थोड़ा हिल्हिला कर हम दोनों ने पप्पू को योनी में एकदम अडजस्ट कर लिया.
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