Tuesday, 24 February 2015

प्यार 3

जेसे ही दीदी नहा के बहार निकली मै जल्दी से बाथरूम मे घुस गया मैंने दीदी के टॉवल के नीचे देखा दीदी के उतरे हुए ब्रा और पेंटी लटके हुए थे मैंने दीदी की ब्रा को अपने हाथ मे लिया और उसे सूंघने लगा दीदी की ब्रा के कप्स को सहलाने लगा दीदी की ब्रा मे से इतनी प्यारी और मादक खुशबू आ रही थी की सूंघते ही मेरा लंड इतना टाइट हो गया जितना पहले कभी नहीं हुआ था फिर मैंने दीदी पेंटी ली और उसे सूंघा और उसे सूंघ कर कसम से दोस्तों मेरी हालत ही ख़राब हो गए दीदी की पेंटी मे से उनकी चूत के थोड़े डिस्चार्ज थोड़े पसीने की खुसबू थी उनकी पेंटी को मैंने अपने पूरे मुह पे फेरा उसे चाटा उसमे से नमकीन स्वाद आया लेकिन जो भी था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने अपनी दीदी की पेंटी को अपने मुह पे और उनकी ब्रा को अपने लंड पे लपेट कर अपने लंड को हिलाने लगा मै पूरी तरह से दूसरी ही दुनिया मे था आँखें बंद करके दीदी की पेंटी को सूंघते हुए उनकी ब्रा अपने लंड पे सहलाते हुए हिलाने मे मुझे इतना मजा आ रहा था ये सोच रहा था की दीदी नंगी होके अपने हाथ से मेरा लंड हिला रही है और इतने मे मै झर गया और मेने अपने लंड का सारा मुट दीदी के ब्रा पे निकाल दिया इतना अच्छा मुझे कभी नहीं लगा था मेने फिर उनकी ब्रा को साफ़ करके वापस वही लटका दी और बाहर आ गया। दीदी ने नहा के 1 लॉन्ग कुरता और लेगिस पेहेन ली थी वो बाहर अपने गीले बालो को सूखा रही थी और मै साइड मे खड़ा 2 कुर्ते मे से दीदी के बोबे देख रहा था कितने मोटे और बाहर कि तरफ निकले हुए थे जेसे ही वो अपने बालो को झडकती उनके बोबे ऊपर नीचे हिलते उन्हें देखते 2 मै ये सोच रहा था की नहा के दीदी ने कौनसे कलर की ब्रा और पेंटी पहनी होगी मै कब अपनी दीदी को पूरी नंगी देखूंगा केसे उनको नंगी देखु और तभी दीदी ने पुछा "क्या देख रहा हे सोनू "मैंने मन मे सोचा दीदी आप नंगी केसी दिखोगी और आपको नंगी केसे देखू ये सोच रहा हु
उस दिन शाम को दीदी लैपटॉप लेके बैठी थी जब मै अपने फ्रेंड के घर से आया तो मैंने दीदी से पूछा की "दीदी क्या कर रही हो नेट पे " जेसे ही मैं पास गया दीदी जोर से चिल्लाई "मम्मी इस सोनू को बुलाओ ना ये मुझे काम नहीं करने दे रहा" मम्मी ने मुझे डांट के बुला लिया लेकिन मैंने सोचा की मैंने क्या किया मैं तो बस पूछ रहा था फिर मुझे समझ आया की दीदी शायद अपने bf से चैट कर रही होगी इसलिए उन्हें मुझसे प्रॉब्लम हो रही थी मै चुपके से उन्हें छुप के देखने लगा की वो कर क्या रही है जहाँ मैं छुपा हुआ था वह से दीदी की पीठ मुझे दिख रही थी कभी दीदी जोर से हंसती कभी गुस्सा होने का नाटक करती इस से मुझे पक्का यकीन हो गया की वो नेट पे चैट कर रही है अपने bf से दीदी की पीठ मेरी तरफ थी इसलिए मुझे दिखा नहीं की वो किस से और किस साईट पे चैटिंग कर रही है और तभी वो हुआ जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी दीदी ने इधर उधर देखा की कोई है तो नहीं और अपना कुरता ऊपर कर दिया मुझे पीछे से दीदी की नंगी पीठ और उनकी वाइट ब्रा स्ट्रैप्स और ब्रा का हुक दिखाई दिया मैं शोक्केड़ रह गया और अब मुझे पता चल चुका था की दीदी अपने bf से विडियो चैट कर रही है और अपने bf को अपना कुरता ऊपर करके अपनी ब्रा दिखा रही है शायद वो कह रहा होगा की कुछ दिखाओ फिर दीदी ने वापस इधर उधर देखा मझे पता था की मुझे अब कुछ और भी दिखने वाला है तभी दीदी ने इधर उधर देखा खड़ी हुई और अपनी लग्गिएस अपने घुटनों तक नीचे कर दी मुझे पीछे से उनकी वाइट पेंटी मे क़ैद बड़ी और मोटी गोरी गांड दिखी मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया और मै हिलाने लगा अपने लंड को दीदी की पेंटी और गांड देखते 2 मझे ये भी लग रहा था की साला वो लड़का तो मेरी दीदी का सारा माल सामने से देख रहा होगा उनकी ब्रा मे क़ैद उनके मोटे और टाइट बोबे उनके पेंटी मे छुपी हुई उनकी कोमल चूत ये सोच सोच के मैं झर गया

और अब दीदी ने भी चैटिंग बंद कर दी थी मैं वही छुपा रहा दीदी जब बाहर गयी और मम्मी से बातें करने लगी तब मैंने लैपटॉप मे browsing history चेक की उसमे लास्ट साईट FB थी मुझे पता था की दीदी FB पे अपने BF से video चैट कर रही थी और उसे सब दिखा रही थी अब मैंने सोचा की यार अगर दीदी का पासवर्ड मुझे मिल जाए तो मुझे उनकी chats भी पड़ने को मिल सकती है की दीदी आखिर क्या बातें करती है इतने मे पापा आ गए और हम सब खाना खाने लगे खाना खाते 2 मै बस यही सोच रहा था की अब दीदी सोने के लिए अपने कपडे चेंज करेंगी और गाउन पहनेगी मैंने सोच लिया था की कोशिश करूँगा दीदी को नंगी देखने की वो बाथरूम मैं गई और मैं नीचे बाथरूम के दरवाजे और फर्श के गैप मे से अंदर झाँकने लगा दीदी की पहले लेग्गिस नीचे गिरी फिर उनका कुरता और तभी दीदी 1 दम से बाथरूम के दरवाजे की तरफ जल्दी से चलती हुई आयी मेरी गांड फट गयी की कही दीदी ने मुझे देख तो नहीं लिया मैं बेड के नीचे चुप गया और दीदी ने मम्मी को आवाज लगाई "मम्मी मेरा गाउन देना अलमारी मे से " मम्मी ने कहा हां देती हु मैं बेड के नीचे ही छुपा हुआ था

जब मम्मी ने दीदी को गाउन दिया तो मम्मी ने दीदी से पूछा " प्रीती तेरे पास पैड का एक्स्ट्रा पैकेट पड़ा है क्या " ये सुन के मेरे लंड मे अंगडाई आने लगी मैंने सोचा की मेरे मम्मी या तो पीरियड्स मे है या होने वाली हे दीदी ने कहा "नहीं मम्मी मेरी डेट तो अभी 10 दिन बाद है आपको जरुरत है क्या " मम्मी ने कहा "हाँ मैं हो गई हू मुझे लगा मेरे पास पैड का पैकेट रखा है तू चेक करना मैंने तुझे 2 पैकेट दिए थे पिछले महीने 1 whisper choice का था और 1 stayfree का था जिसमे 5 पैड्स बचे हुए थे " ये सब सुनके मेरा लंड टाइट खड़ा था और मैं उसे सहला रहा था मैंने कभी नहीं सोचा था की मेरे साथ एसा होगा तभी दीदी ने कहा "हा मम्मी शायद stayfree होगा रुको मैं देखती हु" और दीदी ब्रा पेंटी पहने हुए ही बाथरूम सी बहार निकले उन्हें क्या पता था की बेड के नीचे छुपा हुआ मै ये बातें भी सुन रहा हु और आखिर मे किस्मत ने मेरा साथ दे ही दिया और मैंने अपने बेहेन को ब्रा और पेंटी मै देख ही लिया दीदी ने वाइट ब्रा और वाइट low waist पेंटी पहनी हुई थी क्या सेक्सी लग रही थी उनकी ब्रा तो इतनी टाइट थी की लग रहा था की उनके मोटे बोबे ब्रा फाड़ के बाहर आ जाएँगे उनकी नंगी गोरी चिकनी टाँगे देख के मेरी तो हालत ख़राब हो गई और उनकी क्या गांड थी मोटी चिकनी गोरी गांड देख के मेरी आँखें फटी रह गयी अपनी दीदी को ब्रा पेंटी मे देखते हुए मैंने वापस मुट मारा और जब मेरा मुट निकला तो इतना सारा निकला और मुझे इतना आंनंद प्राप्त हुआ की मैं उसे बयां नहीं कर सकता मुट मारने के बाद भी मेरा लंड बिलकुल टाइट खड़ा हुआ था और मैंने दीदी को ब्रा पेंटी मे देखा और सोचा की आज रात को तो इनके कोमल बदन को छुना ह़ी है
स दिन रात को मेरे दिमाग मे बस यही चल रहा था की दीदी के नाजुक कोमल बदन को केसे छुआ जाये मैं बस रात को odd टाइम का वेट करने लगा उस समय रात के 2 बजे थे गर्मियों के दिन थे दीदी बस चद्दर मे सो रही थी मैं धीरे से उठा और उनके बेड की तरफ गया दीदी आराम से सो रही थी मैंने चद्दर हटाया धीरे 2 , दीदी करवट लेके 1 के ऊपर 1 अपनी 1 टांग रख के सो रही थी जिस से उनकी मोटी गांड बाहर की तरफ निकली हुई थी मैंने धीरे से गाउन पे से दीदी की गांड पे हल्का सा किस किया फिर दीदी का फेस देखा वो आराम से सो रही थी फिर मैंने धीरे 2 उनका गाउन ऊपर किया मुझे उनकी टांगें दिखी मैंने हलके से अपनी उंगलियों का स्पर्श किया कितनी चिकनी टांगें थी दीदी की फिर मैंने धीरे से उनके हाथो को टच किया फिर मैंने उनके गाउन को थोडा और ऊपर किया और उनकी thigs देखी मैंने उनकी thigs पे धीरे से और ध्यान से किस किया फिर मै घूम के उनके बेड के सामने की तरफ गया और दीदी के होठो को टच किया फिर मैंने ध्यान से धीरे 2 अपनी उंगलिया उनके बोबो की तरफ बड़ाई और उन्हें बहुत ध्यान से हलके से छुहा मेरा लंड बिलकुल टाइट था 1 तरफ तो ये डर की दीदी जग ना जाए मुझे पकड़ न ले तो दिल कह रहा था की बस अब आगे कुछ मत कर लेकिन लंड दिमाग पे हावी हो चूका था दिमाग ने कहा अभी तक कुछ नहीं हुआ तो कुछ नहीं होगा और मैंने वापस दीदी के बोबो को हलके से टच किया कितने नरम बोबे थे मेरी बेहेन के टाइट और कोमल मैंने 1 बोबे को छुआ और हलके से दबाया इतने मे दीदी ने करवट ले ली मेरे गांड फटी और मई भाग के अपने बेड पे लेट गया उस समय रात के 3:15 हो रहे थे मै वापस उठा और दीदी का गाउन वापस ऊपर किया दीदी का कोई रिएक्शन नहीं था फिर मैंने धीरे से दीदी का गाउन उनकी हिप्स तक ऊपर किया और मुझे उनकी वाइट पेंटी नजर आयी

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने दीदी की पेंटी पे से उनकी गांड को हलके से टच किया फिर उनकी पेंटी को सुंघा फिर उनकी गांड पे किस किया मै 1 हाथ से अपने लंड को सहला रहा था और दुसरे हाथ से अपनी दीदी की गांड को छु रहा था अब मेरे इच्छा दीदी की पूरी पेंटी और उनकी चूत देखने की हुई मैंने उनका गाउन थोडा और ऊपर कर दिया और इतने मै दीदी ने अपने हाथ से अपना गाउन नीचे किया और उठ गयी मै जल्दी से उनके बेड के नीचे बैठ कर tommy (हमारे पेट से बातें करने लगा ) दीदी ने मुझे घूर के देखा और कहा " क्या कर रहा है तू सोनू " मैंने कहा दीदी पता नहीं टॉमी आपके बेड के नीचे बैठा है और हलके से रो रहा ह क्या हुआ इसको खाना नहीं दिया क्या आज दीदी ने उसे देखा फिर मुझे देखा पंखा भी तेज चल रहा था और कूलर भी तो शायद दीदी को लगा की हवा से उनका गाउन ऊपर हो गया था मेरी तो गांड फट के गले मे आ गए दीदी ने कहा "तू सोजा मै देखती हु टॉमी को " मै चुपचाप अपने बेड की तरफ गया और लेट गया और शुक्र मनाने लगी की दीदी को शक नहीं हुआ फिर मैंने आगे कुछ करने का नहीं सोचा और सो गया सुबह उठा तो दीदी मुझसे पहले उठ चुकी थी और नहा कर तैयार हो चुकी थी उनकी फ्रेंड का अज बर्थडे था तो वो वहा जा रही थी जेसे ही मेने दीदी को देखा तो देखता रह गया उन्होंने सूट पेहेन रखा था रेड और वाइट कलर का पतला सा कुरता रेड सलवार और रेड चुन्नी

उस कुर्ते मे से दीदी के मोटे बोबे इतने बाहर आ रहे थे की मेरा दिमाग ख़राब हो गया दीदी ने शायद कुर्ते के नीचे आज शमीज नहीं पहनी थी तो उनकी वाइट ब्रा मुझे साफ़ 2 दिख रही थी मैंने सोचा की 1 पानी बाल्टी लाके दीदी के कुर्ते प डाल दू तो अंदर का सारा माल बाहर दिख जाएगा फिर मैंने दीदी की सलवार की तरफ देखा उनकी सलवार का कपडा इतना पतला था की कुर्ते के साइड के कट मे से उनकी गोरी मोटी thigs आराम से दिख रही थी मैंने सोचा की आज तो अपनी दीदी को नंगी देख कर ही रहूँगा इतनी सेक्सी परी तो मैंने आज तक नहीं देखी दीदी को ये कपडे उतारते हुए तो जरुर देखूंगा मैंने मम्मी से पुछा की दीदी वापस कब आएगी मुम्मी ने कहा शाम तक आएगी मुझे पता था की दीदी अपने कपडे तो चेंज बाथरूम मे ही करेगी तो मैंने 1 तीखा pechkus (पेचकस ) लिया और दीदी के बाथरूम के दरवाजे मे छेद करने लगा और छेद कर दिया इतना की किसी को नजर भी न आए और मुझे बाथरूम के अंदर का सब दिख जाए और उस छेद के अंदर मैंने पेपर टुकड़ा डाल दिया ताकि कमरे की लाइट से किसी को पता नहीं चल जाए की बाथरूम दरवाजे मे छेद हे जब दीदी अपने बाथरूम मे अपने कपडे चेंज करेंगी तो मै उस छेद मैं पेचकस से धक्का देके के उस पेपर के टुकड़े को हटा दूंगा और दीदी को कपडे उतारते हुए और उनके इतने प्यारे और मोटे बोबे उनकी चिकनी चूत मोटी गोरी गांड सब देखूंगा बिलकुल नंगी देखूंगा सब आज जिनके वजह से मैं अभी तक इतना तदपा था , लेकिन आज मैं अपनी दीदी को नंगी देखने वाला था उस दिन मैं दीदी के आने का वेट करने लगा तभी मैंने सोचा की दीदी की चैटिंग को भी पकड़ा जाए शाम होने मैं अभी 2 घंटे बाकी थे मैं उस जगह पर पहुंचा जहाँ बैठ कर दीदी लैपटॉप पे चैट करती थी मैंने इधर उधर देखा उसी जगह के ऊपर 1 तिखाल थी जहा पर कुछ सामान रखा हुआ था मैंने उसकी हाइट चेक की उस तिखाल से नीचे की एक्टिविटी साफ़ 2 नजर आ रहे थे मैंने प्लान बनाया की उस तिखाल पर छुपा कर 1 कैमरा रखा जाये विडियो मोड पे जिस से जब दीदी अपना पासवर्ड डालेगी तो वो रिकॉर्ड हो जाएगा तो उस से मुझे पता चल जाएगा की दीदी ने कौन 2 सी keys दबाई हे और उनका पासवर्ड क्या और जब दीदी चैटिंग मे अपनी ब्रा पेंटी जो भी दिखाएंगी वो भी कैमरे मे रिकॉर्ड हो जाएगा मै अपने इस प्लान पे बड़ा खुश हुआ मैंने उस तिखाल पे 1 कैमरा विडियो रिकॉर्ड मोड पे करके सही एंगल पे एडजस्ट करके रख दिया और अब मै बहुत खुश था मेरी तैयारियो से की आज तो दीदी को नंगी जरुर देखूंगा। जेसे ही दीदी शाम को आयी मेरा दिल जोर 2 से धड़क रहा था लेकिन जेसे ही मैंने दीदी को देखा बस देखता ही रह गया कितनी सेक्सी लग रही थी मेरे बेहेन रेड सूट लम्बे बाल खुले हुए गोरे फेस पे ब्राउन गोगल्स

दीदी आयी और मैंने दीदी को कहा दीदी यहाँ आओ न मुझे ये सम समझ नहीं आ रहा दीदी सामने आके बैठी और मेरे हाथ से बुक ली और कहा "इसमें क्या हुआ सोनू मैंने बतया तो था ला कॉपी दे तेरी मै वापस समझा देती हु " दीदी कॉपी लेकर सम करने के लिए झुकी और जो मै चाहता था वही हुआ दीदी के कुर्ते के गले मे से मुझे उनकी ब्रा दिखाई दे गई कितने मोटे 2 बोबे थे मेरी दीदी के ये सोच के मेरा लंड खड़ा हो गया दीदी के गले मे पतली सी चैन और उस लटकी हुई चैन मे से दीदी की ब्रा के कप्स साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे

Read More »

Sunday, 22 February 2015

प्यार 2

1दम से मम्मी ने कहा "प्रीती तू झाड़ू पूछे का कम ख़तम कर बर्तन और खाना मै कर लुंगी " दीदी ने कहा ठीक है मम्मी की ये बात सुन के मुझे मजा आया था क्योंकि मुझे पता था की अब मेरे बेहेन झाड़ू निकालेगी झुक झुक के वो जेसे ही झुकी झाड़ू निकलने के लिए मुझे उसकी ब्रा दिखाई दी मैंने पहले बार अपनी बेहेन की ब्रा और बोबे इतने क्लियर देखे थे मैंने सोचा दीदी की शमीज कहा गई शायद गर्मी के कारन उतार दी होगी जेसे 2 वो झुकती मुझे उसके ब्रा मे क़ैद बोबो के दर्शन होते हाय कितने मोटे मोटे बोबे थे रस से भरे हुए कितने कोमल होंगे ये बस यही सोच के और दीदी के ब्रा देख देख के मेरे हालत ख़राब हो चुकी थी मेरे लंड मे इतना तेज दर्द होने लग गया था की मैं बता नही सकता मै फटाफट बाथरूम गया वहा मैंने देखा दीदी के टॉवल के नीचे उनकी शमीज लटकी हुई थी मैंने उस शमीज को उठाया और सुंघा इतने कमसीन खुशबु थी उस शमीज मे दीदी के बोबो की शमीज सूंघते 2 अपने आप ही मेरे हाथ मेरे लंड पर चले गए और मैं अपना लंड हिलाने लगा ये सोच के की ये शमीज दीदी ने पेहेन रखी थी इसमें उसकी ब्रा थी और ब्रा में उसके मोटे कोमल बोबे थे और ये सोचते 2 मै झर गया आज जेसा सुकून आज जेसी फीलिंग मुझे कभी नहीं हुई थी अब मैंने सोचा की अगर दीदी की शमीज से इतना मजा आया मुझे तो दीदी को पूरी नंगी देखने मे कितना मजा आएगा जेसे ही मैं बाहर निकला मैंने दीदी के तकिये के नीचे उनके सेलफोन की लाइट चमकते देखी मैंने जाके सेलफोन चेक किया तो दीदी के सेलफोन1 पे मेसेज था मैंने वो मेसेज खोला उसमें लिखा हुआ था "गुड मोर्निंग मेरी सेक्सी जान क्या कर रही हो " वो मेसेज पड़ के मुझे शॉक लगा मैंने सोचा"ये क्या दीदी का कोई bf भी है " मुझे बहुत गुस्सा आया लेकिन मैंने अपने गुस्से को दबा लिया और मैं समझ गया की अगर ये लोग फोन पे chat करते हें तो नेट पे भी करते होंगे इनको पकड़ने के 1लिए प्लान सोच लिया . फिर मैंने सेलफोन वापस तकिये के नीचे रख दिया वो मेसेज डिलीट करके जब मैं हॉल मे गया तो दीदी पोछा लगा रही थी उनका कुरता थोडा पानी का काम करने के कारन गीला हो गया था इसी वजह से जब बी वो झुकती थी तो वो बहुत ज्यादा लटक रहा था मैं ये मौका नहीं छोड़ना चाहता था मैं 1 कॉमिक्स लेकर सामने बैठ गया जहा दीदी पोछा लगा रही थी और छुप छुप के उसकी ब्रा देखने लगा जब भी वो झुकती उसकी ब्रा का क्लियर व्यू मुझे दीखता क्योंकि कुरता गीला हो गया था , उसके झुकने पर उसकी ब्रा मे क़ैद उसके मोटे मोटे बोबे लटकते और ऊपर नीचे होते ये देख के मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा जब दीदी अपने हाथ उठा कर shelf साफ़ कर रही थी तो मैंने उनके underarms देखे वहां पर 1 भी बाल नहीं था बिल्कुल चिकना था मैंने सोचा दीदी क्या अपनी चुत के बाल बी साफ़ करती होगी क्या ये सब सोच 2 कर मेरा लंड वापस टाइट हो गया
तभी दीदी ने मुझे बुलाया "सोनू सुन जरा ये पानी के बाल्टी ऊपर लेके चल मैं तेरे पीछे 2 ऊपर आती हु " मैंने कहा हा दीदी मै बाल्टी लेके ऊपर चड़ा 2-3 सीडिया चडके 4th सीडी पे मेरे हाथ से पानी की बाल्टी छुट गई और सारा पानी दीदी के ऊपर गिर गया दीदी मुझ पर चिल्लाने लगी "पागल हे क्या अक्ल नहीं हे क्या तेरे में नहीं उठ रही थी तो बोल देता सारे कपडे गीले हो गए "लेकिन मेरा ध्यान तो मेरे बेहेन के हुस्न प था गीले होने के कारन उसके कुरता और कैपरी उसके शरीर से चिपक गए थे अब मुझे उसकी ब्रा का शेप बिलकुल क्लियर दिख रहा था और उसकी पेंटी का शेप भी मुझे साफ़ 2 दिख रहा था दीदी ने low waist पेंटी पेहेन रखी थी उसके बदन का 1-1 उभार मुझे नजर आ रहा था क्या मोटे 2 बोबे बाहर दिख रहे थे पतली कमर मोटी गांड गीले बाल बिलकुल कंचा लग रही थी फिर उसने मुझसे कहा की "क्या देख रहा है अब ध्यान से आना खुद मत गिर जाना सारे कपडे गीले कर दिए मेरे " मम्मी ने कहा अरे कपडे चेंज करले जल्दी नहीं तो सर्दी लग जाएगी मुझे पता था की अब दीदी बाथरूम मैं जाएंगी कपडे चेंज करने और ये मेरे लिए अच्छा मौका था उसे पूरी नंगी देखने का दीदी अपने गीले कपड़ो को चेंज करने के लिए बाथरूम मे गई ये मेरे लिए अच्छा मौका था अपनी दीदी को कपडे चेंज करते हुए पूरी नंगी देखने का दीदी के बाथरूम का दरवाजा बंद करने के थोड़ी देर बाद मै बाथरूम के बाहर आकर खड़ा हुआ और बाथरूम के अंदर देखने की कोशिश करने लगा मेरे दिमाग मे ये चल रहा था की दीदी अब अपना टॉप उतार रही होंगी अब दीदी केवल ब्रा मे होंगी मेरा लंड पूरा खड़ा था और मै बाथरूम के दरवाजे मे कोई छोटा सा छेद या दरार ढूँढ रहा था जहा से मुझे बाथरूम के अंदर का बेहतरीन नजारा सामने आ जाए लेकिन मेरे फूटी किस्मत साला दरवाजे म कोई दरार या छेद ही नहीं था तो मैंने नीचे झुक के दरवाजे और ज़मीन के बीच के गैप मे से अंदर देखने के कोशिश की मुझे नीचे बाथरूम की टाइल्स के reflaction से कुछ धुन्दला सा नजर आया लेकिन कुछ दिखा नहीं बस दीदी की टांगें दिखी फिर दीदी का टॉप नीचे गिरा फिर कैपरी फिर दीदी की काली ब्रा नीचे गिरी फिर पेंटी नीचे गिर मै झुके हुए ही अपने लंड को सहलाने लगा की अब दीदी बाथरूम मे पूरी नंगी होगी मै अपना लंड हाथ मे लेके इधर उधर घूम रहा था की कही से तो बाथरूम के अंदर देखने की जगह मिल जाए लेकिन कही कुछ जगह नहीं मिली मै वापस नीचे के गैप मे से देखने लगा दीदी ने साथ ही नहाना भी स्टार्ट कर दिया था दीदी बाथरूम मे पट्टे पे बैठकर नहा रही थी मुझे उनकी थोड़ी सी नंगी thigs के दर्शन हुए इतने मे मम्मी ने मुझे आवाज दी और मै चला गया सोचते हुए की दीदी नंगी बाथरूम मे है कहा 2 साबुन लगा रही होगी अपने नंगे जिस्म पे कहा 2 हाथ फेर रही होगी ये सोच सोच के मेरा दिमाग ख़राब और लंड बिलकुल टाइट खड़ा था
Read More »

प्यार 1

हमारे घर मे मैं और मेरी 1 बड़ी बेहेन है .मेरा नाम सोनू है और मेरे दीदी का नाम प्रीती है बात तब की है जब मैं 10th क्लास मे था और मेरी दीदी 12th क्लास में थी हम दोनों मैं किसी भी नार्मल भाई बेहेन की तरह प्यार था बचपन से हम साथ थे मेरे दीदी मेरा बहुत ध्यान रखती थी लेकिन मेरी लाइफ मै 1 दिन एसा आया की मेरा उसको देखने का ढंग ही बदल गया .जब दीदी 12th मै थी तो उनका फिगर होगा 34-30-34 लम्बे बाल 5'5 हाइट गोरा कलर .हम साथ मे ही स्कूल जाते थे।मेरे मन मे उनके लिए कुछ भी गंदे विचार नहीं थे लेकिन उस 1 दिन ने सब कुछ बदल दिया।

उस दिन सन्डे था हमारे स्कूल की छुट्टी थी मै और मेरे दीदी साथ ही सोते थे उनके और मेरे बेड के बीच 1 टेबल रखी हुई थी।हा तो उस दिन सन्डे के दिन मम्मी ने मुझे बोला की जा सोनू दीदी को उठा दे 9 बज रहे है मैंने कहा हा मम्मी मैं अपने रूम मे गया तो दीदी सो रही थी गर्मियों के दिन थे तो दीदी रात मे गाउन पेहेन लेती थी
उस दिन सुबह जब मै दीदी को उठाने पहुंचा तो दीदी साइड करवट में सो रही थी और उनका गाउन ऊपर हो गया था मैंने जेसे ही उन्हें उठाने के लिए उनपे से चद्दर हटाई मेने अपनी दीदी के नंगी चिकनी टांग देखी उनका गाउन उनकी thigs तक ऊपर हो गया था और जेसे ही मेने उनकी नंगी गोरी और चिकनी टांग देखी मुझे पता नहीं क्या होगया मेरे लंड मे 1 दम से हरकत हुई न चाहते हुए भी मुझे दीदी के ऊपर उठे गाउन मे से उनकी नंगी चिकने thighs म मजा आ रहा था बिलकुल गोरी साफ़ और चिकनी thigs थी मेरे दीदी की उनकी नंगी गोरी thigs देख के क मुझे पता नहीं क्या हो गया था आज तक मैंने किसी भी लड़की का एसा कुछ नहीं देखा था उस समय मुझे ये तक नही पता था की लड़की होती क्या है बस स्टडी और खेलना ही जानता था 1 दम से आज मैंने वो देखा जिसका मुझे आज तक पता नहीं था दीदी की thigs देखने के बाद मुझे और देखने की इच्छा हुई तो मैंने दीदी के गाउन को बड़े ध्यान से धीरे 2 डरते 2 थोडा सा और ऊपर किया तो मुझे उनके हिप्स की स्टार्टिंग दिखाई दी वो नजारा भी क्या नजारा था दोस्तों मेरे जवान बड़ी बेहेन की पूरी नंगी चिकनी टांग हिप्स तक मेरे सामने थी मुझे एसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ था मुझे पता नहीं क्या हो गया था मैंने फिर उनका गाउन ध्यान से थोडा और ऊपर किया अब मुझे उनकी पेंटी नजर आ गई उन्होंने black कलर की पेंटी पेहेन रखी थी मेरी दीदी मेरे सामने अपनी पेंटी मे सो रही थी मेरा लंड बिलकुल खड़ा हो गया था मैंने पहली बार किसी लड़की की पेंटी और हिप्स देखे थे मेरी दीदी के हिप्स देख के मैं पागल हो गया पता नहीं क्या हो गया था मुझे मैं उनकी पेंटी को छूना चाहता था जेसे ही मैंने अपना हाथ अपनी दीदी की thigs पे रखा मम्मी ने आवाज लगा दी "प्रीती क्या हुआ उठी नहीं तू " और मैं वहा से भाग गया मेरा साथ एसा कुछ होगा मैंने कभी नहीं सोचा था मेरी दीदी के लिए मेरी फीलिंग्स अब बदल चुकी थी उस दिन दीदी उठी ब्रश किया और सबको गुड मोर्निंग कहा और मुझे भी हमेशा की तरह गले लगा के विश किया उस दिन दीदी के गले लगने पर मुझे 1 अजीब सा एहसास हुआ उनकी कोमल स्किन उनके बालो की खुशबु उनके बदन के स्पर्श से आज मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं डाइनिंग टेबल पे बता था जब दीदी में मुझे झुक के गुड मोर्निंग विश किया.
जेसे ही दीदी झुकी तो मेरी नजरे दीदी के कुर्ते के अंदर गयी क्या नजारा था दीदी के कुर्ते के अंदर का उन्होने कुर्ते के अंदर ब्लैक शमीज पेहेन रखी थी और शमीज के अंदर ब्रा पेहेन रखी थी उनकी ब्रा का शेप तो मुझे दिखा लेकिन कलर नही दिखा क्योंकि उनकी शमीज का कलर ब्लैक था लेकिन अंदर क्या शेप बन रहा था उनके झुकने के कारन उनके बोबे थोड़े से लटक भी गए थे क्या बोबे थे मेरी बेहेन के मैंने तो कभी गोर ही नहीं किया था की मेरी दीदी के बोबे इतने मोटे हें.मुझे हग करके वो भी टेबल पर बैठ गए नाश्ता करने के लिए वो न्यूज़ पेपर पढ़ रही थी लेकिन मेरी नजर तो बार बार उनपे ही जा रही थी वो कुछ भी लेने के लिए हाथ इधर उधर करती तो उनके कुर्ते के गैप मे से मुझे उनकी शमीज और ब्रा की स्ट्रैप्स दिखाई देती जिसे देखने मे मुझे बहुत मजा आ रहा थामैं बार बार दीदी की शमीज और ब्रा के स्ट्रैप्स उनके कुर्ते की साइड के गले मे से देख रहा था उनके अंदर के शरीर की गोरी गोरी कोमल skin देखने मे मुझे बड़ा मजा आ रहा था नाश्ता करते हुए मै किसी न किसी बहाने से दीदी का हाथ टच कर रहा था मैंने सोचा की अब और कुछ ज्यादा केसे मजे लिए जाये तभी दीदी ने मुझसे बोल "अरे सोनू मुझे सॉस की बोतल लाके देना किचन मे से " मै खड़ा हुआ और दीदी को सॉस की बोतल लाके दी और पीछे से दीदी के गले मै हाथ दाल के खड़ा हो गया और उनके कुर्ते के गले मे झाँकने लगा दीदी तो मुझे देख नहीं सकती थी उन्होंइ कहा की "क्या हुआ सोनू आज बड़ा प्यार आ रहा है तुजे अपनी दीदी पे " मैंने कहा नहीं दीदी वो तो एसे ही" और मैंने दीदी के कुर्ते के अंदर पास से देखा उनकी शमीज और उनकी ब्रा मुझे अब साफ़ नजर आ रे थी मैंने अब हाथ गले से निकाल कर उनके कंधो पे रख लिया और उनकी ब्रा स्ट्रैप्स को महसुस करने लगा ये सब करते हुए मेरा लंड बिलकुल टाइट खड़ा था इच्छा तो हो रही थी की पीछे से खड़े होके उनके कुर्ते के गले मे हाथ डाल के उनके बोबे दबा दू उनकी ब्रा फाड़ के चूस लो उनके मोटे कोमल बोबो को लेकिन कुछ कर भी तो नहीं सकता था।सबका नाश्ता ख़तम हो चूका था और दीदी भी नाश्ता करके घर की साफ़ सफाई मे लग गए थी अब मै बस इसी फिराक म था की दीदी झुके और उनके बोबे देखलू मै दीदी के आस पास ही था
Read More »

खूबसूरत साली 3

 मेरी सगाई तो हो गई थी| मेरी शादी को अभी दो (२) महीने बाकी थे| और मुझे बैंक ज्वाइन करने में भी अभी एक (१) महिना शेष था| मैं और आशा एक ही शहरमे रहते थे| तो एक दिन मेरी सालियोंने मुझे उनके घर आने के लिए मुझे फ़ोन कर न्योता दे दिया|

ज्योती - नमस्ते जीजू|

मैं - नमस्ते डॉक्टर साहिबा| आज हमें कैसे याद किया|

ज्योती - (शरमाते हुए) बस याद आ गयी तो मन किया की चलो अपने प्यारे जीजू से कुछ बाते की जाये| वैसे आप तो हमें कभी याद ही नहीं करते| अरे हाँ आप का हमसे कोई काम तो नहीं है ना!

मैं - (ज्योती की ऐसी बाते सुन चौंकते हुए) क्यों जी ऐसी क्या बात हुयी जो आप ऐसे कह रही है| क्या हमने आप से कहा है या हमारे हाव भावों से ऐसा प्रतीत हुवा की हमें आप से कुछ काम होगा तो ही आप से बात करेंगे नहीं तो नहीं करेंगे|

ज्योती - अरे जीजू शायद मेरी बात से आप को बुरा लगा| मगर क्या आप को नहीं लगता की आप मुझे सच मैं भूल गए है| (और ज्योती हँसाने लगाती है|)

मैं - (कुछ परेशान होते हुए|) यार मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की मैं क्या भूल गया हूँ| अरे कुछ समझ में आये इस तरह से बात करो ना|

ज्योती - क्या जीजू आप को आशा ने कुछ बताया नहीं क्या?

मैं - लेकिन किस बारे मैं?

ज्योती - अरे बाबा क्या उसने नहीं बताया आज के बारे में?

मैं - नहीं मेरी उससे दो दिन से बात ही नहीं हुयी| अच्छा अब पहेलिय बुझाना बंद करो और तुम ही बतावो की आज क्या ख़ास बात है जो आप ने हमें फ़ोन करने की जेहमत उठाई| और हमें यूँ परेशान किया इतना उलझी बाते कर के|

ज्योती - पहले तो हम आप से माफी मांगते है अगर आप को बुरा लगा हो तो|

मैं - नहीं मेरे कहने का ये मतलब नहीं था| लेकिन मैं सच कह रहा हूँ की मेरी और आशा की दो दिन से बात ही नहीं हुयी| शायद वो मुझ से कुछ नाराज है|

ज्योती - तभी मैं कहूं की आशा इतनी उदास क्यों है कल से| क्या कुछ जागदा हुवा है क्या आप दोनों मैं कहे तो मैं आप की मदद कर सकती हूँ|

मैं - हाँ यार वो मैंने कुछ बोल दिया था गुस्से मैं तो वो नाराज हो गयी कल सुबह में| पर तुम मेरी मदद क्यों करोगी इस बात में? तुम्हे भी तो गुस्सा होना चाहिए था इस बात पर की मेरा आशा से झगडा हुवा है| मुझपे इतनी मेहरबानी करने की वजह| क्या मुझसे से कुछ चाहिए क्या?

ज्योती - चाहिए भी और नहीं भी| हाँ अगर आप चाहे तो मैं आपकी मदद कर दूँगी|

मैं - चलो ठीक है तो कर दो मदद| पर ये कैसे संभव है?

ज्योती - वो बात आप मुझपे छोड़ दीजिये| बस आप को एक काम करना होगा|

मैं - बोलिए क्या करना होगा| आप जो कहेंगी वो करने के लिए तैयार हूँ मैं| चाहे तो मैं आप से प्रोमिस करता हूँ|

ज्योती - ठीक है तो प्रोमिस है| आप को घर आना होगा आज शाम को|

मैं - आज! आज कुछ खास है क्या?

ज्योती - अरे मैं बातो बातों में भूल गयी आपको| आज मेरा जन्मदिन है| और मैंने आप को यही बताने के लिए फ़ोन किया है|

मैं - ज्योती सबसे पहले जन्मदिन की ढेर साडी शुभकामनाये| और मैं बिना भूले आज शाम को घर आ जाऊंगा|

ज्योती - शुक्रिया जीजू| अब मैं फ़ोन बंद करती हूँ| मुझे बहोत साड़ी तैयारियां करनी है|

मैं - अगर तुम्हे कुछ मदद चाहिए तो मैं अभी आ सकता हूँ|

ज्योती - ठीक है तो आ जाईये| मैं आप का इन्तजार करती हूँ|

इतना बोल ज्योती ने फ़ोन बंद कर दिया| और मैं भी १० मिनट में तैयार हो के आशा के घर की तरफ चल दिया|
______________________________
जाते जाते मुझे एक ख्याल आया| क्यों ना कुछ मिठाई ली जाए| तो मैं एक मिठाई की शॉप में चला गया| मैंने उस शॉप से रस मलाई ली और आशा की घर की और चल दिया|

घर जाते ही ज्योती ने दरवाज़ा खोला| जैसे ही मैंने उसे देखा मेरा मूह खुला का खुला रह गया| ज्योतीने जो कपडे पहने थे उसे देख मैं हैरान ही रह गया| उसने सिर्फ एक टॉप पहना हुवा था जो उसकी जांघों को भी छुपा नहीं पा रहा था|शायद उसने अंदरसे कुछ पहना भी नहीं था| क्यों की उसके टॉप के उपरसे ही मुझे उसके उरोजों के तने हुए काले चुचक साफ़ दिख रहे थे| और टॉप के आगे कोई बटन भी नहीं था और उसके टॉप से उसके उरोजों के बीच की दरार दिख सकती थी| और उसके उरोजों के कुछ कुछ दर्शन भी हो रहे थे|

मुझे ऐसा देखते देख ज्योती कुछ शरमा गयी और अन्दर भाग गई| वो जब भाग रही थी तो उसके कुल्हे बहोठी थिरक रहे थे|और भागते वक़्त मुझे उसका टॉप कुछ ऊपर सा हो गया तो मुझे उसके नग्न कुल्हे दिख गए और उसके निचे शायद उसने कुछ पहना नहीं था| क्या लग रही थी| मैं ये सब देख इतना उत्तेजित हो गया की मेरा पप्पू तम्बू बना के पेंट में खड़ा हो गया| ये तो अच्छा हुवा की ज्योती ने ये सब नहीं देखा|

मैं जब अन्दर गया तो ज्योती की आवाज़ आ गयी|

ज्योती - जीजू दरवाज़ा बंद कर लीजिये| घर मैं कोई नहीं है| सब लोग बाज़ार गए हुए है| और प्राप्ती स्कूल को गयी है|

उसकी यह बात सून मेरे शरीर में रोंगटे खड़े हो गए| जैसे तैसे मैंने दरवाजा बंद कर लिया और उसे कहा--------

मैं - ज्योती तुम कहा हो|

ज्योती - अन्दर हूँ|

मैं - क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ|

ज्योती - आइये न आप को किस ने रोका है|

मैं - अगर सब लोग बहार गए थे तो मुझे इतनी जल्दी कैसे बुला लिया|

मैं ये बोलते बोलते अन्दर दाखिल हुवा| वो अभीभी उसी टॉप में बैठी कुछ काम कर रही थी| उसे देख मेरे पप्पू ने फिर से हरकत करनी शुरू कर दी| इस वक़्त ज्योती मेरे पेंट की तरफ ही देख रही थी| मेरी हालत देख वो मन में ही हस रही थी| और वो बोल पड़ी|

ज्योती - मुझे क्या पता था की आप सच में इतने जल्दी आ जायेंगे| मुझे लगा था आप शायद एक घंटे बाद आयेंगे|

मैं - किसको घायल करने का इरादा है|

ज्योती - नहीं तो| मैं तैयार हो रही थी| इतने में आप आ गए|

मैं - लेकिन दरवाज़ेपे अगर कोई और होता और तुम्हे इस हालत में देखता तो उसका क्या होता|

ज्योती - वही होता जो अभी आप का हाल है|

मैं - याने तुमने जान बुझ कर ऐसे कपडे पहने है| मुझे उत्तेजित करने के लिए|

ज्योती - जैसे आप ठीक समझे| मैं तो सच में तैयार हो रही थी| मैं अभी नहाने जा रही थी|

मैं - तो अब तुम्हे किस ने रोका है| जावो नहा के आ जावो मैं रुकता हूँ| हाँ जाते वक़्त टीवी शुरू कर देना|

ज्योती - ठीक है मैं अभी आती हूँ नहा के|

ऐसे बोल वो उठ गयी और टीवी शुरू करने के लिए रिमोट खोजने लगी| रिमोट शायद निचे रखा हुवा था तो उसे उठाने के लिए वो जैसेही झुकी मुझे उसकी खुली गांड के फिरसे दर्शन हो गए| इस बार मैं अपने पर काबू ना प् सका और सीधे जाके उसे मैंने पीछे से पकड़ लिया| जैसे उसे इस अचानक हमले से कुछ ऐतराज़ नहीं था तो वो कुछ बोली नहीं सिर्फ बोली|

ज्योती - जीजू मैं आशा नहीं हूँ| किसीने देख लिया तो क्या सोचेगा की कैसा दामाद है जो अपनी साली से ऐसे बेशर्मोकी तरह चिपक गया है|

मैं - अब यहाँ कोई नहीं है तो किसीके कुछ कहने का सवाल ही नहीं उठता| वैसे जिसके पास ऐसी ख़ास साली हो वो जीजा तो बेशरम ही होगा|

मैंने जब उसे पकड़ा था तो मेरा हाथ उसके पेट पे था| उसने भी अपना हाथ मेरे हाथ पे रख दिया|
Read More »

खूबसूरत साली 2

मैं जब आशा को देखने पोहचा तो मैंने गार्डन में आरती को देखा| शायद उसे ये अंदाजा नहीं था की हम आशा को देखने आ रहे है| जब मैंने उसे देखा तो वो पौदों को पानी दे रही थी|उस वक़्त मुझे उसका सिर्फ पिछवाडा दिख रहा था| जिसे देख मैं तो हैरान रह गया| क्या दिख रही थी आरती| उसके वो बड़े बड़े कुल्हे जिसे मटकाते हुए वो पौदों को पानी दे रही थी| जिसे देखते ही मैं उसपे फ़िदा हो गया| मेरा ध्यान तब टूटा जब मेरे दोस्त ने मुझे टोका|

हम घर के अन्दर दाखिल हुए लेकिन मेरा ध्यान तो उस मटकते हुए कुल्हे पर ही था| मैं उसे भुला ही नहीं सकता था| अन्दर आने के बाद जब हम बैठे तब घर मैं सिवाई आशा की माँ के उसका भाई और ये तीन बहने ही थी| उसके भाई ने हमें बैठने के लिए कहा और कुछ ५ मिनट बाद एक बहोत ख़ूबसूरत लड़की हमें पानी देने के लिए उस कमरे में आ गयी| वो और कोई नहीं आरती ही थी| जब वो पानी देते हुए आ रही थी मैं सिर्फ उसका पिछवाडा ही देख रहा था| जैसे ही वो मुझे पानी देने के लिए मेरे पास आयी मेरी तो धड़कने बड़ी तेज हो रही थी| पर जैसे ही वो मुझे पानी देने के लिए झुकी मानो मुझपे तो बिजली गिर पड़ी| जैसे वो झुकी, पानी लेते वक़्त मेरी नजर सीधा उसके ड्रेस के गले से होते हुए उसके अन्दर तक चली गयी| और जो मैंने देखा वो तो मैं बयां नहीं कर सकता| उस वक़्त शायद उसने उस टॉप के अन्दर पुश अप ब्रा पहनी हुयी थी और उसकी वजह से उसके उरोज उस टॉप से बाहर आने को बेक़रार थे| ये नजारा देख मेरे हाथ से पानी का ग्लास गिर गया जो सीधा मेरी पेंट पे ही गिरा| जिससे मेरी पूरी पेंट गीली हो गयी| इस अचानक हुए हादसे से आरती को हसी तो बहोत आ रही थी लेकिन मेरी हालत देख उसे तरस भी आ रहा था| इस हादसे की वजह से मुझे इतनी शर्म आ रही थी की मेरी नजर ऊपर उठ नहीं रही थी| इतने में आरती मुझे बोली "आप अन्दर चलिए"| इस अचानक हुए हादसे से मैं पहले ही शर्म से लाल हो गया था /images/smilies/red_smile.gif और उसके इस बात से तो मुझे क्या बोलू वो सूझ भी नहीं रहा था|
मेरी इस समस्या को जान मेरा दोस्त मुझे बोला "सुमीत! अरे यार बिना कुछ सोचे जल्दी से अन्दर जा नहीं तो तेरी हालत और भी खराब हो जाएगी"| उसकी बात मान मैं आरती के पीछे चला गया| मैं अन्दर गया तो आरती ने मुझे तौलिया दिया और बोली "आप की पेंट निकल के दीजिये| मैं उसे सुखा देती हूँ"| मैं उसे बोला "इतने जल्द पेंट नहीं सूखेगी"| तो आरती बोली "अरे सुमीतजी आप पेंट निकली ये तो मैं सिर्फ ५ मिनट मैं कुसे सूखा देती हूँ "| मैंने बिना कुछ बोले उसे मेरी पेंट निकाल के दे दी| आरती मुझे बोली "आप थोड़ी देर बैठिये"| और इतना कह के वो मेरी पेंट आयरन करने लगी| इस बार भी वो मेरी तरफ पिछवाडा हिला हिला कर के आयरन कर रही थी| इस वक़्त वो मेरे इतने करीब थी मुझे लगा की मै उसे छु लूं| लेकिन हालात देख मैं सिर्फ उसे देख रहा| उसने मुझे पेंट दे दी और वो चली गयी| में भी पेंट पहन के बाहर आ गया|

कुछ देर बाद लड़की देखना का प्रोग्राम ख़तम कर हम वापिस आ गए|

घर आते ही मैं मेरे घरवालों से आशा के लिए हाँ कर दी|

क्रमशः
______________
जल्दीही मेरी सगाई कि तैयारीयां शुरू हो गयी|

सगाई आशा के घर में थी| तो हम उनके घर दोपहर १२ के करीब पहुँच गए| सगाई गार्डन में थी| १२:३० को मोहरत था|

में तो तैयार था और जब आशा को गार्डन में लाया गया तो मैं उसे देखता ही रह गया| उसने गुलाबी रंग की साडी पहनी थी जो सेमी ट्रांसपेरेंट थी| उसने साडी को नाभी के थोडासा नीचे तक पहना था| जिसकी वजहसे उसकी कमर के दीदार हो रहे थे| उसपे मैचिंग कलर का "V" शेप का ब्लाउज पहना था| मगर उस ब्लाउज में से उसके उभारोंके बीचमे से उसका क्लीवेज दिख रहा था| और क्या गजबका क्लीवेज दिख रहा था मेरी नज़र तो हट ही नहीं रही थी| उसने बाल खुले छोड़े थे जिस वजहसे कुछ जुल्फे उसके चेहरेपे आ रही थी| जो उसे परेशान कर रही थी और वो बार बार उसे पीछे किये जा रही थी| उसने अपने लबों पर हलके गुलाबी कलर की लिपस्टिक लगायी थी| गालोंपे हल्का गुलाबी फाउंडेशन लगाया था| हाथोंमे गुलाबी कलर की चूड़ीयां पहनी थी|


उसके इस लिबास को मैं भूल नहीं सकता| मैं उसे तब तक देखता रहा जब तक वो मेरे पास आके नहीं बैठी| रसम शुरू हो गयी| घर की औरतोंने हमारा तिलक किया| बाद में हमने एक दुसरे को रिंग पहना दी| इस तरह से हमारी सगाई हो गई| इसके बाद आशा घर के अन्दर चली गई| उसके हमारी आवभगत शुरू हुई| तक़रीबन १:३० बजे हम सब ख़तम करके घर लौट आये|

सगाई तो हो गई लेकिन आज जब से मैंने आशा को देखा था मेरा तो कही दिल भी नहीं लग रहा था| हर वक़्त मेरी नज़र के सामने सिर्फ आशा का चेहरा ही दिखाई दे रहा था| मुझे दो हफ्ते बाद अपनी बैंक ज्वाइन करनी थी| तो अगले हफ्तेमे मेरी शादी थी| घर के सभी लोग शादी की तैयारी में लग गए|
Read More »

खूबसूरत साली 1

 यह कहानी है मेरी और मेरी तीन गजबकी खूबसूरत सालीयों की है|

मेरा नाम सुमित है| मैं बैंक मैं नौकरी करता हूँ| मेरी उम्र ३१ साल है| मेरी शादी हो गयी है|
मेरी बिविका नाम आशा है| उसकी उम्र २२ साल है|

मेरी शादी को ४ साल हो गये है| मुझे एक २ साल का लड़का है| उसका नाम सचिन है| मेरा लड़का बडाही नटखट और शरारती है|


मेरी बड़ी साली जो की डॉक्टर हैं| उसका नाम ज्योती है| उम्र २६ साल है| उसकी शादी हो गयी हैं| शादी को एक साल हो गया है| उसके पतिभी डॉक्टरही है| उनका नाम स्वप्निल है|


दुसरी साली जो की अभी इंजीनियरिंग के दूसरे साल मैं पढ़ रही हैं| उसका नाम आरती है| उम्र २० साल है|


तीसरी जो की अभी बारहवी मैं पढ़ रही हैं| उसका नाम प्राप्ती है| उम्र १८ साल है|
आशा दिखने मैं ठीक ठाक है| मेरे कहने का मतलब की उसका बॉडी कलर गेहूआ है| उसकी फिगर है ३२– २८–३२ है|

वैसे तो मैं एक बहुत सीधे किस्म का लड़का हूँ| मैंने उस वक़्त तक किसी भी लड़की की तरफ उस नजरसे नहीं देखा था| लेकिन उस दिन मैं जब आशा को देखने गया तब घरमें आतेही मेरी नज़र आरतीपे पड़ी| उसे देखतेही मैं तो पागल हो गया| बात ही कुछ ऐसी थी की मैं उसे देखता ही रह गया|

हम आशाको देखने उसके घर पोहचे और उनके घरमे जा ही रहे थे की मेरी नज़र उनके गार्डन इसे की और गयी| उनके यहाँ जीतनी जगहमें उनके पिताजी ने घर बनाया उतनीही जगह गार्डन के लिए छोड़ दी थी| उस वक़्त मैंने वहा आरतीको देखा|

कहानी आगे बढाने से पहले मेरी तीनो सालियोंके बारेमे कुछ जानकारी देता हूँ|

जैसे मैंने बताया मेरी पहली साली ज्योती जो एक डॉक्टर हैं उस वक़्त अपने आखरी साल मैं पढ़ रही थी जो की पुणेमें थी| दिखने में गोरी चिट्ठी| कद तक़रीबन ५'२" है| उसकी फिगर आशासे अच्छी है| याने की ३४ - २८ - ३६ है| वैसे उसे पढाई के इलावा कुछ सुझाता भी नहीं| लेकिन उस वक़्त छुट्टी थी तो घर पे आ गयी थी|

मेरी दूसरी साली आरती जो की उस वक़्त बारहवी में पढ़ रही थी| बड़ी नटखट लड़की थी| दिखने में ज्योती से ख़ूबसूरत है| उसका कद ५' है| उसका सही आकर्षित करने वाला भाग याने उसकी फिगर| दोस्तों आप यकींन नहीं करोगे| उसकी फिगर ३८ - ३० - ४० है| जिसपे मैं फ़िदा हूँ|

इस वक़्त हम प्राप्ती के बारे में नहीं देखेंगे क्यों की वो अभी स्कूल में पढ़ रही है| वक़्त आने पर हम उसके बारे में देखेंगे|

क्रमशः
Read More »

यौन क्षुधा

 अकेलापन भी कितना अजीब होता है। कोई साथ हो ना हो, पुरानी यादें तो साथ रहती ही हैं। मैं छुट्टियों में गांव में दादा-दादी के पास आ गई थी। वो दोनों मुझे बहुत प्यार करते थे। मेरे आने से उन दोनों का अकेलापन भी दूर हो जाता था। पड़ोसी का जवान लड़का भूरा भी मेरी नींद उड़ाये रखता था। ऐसा नहीं था कि मैंने अपनी जिन्दगी में वो पहला लड़का देखा था। मैंने तो बहुतों के लण्ड का आनन्द पाया था। पर ये भूरा लाल, वो मुझे जरा भी लिफ़्ट नहीं देता था। आज शाम को फ़िजां में थोड़ी ठण्डक हो गई। मैं अपना छोटा सा कुर्ता पहन कर छत पर आ गई। ऊपर ही मैंने ब्रा और चड्डी दोनों उतार दी और एक तरफ़ रख दी।
मेरी टांगों के बीच ठण्डी हवा के झोंके टकराने लगे। जैसे ही हवा ने मेरी चूत को सहलाया मुझे आनन्द सा आने लगा। मेरा हाथ स्वतः ही चूत पर आ गया और अपनी बड़ी बड़ी झांटों के मध्य अपनी चूत को सहलाने लगी। कभी कभी जोश में झांटो को खींच भी देती थी। मैंने सतर्कता से यहाँ-वहाँ देखा, शाम के गहरे धुंधलके में आस-पास कोई नहीं था। शाम गहरा गई थी, अंधेरा बढ़ गया था। मैं पास पड़ी प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठ गई और हौले हौले अपनी योनि को सहलाने लगी, मेरा दाना कड़ा होने लगा था। मैंने अपना कुर्ता ऊपर कर लिया था और झांटों को हटा कर चूत खोल कर उसे धीरे धीरे सहला रही थी, दबा रही थी।
मेरी आंखें मस्ती से बन्द हो रही थी। अचानक भूरा आया और मेरी टांगों के पास बैठ गया। उसने मेरे दोनों हाथ हटाये और अपने दोनों हाथों की अंगुलियों से मेरी चूत के पट खोल दिये। मुझे एक मीठी सी झुरझुरी आ गई। उसकी लम्बी जीभ ने मेरी चूत को नीचे से ऊपर तक चाट लिया। फिर मेरी झांटें खींच कर अपने मुख को योनि द्वार से चिपका लिया। मेरी जांघों में कंपकंपी सी आने लगी। पर उसकी जीभ मेरी चूत में लण्ड की तरह घुस गई। मेरे मुख से आह निकल पड़ी। वो मेरी झांटे खींच खींच कर मेरी चूत पीने लगा। मैंने भूरा के बाल पकड़ कर हटाने की कोशिश की पर बहुत अधिक गुदगुदी के कारण मेरे मुख से चीख निकल गई।
तभी मेरी तन्द्रा जैसे टूट गई। मेरे हाथों में उसके सर बाल की जगह मेरी झांटें थी। मैंने जल्दी से इधर उधर देखा, ओह कैसा अनुभव था ! मैं अपने पर मुस्करा उठी और आश्वस्त हो कर बैठ गई।
चूत में मची हलचल के कारण मेरा शरीर बल सा खाने लगा। मेरी झांटें मेरे चूत के रस से गीली हो गई थी। मैंने अपने उरोजों पर नजर डाली और उसकी घुण्डियों को मल दिया। मेरी चूत में एक मीठी सी टीस उठी। मैं जल्दी से उठी और झट के एक दीवार की ओट में नीचे उकड़ू बैठ गई और अपनी टांगें चीर कर अपनी योनि को सहलाने लगी। फिर अपने सख्त होते दाने को सहला कर अपनी एक अंगुली धीरे से चूत के अन्दर सरका ली।
"दीदी , मजा आ रहा है ना…" भूरा पास में खड़ा हंस रहा था।
"तू … ओह … कब आया … देख किसी को कहना मत…" मैं एकाएक बौखला उठी।
"यह भी कोई कहने की चीज है … मुठ मारने में बहुत मजा आता है ना?" वो शरारत से बोला।
"तुझे मालूम है तो पूछता क्यूँ है … तुझे मुठ मारना है तो यहीं बैठ जा।" मैंने उसे प्रोत्साहित किया।
"सच दीदी, आपके पास मुठ मारने में तो बहुत मजा आयेगा … आप भी मेरे लण्ड परदो हाथ मार देना।" उसने अपने पजामे में से अपना लौड़ा हिलाते हुये कहा।
"चल आजा … निकाल अपना लौड़ा …यूं इसे हिला क्या रहा है?" मैंने मुस्कराते हुये कहा।
भूरा अपना पजामा उतार कर मेरे पास ही बैठ गया और लण्ड को हाथ में लेकर हिला-हिला कर मुठ मारने लगा। उसे देख कर मुझे अति संवेदना होने लगी, मुझे भी हस्त मैथुन करने में अधिक मजा आने लगा। भूरा तो मेरी चूत देख देख कर जोर-जोर से हाथ चलाने लगा। तभी उसके लण्ड से एक तेज पिचकारी उछल पड़ी और उसका वीर्य हवा में लहरा उठा। मेरे शरीर ने भी थोड़ा सा बल खाया और मेरा पानी भी निकल पड़ा।
"भूरा … भूरा … आह मैं तो गई … साली चूत ने रस निकाल दिया।" मैं आह भरती झड़ने लगी।
मैंने अपनी आंखे खोल कर भूरा को निहारा … पर वहाँ अंधेरे के अलावा कुछ भी नहीं था। मैं अपनी सोच पर फिर से झेंप कर मुस्करा पड़ी। मैं झड़ कर उठ खड़ी हुई। फिर से एक बार कुर्सी पर बैठ गई।
तभी दादी ने मुझे पुकारा। मेरे विचारो की श्रृंखला भंग हो गई। मैंने फ़ुर्ती से अपनी ब्रा और चड्डी ली और नीचे भाग आई। दादी ने मेरे हाथ ब्रा और चड्डी देखी तो मुस्करा पड़ी। फिर दादी भोजन की थाली रख कर सोने चली गई थी। मैं भी भोजन करके अपने कमरे में आ गई।
रात को लेटे लेटे मुझे फिर भूरा के ख्यालों ने आ घेरा। मेरी चुदाई को काफ़ी महीने गुजर गये थे सो पल पल में मेरी योनि में कुलबुलाहट होने लगती थी। कैसा होता यदि भूरा मेरे पास होता और अपना लण्ड मेरे मुख में डाल कर मुझे चुसाता। ऊह ! साले लड़के तो मुख ही चोद डालते है। वो विनोद ! मैंने उसे क्या लिफ़्ट दे दी कि मेरी गाण्ड से चिपक कर कुत्ते की तरह कमर चलाने लगा। सोच सोच कर मुझे हंसी आने लगी।
"दीदी, अब हंसना बन्द करो और मेरा ये लण्ड अपने मुख में लॉलीपॉप की तरह चूस डालो।" भूरा मुझे घूर घूर कर देख रहा था। उसका मोटा लण्ड उसके हाथों में हिला रहा था।
"चल हट, बेशरम … ऐसे भी कोई लण्ड को मुख आगे हिलाता है।" मैंने उसे दूर करते हुये कहा।
"प्लीज, अपना योनि जैसा मुख खोलो ना… आह … हाँ, यह हुई ना बात।" मेरा मुख बरबस ही अपने आप खुल गया।
उसके मुख से आह निकल गई। मेरे मुख में उसका मोटा लण्ड इधर उधर घूम रहा था। तभी मैंने उसके लौड़े की चमड़ी खोल कर पीछे खींच दी, आह … लाल सुर्ख सुपारा !
मेरा मन मचल गया … उसके छल्ले को मैंने कस कस कर चूस लिया।
"दीदी, ज्यादा नहीं, निकल जायेगा …" वो आनन्द से मचलता हुआ बोला।
"इतना मस्त सुपारा … चल मेरी चूत में इसे घुसेड़ कर मुझे मस्त कर दे।" मेरी चूत अब रतिरस से सराबोर होने लगी थी।
उसने तुरन्त मेरी टांगों के बीच में आकर उन्हें ऊपर उठा दिया। इतना ऊपर कि मेरी गाण्ड की गोलाईयाँ तक भी ऊपर उठ गई। तभी आशा के विपरीत उसने मेरी गाण्ड में लण्ड घुसा डाला। लण्ड बिना किसी तकलीफ़ के असीम आनन्द देता हुआ सरसराता हुआ गाण्ड में घुस गया।
"ओह … भूरा… मार दी मेरी गाण्ड … अच्छा चल … शुरू हो जा !" मैं आनन्द से लबरेज हो कर मचल पड़ी।
"दीदी सच कहूँ, सारा रस तो तेरे चूतड़ों की गोलाईयों में ही तो है … मेरा मन इन्हें मटकते देख कर मचल जाता है और लगता है कि बस अब तेरी गाण्ड चोद दूं।"
उसकी सारी आसक्ति मेरे चूतड़ों की सुन्दरता पर थी, जिसे देख कर उसका लण्ड फ़ड़क उठता था।
मैं हंस पड़ी … " भूरा, मस्ती से चोद दे … मुझे भी मजा आ रहा है…"
मेरी गाण्ड चोदते चोदते उसने अब मेरी चूत को सहला कर धीरे से उसमें लण्ड घुसा दिया। मेरी चूत जैसे सुलग उठी। उसके भारी हाथ मेरी छातियों को मरोड़ने लगे। मैं उसके चोदने से मस्त होने लगी। वो अब मेरे ऊपर लेट गया और अपने दोनों हाथों पर शरीर का भार ले कर ऊपर उठ गया। अब उसके शरीर का बोझ मेरे ऊपर नहीं था। वो और मैं बिलकुल फ़्री थे। मुझे भी अपनी चूत उछालने का पूरा मौका मिल रहा था। वो बार बार चूम कर मेरी चूत पर जोर से लौड़ा मार रहा था। मेरा शरीर जैसे वासना के मारे उफ़न रहा था। अधखुली आंखों से मैं उसके रूप का स्वाद ले रही थी, उसके चेहरे के चोदने वाले भाव देख रही थी। मेरी उत्तेजना चरमसीमा पर थी। तभी मैं चीख पड़ी और मेरा रज छूट गया। तभी भूरा ने अपना लण्ड निकाला और और मेरे मुख में पूरा घुसेड़ दिया। तभी उसका वीर्य मेरे मुख में निकल पड़ा और हलक में उतरता चला गया। मेरा रज निकलता जा रहा था और मैं पस्त हो कर अंधेरे में खोती जा रही थी।
सवेरे जब आँख खुली तो मेरा कुर्ता ऊपर था और दादी मां मुस्करा कर मुझे चादर ओढ़ा रही थी।
"बिटिया रानी, कोई सुन्दर सपना देख रही थी ना?"
मैं चौंक गई और मैंने चादर देखते ही समझ लिया कि दादी ने मेरा नंगापन देख लिया है।
"दादी मां, वो तो अब… सपने तो सपने ही होते हैं ना !"
दादी मेरे पास बैठ गई और अपने जवानी के किस्से बताने लगी। पर मेरा ध्यान कहीं ओर ही था। भूरा घर के अन्दर से कुछ सामान ले जा रहा था।
"दादी, भूरे को एक बार यहाँ बुला दो …" मैंने दादी को टोकते हुये कहा।
"आजकल की लड़कियाँ ! मेरी बात तो सुन ही नहीं रही है … सारा ध्यान जवान लड़कों पर रहता है। अरे भूरे … यहाँ तो आ !"
भूरा ने अन्दर आते ही मुझे देखा और मुड़ कर वापस जाने लगा।
"ऐसा क्या है भूरा, जो मुझे देख कर जा रहे हो …"
"दीदी, मुझे काम याद आ गया है …" और वो दो छंलागों में कमरे से बाहर भाग गया। मैं उसकी बेरुखी पर तड़प उठी। सारी छुट्टियाँ अब क्या मुझे सपनों में जीना होगा। उह ! यहाँ तो कोई चोदने वाला भी नहीं मिलता। छुट्टियों में शहर से सभी लड़के अपने अपने घर चले गये थे … कौन था भला मुझे चोदने वाला …
किससे अपनी चूत की प्यास बुझाऊँ…? मुझे लगा कि अब यहाँ से जल्दी ही प्रस्थान करना चाहिये। कब तक भला अकेली ही पड़ी विचारों का मैथुन करती रहूँ, मुझे तो सख्त लौड़े की आवश्यकता थी जो चूत के या गाण्ड के भीतर तक जाकर मेरी यौन क्षुधा तृप्त कर सके !
रीता शर्मा, नोयडा
Read More »